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साख का सवाल बना किसानों का दिल्ली आंदोलन, इस मुद्दे पर पंजाब को घेरेंगे हरियाणा के किसान

Tue, 15 Dec 2020 05:05 AM IST
ajay kumar यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 15 Dec 2020 05:05 AM IST
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SYP Issue Raised By Haryana Yuva Kisan Sangharsh Samiti Amid Kisan Andolan
किसान आंदोलन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा और दिल्ली की सीमा पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ जमे किसानों की घेराबंदी तेज हो गई है। कानूनों के हिमायती किसानों ने भी अब दिल्ली में डेरा डाल दिया है। वे रोजाना केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर इन्हें रद्द न करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। कानूनों के समर्थन में भी एक बड़े धड़े के खड़ा होने से आंदोलनरत किसानों पर दबाव बढ़ रहा है। 

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अब आंदोलन उनके लिए साख का सवाल बन गया है। किसान संगठनों ने आंदोलन की सफलता के लिए गोपनीय बैठकें कर गहन विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। संगठनों के प्रमुख नेताओं ने भी आपसी संवाद बढ़ा दिया है। अब चर्चा का मुख्य केंद्र यही है कि आंदोलन को सफलतापूर्वक अंजाम तक कैसे पहुंचाया जाए।
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चूंकि, आंदोलन के लंबा खिंचने से इसे देश विरोधी ताकतों व राजनीतिक छाप से बचाना भी किसान संगठनों के सामने बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। भाकियू हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम चढूनी, नेता कर्म सिंह मथाना, प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस का कहना है कि आंदोलन को टुकड़े-टुकड़े करने की कोई साजिश सफल नहीं होगी। किसान ने आंदोलन अपनी जमीन बचाने के लिए छेड़ा है। इसे सिरे चढ़ाए बिना किसान अब घर नहीं लौटेगा। उन्होंने आंदोलन में शामिल सभी किसानों, नौजवानों से किसी के बहकावे में न आने व शांति बनाए रखने की अपील की है।

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एसवाईएल का मुद्दा उठाकर पंजाब को घेरने की रणनीति

हरियाणा में बड़ी संख्या में किसान रोजाना नए कानूनों के समर्थन में आ रहे हैं। सोमवार को हरियाणा युवा किसान संघर्ष समिति दिल्ली पहुंची और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी। समिति अध्यक्ष व अटेली विधानसभा से पूर्व विधायक नरेश यादव ने तोमर के समक्ष एसवाईएल (सतलुज-यमुना लिंक नहर) के निर्माण व पंजाब से पानी दिलाने का मुद्दा उठाया।

इसे पंजाब सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। चूंकि, किसान आंदोलन के मुख्य अगुवा पंजाब के किसान ही हैं। यादव ने तोमर से मांग की है कि एसवाईएल का निर्माण केंद्र सरकार करवाए और हरियाणा को उसके हिस्से का पानी दिलाएं। पानी न मिलने से दक्षिण हरियाणा के साथ भेदभाव हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट नहर निर्माण को लेकर पहले ही निर्देश जारी कर चुका है।

किसान आंदोलन राजनीतिक साजिश का हिस्सा बनता दिख रहा : समिति
युवा किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष नरेश यादव व सदस्य कैलाश पहलवान, दिनेश, जगमोहन यादव, सुरेश, सुखा लाल, ओमप्रकाश व जयंत यादव ने कहा कि वर्तमान किसान आंदोलन राजनीतिक साजिश का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। यह एसवाईएल के मुद्दे को गौण करने का राजनीतिक षड्यंत्र है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर पंजाब ने पानी न दिया तो समिति दक्षिण हरियाणा के किसानों को साथ लेकर आंदोलन करने पर मजबूर होगी।

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