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टैगोर में दिखाया, गलत औरत या मर्दों की सोच
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 03 Mar 2014 06:27 PM IST
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रूपक कला एंड वेलफेयर सोसाइटी ने रविवार शाम नोर्थ जोन कल्चरल सेंटर, पटियाला और डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर, हरियाणा सरकार के सौजन्य से चार दिन के थिएटर फेस्विटल के पहले दिन संगीता गुप्ता के निर्देशन में नाटक ‘गलत औरत’ का मंचन किया गया।
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नाटक शुरू होता है मंजीत नाम की लड़की की जिंदगी से, जिसकी मां का देहांत हो चुका है। मंजीत के बड़े होने पर उसके पिता जर्मनी के एक लड़के से उसकी शादी करा देते हैं।
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लड़के की जर्मनी में पहले से ही शादी हो चुकी है, लेकिन इस सूरत में कि वह उसे तलाक देकर मंजीत का हाथ थाम लेगा मंजीत के पिता शादी के लिए तैयार हो जाते है। लेकिन, मंजीत को पंजाब में छोड़ उसका पति जर्मनी चला जाता है।
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मंजीत को जब कुछ नहीं सूझता तो वह भी बच्चे के साथ गैरकानूनी तरीके से जर्मनी चली जाती है, लेकिन इस बीच उसका काफी मर्दों द्वारा शारीरिक शोषण होता है।
अंत में जब वह अपने पति तक पहुंचती है तो वह उसे ‘गलत औरत’ कहकर उसे और उसके बच्चे को अपनाने से इन्कार कर देता है। नाटक की कहानी वीना वर्मा ने लिखी है।
नाटक अच्छा था। विदेश में रहने वाले युवक से शादी करवाते वक्त कई मां बाप उसके बारे में पूरी तरह से जांच नहीं करवाते। यह समस्या आम है। नाटक में इसे अच्छे तरीके से पेश किया गया।
-सर्बजीत सिंह, रिटायर्ड कर्मी (बीएसएनएल)
स्टेड पर टपका रहा था पानी
टैगोर थिएटर में शनिवार को नाटक मोहनजोदड़ो का मंचन हुआ। इसके बीच में स्टेज में पानी टपक रहा था। रविवार को भी नाटक ‘गलत औरत’ के मंचन के दौरान स्टेज की एक साइड पर पानी टपकता रहा।