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‘महफिल ए सूफियाना कव्वाली’ में निजामी ब्रदर्स ने बांधा समां
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 31 Jan 2017 09:46 AM IST
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टैगौर में तीन दिवसीय बसंत उत्सव की शुरुआत
- फोटो : अमर उजाला
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टैगोर थिएटर में सोमवार से तीन दिवसीय बंसत उत्सव की शुरुआत हुई। इसका आयोजन चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से किया जा रहा है। कार्यक्रम में देश जाने माने कलाकार अपने ग्रुप के साथ परफार्मेंस दे रहे हैं।
पहले दिन नई दिल्ली के निजामी ब्रदर्स ‘महफिल ए सूफियाना कव्वाली’ पर प्रस्तुति दी। सूफियाना कव्वाली के उस्ताद माने जाने वाले और सिंकदराबाद घराने से ताल्लुक रखने वाले गुलाम साबिर निजामी और उनके भाई गुुलाम वारिस निजामी ने एक के बाद एक शानदार कव्वाली से समां बांध दिया।
कार्यक्रम में निजामी बद्रर्स ने ‘प्यार किए जा, प्यार ही इबादत है, प्यार ही पूजा है’ जैसी कव्वाली की जानदार प्रस्तुति दी। इसके बाद ‘आज बसंत मनाए सुहाग आज बसंत मनाए’ और ‘फूल रही सरसो सगरा बन’ पर खूब तालियां बटोरी।
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बसंत को देखते हुए टैगोर थिएटर में बसंत उत्सव की शुरुआत हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्टेज को भी बसंत के रंग में सजाया गया था। स्टेज के आस-पास पीले रंग से सजाया गया। इसके साथ ही बसंत के दिनाें में उड़ाई जाने वाली पतंगाें को भी खासतौर पर स्टेज पर डिस्पले किया गया है।
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पहले दिन नई दिल्ली के निजामी ब्रदर्स ‘महफिल ए सूफियाना कव्वाली’ पर प्रस्तुति दी। सूफियाना कव्वाली के उस्ताद माने जाने वाले और सिंकदराबाद घराने से ताल्लुक रखने वाले गुलाम साबिर निजामी और उनके भाई गुुलाम वारिस निजामी ने एक के बाद एक शानदार कव्वाली से समां बांध दिया।
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कार्यक्रम में निजामी बद्रर्स ने ‘प्यार किए जा, प्यार ही इबादत है, प्यार ही पूजा है’ जैसी कव्वाली की जानदार प्रस्तुति दी। इसके बाद ‘आज बसंत मनाए सुहाग आज बसंत मनाए’ और ‘फूल रही सरसो सगरा बन’ पर खूब तालियां बटोरी।
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बसंत को देखते हुए टैगोर थिएटर में बसंत उत्सव की शुरुआत हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्टेज को भी बसंत के रंग में सजाया गया था। स्टेज के आस-पास पीले रंग से सजाया गया। इसके साथ ही बसंत के दिनाें में उड़ाई जाने वाली पतंगाें को भी खासतौर पर स्टेज पर डिस्पले किया गया है।