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सिविल अस्पताल में सिस्टम फेल: 28 लाख खर्च, फिर भी पानी का संकट

Mon, 14 Sep 2026 01:51 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 01:51 AM IST
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System failure at Civil Hospital: 28 lakh spent, yet a water crisis persists.
पंचकूला। सेक्टर-6 के सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ रही है। एमसीएच बिल्डिंग में शिफ्टिंग को महीनों बीत गए, लेकिन सात मंजिला इमारत के लिए नया ट्यूबवेल आज तक शुरू नहीं हो पाया। नतीजा, 200 बेड के अस्पताल में पानी के लिए हाहाकार मचा है और मरीज बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। अब अधिकारी 3 से 4 लाख लीटर के स्टोरेज टैंक और ट्यूबवेल जल्द शुरू होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन बरसात में खुदाई और धीमी रफ्तार देखकर मरीजों को विभाग के दावों पर भरोसा नहीं है। आलम यह है कि ट्यूबवेल और टैंक के लिए खुदाई की मगर पिछले 15 दिनों से काम बरसात की वजह से रुका रहा। हालांकि, पीएमओ डॉ. आरएस चाैहान ने स्पष्ट ताैर पर दावा किया था कि मरीजों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए अस्पताल में 24 घंटे पानी की आपूर्ति के लिए जन स्वास्थ्य विभाग नया ट्यूबवेल बना रहा है, जो अगले 15 दिनों में शुरू हो जाएगा।
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विभाग ने 28 लाख रुपये का बजट पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट को जारी कर दिया था। इसके बाद एक माह पहले बरसात में ही ट्यूबवेल की खुदाई शुरू कर दी, वो भी बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के। अभी तक सिर्फ ढांचा ही खड़ा करने की कोशिशें हो रही हैं। अस्पताल में इकलौते पुराने ट्यूबवेल से सप्लाई हो रही है, जिसका प्रेशर सातवीं मंजिल तक पानी पहुंचाने में नाकाम है।
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पीने के पानी से भी तरस रहे लोग
हालत यह है कि चौथी से सातवीं मंजिल पर बने बाल रोग और स्त्री रोग वार्ड, ओपीडी और छह ऑपरेशन थिएटरों में पीने के पानी से लेकर शौचालयों तक में पानी नहीं है। प्रसूताओं और नवजात बच्चों के परिजनों को नीचे उतरकर बाहर से कैंपर और बोतल खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है। दो दिन पहले मरीजों ने इसको लेकर हंगामा भी किया था।
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नई मोटर भी नहीं दिला सकी राहत
मरीज के तीमारदार सोमिथ ने कहा कि सिविल अस्पताल और एमसीएच में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। रात को मरीजों को वाॅटर कूलर में भी पानी नहीं मिलता। मरीजों से बात सुनने को मिलती है कि जब पहले से पता था कि एमसीएच में हर वार्ड, ओटी और शौचालय के लिए अलग पाइपलाइन है और पानी की मांग कई गुना बढ़ेगी, तो पहले से तैयारी क्यों नहीं की गई। खानापूर्ति के लिए लगाई गई नई मोटर भी फेल साबित हुई। इस बारे में पब्लिक हेल्थ के एक्सईन समीर शर्मा से फोन पर संपर्क करने पर जवाब नहीं मिला।

कोट
स्वास्थ्य विभाग द्वारा पब्लिक हेल्थ को नए ट्यूबवेल के लिए बजट ट्रांसफर हो चुका है और निर्माण कार्य जारी हैं। अस्पताल में पानी की कमी न हो इसलिए परिसर में 3 लाख लीटर का वाॅटर टैंक बनाया जा रहा है।- डॉ. राजिंदर सैनी, मेंटेनेंस इंचार्ज
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