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3 माह बाद इनेलो करेगा पंजाब में SYL की खुदाई, सरकार को 23 फरवरी तक का अल्टीमेटम
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 15 Nov 2016 01:13 AM IST
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सतलुज यमुना लिंक नहर
- फोटो : फाइल फोटो
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एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू कराने के लिए इनेलो ने अपनी रणनीति का खुलासा कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला और इनेलो प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि केंद्र व हरियाणा सरकार को निर्णय लागू कराने के लिए पार्टी 23 फरवरी तक का समय देती है। इस अवधि में नहर का निर्णय कार्य शुरू न होने पर 23 फरवरी को इनेलो नेता व पार्टी कार्यकर्ता हरियाणा के साथ लगती पंजाब की सीमा में खुदाई शुरू कर देंगे। कांग्रेस-भाजपा से भी उनका आग्रह है कि राजनीति से परे नहर की खुदाई में उनका साथ दें।
चौटाला व अरोड़ा सोमवार को यहां जाट भवन में राज्य स्तरीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जल्दी इनेलो का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट की राय पर मुहर लगाने व नहर का निर्माण शुरू करने के आदेश देने का आग्रह करेंगे। राष्ट्रपति को समय देने के लिए पत्र लिख दिया है। हरियाणा सरकार को भी अल्टीमेटम का पत्र भेजा जाएगा। एसवाईएल को लेकर चौटाला ने कांग्रेस व भाजपा की नीयत पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि दोनों दलों का राष्ट्रीय नेतृत्व अपना स्टैंड साफ करें, चूंकि उनकी पार्टियों के नेता पंजाब में कुछ तो हरियाणा में कुछ बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर पंजाब सरकार हरियाणा के हिस्से का पानी देने में बाधा डालती है तो राष्ट्रपति शासन लगाकर केंद्र सरकार को निर्णय लागू कराना चाहिए। हरियाणा के सैकड़ों किसानों की जमीनें बंजर पड़ी हैं।
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चौटाला व अरोड़ा सोमवार को यहां जाट भवन में राज्य स्तरीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जल्दी इनेलो का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट की राय पर मुहर लगाने व नहर का निर्माण शुरू करने के आदेश देने का आग्रह करेंगे। राष्ट्रपति को समय देने के लिए पत्र लिख दिया है। हरियाणा सरकार को भी अल्टीमेटम का पत्र भेजा जाएगा। एसवाईएल को लेकर चौटाला ने कांग्रेस व भाजपा की नीयत पर सवाल उठाया।
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उन्होंने कहा कि दोनों दलों का राष्ट्रीय नेतृत्व अपना स्टैंड साफ करें, चूंकि उनकी पार्टियों के नेता पंजाब में कुछ तो हरियाणा में कुछ बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर पंजाब सरकार हरियाणा के हिस्से का पानी देने में बाधा डालती है तो राष्ट्रपति शासन लगाकर केंद्र सरकार को निर्णय लागू कराना चाहिए। हरियाणा के सैकड़ों किसानों की जमीनें बंजर पड़ी हैं।
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