{"_id":"5862c3ad4f1c1b741aeec540","slug":"tagore-theatre-chandigarh-event-chanda-ka-sangarsh","type":"story","status":"publish","title_hn":"देखिए क्या हुआ जब एक घर में जन्मा किन्नर, संघर्ष की बेमिसाल कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देखिए क्या हुआ जब एक घर में जन्मा किन्नर, संघर्ष की बेमिसाल कहानी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 28 Dec 2016 01:10 AM IST
विज्ञापन
थिरु नंगाई नाटक में दिखा चंदा का संघर्ष
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़ सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में अलंकार थिएटर ग्रुप की ओर से थिरु नंगाई नाटक का मंचन किया। नाटक का निर्देशन चक्रेश कुमार ने किया। यह नाटक महेंद्र भीष्म और परमंड नायक के लेख पर आधारित था। नाटक में दिखाया गया कि चंदा नाम की एक लड़की डेरे में रहती है। जब वह बड़ी होती है तो उसे पता चलता है कि वह किन्नर है।
उसे जब पता चलता है कि उसके किन्नर होने पर उसके मां बाप उसे छोड़ देते हैं। समाज के डर से वह इस तरह का कदम उठाते हैं। यह जानकार उसे दुख होता है। वह उसी दिन ठान लेती है कि वह अपने अधिकार को लेकर रहेगी। समाज में अपनी कमियों को छिपाने के लिए मां बाप इतने मजबूर नहीं होने चाहिए। वह अपने माता पिता को ढूंढने का बीड़ा उठाती है। वह उन्हें काफी संघर्ष के बाद ढूंढ लेती है और उनके पास चली जाती है।
वह समाज को बताती है कि शर्म के बारे अभिभावक अपने बच्चों से मुंह मोड़ लेते हैं। लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। नाटक में दिखाया गया है कि भारत जैसे देश में जहां धरती से लेकर आकाश तक सभी को पूजनीय माना जाता है। लेकिन थर्ड जेंडर को इंसान मानने से यह समाज क्यों कतराता है। यह बहुत बुरा है। समाज में किन्नरों का जीवन कितना संघर्ष भरा होता है। यह इस नाटक में दिखाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
उसे जब पता चलता है कि उसके किन्नर होने पर उसके मां बाप उसे छोड़ देते हैं। समाज के डर से वह इस तरह का कदम उठाते हैं। यह जानकार उसे दुख होता है। वह उसी दिन ठान लेती है कि वह अपने अधिकार को लेकर रहेगी। समाज में अपनी कमियों को छिपाने के लिए मां बाप इतने मजबूर नहीं होने चाहिए। वह अपने माता पिता को ढूंढने का बीड़ा उठाती है। वह उन्हें काफी संघर्ष के बाद ढूंढ लेती है और उनके पास चली जाती है।
विज्ञापन
वह समाज को बताती है कि शर्म के बारे अभिभावक अपने बच्चों से मुंह मोड़ लेते हैं। लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। नाटक में दिखाया गया है कि भारत जैसे देश में जहां धरती से लेकर आकाश तक सभी को पूजनीय माना जाता है। लेकिन थर्ड जेंडर को इंसान मानने से यह समाज क्यों कतराता है। यह बहुत बुरा है। समाज में किन्नरों का जीवन कितना संघर्ष भरा होता है। यह इस नाटक में दिखाया गया।
विज्ञापन