{"_id":"d05cb94c93be97130d47c8d8f48352d9","slug":"syl-issue-in-punjab-haryana","type":"story","status":"publish","title_hn":"सतलुज-यमुना लिंक पर 10 साल से हो रही राजनीति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सतलुज-यमुना लिंक पर 10 साल से हो रही राजनीति
डॉ. सुरेंद्र धीमान/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 21 Feb 2014 02:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पिछले दस साल से सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर बनवाने के लिए जमकर राजनीति हो रही है।
हर साल प्रदेश के राज्यपाल विधानसभा सत्र के दौरान अपने अभिभाषण में एसवाईएल नहर बनवाने के लिए अपनी सरकार को प्रतिबद्ध बताते हैं। इस बार 21 फरवरी से शुरू हो रहे सत्र में हरियाणा सरकार फिर एसवाईएल नहर बनवाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगी।
एसवाईएल नहर के जरिए हरियाणा को अपने हिस्से का 3.83 मिलियन एकड़ फुट पानी मिलना है। सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में फैसला दिया था कि एक साल के भीतर पंजाब सरकार इस नहर का निर्माण कराए।
अगर, पंजाब सरकार नहर नहीं बनाती तो केंद्र अपने खर्च पर यह नहर बनाए। जब सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आया था, तब हरियाणा में इनेलो-भाजपा सरकार थी। ओमप्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री थे।
विज्ञापन
इनेलो ने प्रदेश में लड्डू बांटकर फैसले पर खुशी जताई थी। अगले साल 2005 में चौटाला सरकार सत्ता में नहीं लौटी और कांग्रेस सरकार बन गई।
तब से एसवाईएल नहर बनवाने के लिए प्रदेश सरकार वादा करती है और विधानसभा के भीतर इनेलो विधायक आरोप लगाते हैं कि सरकार यह नहर नहीं बनवा रही। हर बार इस मसले पर हंगामा होता है और हर साल सरकार राज्यपाल के अभिभाषण में यह नहर बनवाने का वादा करती है।
कैप्टन अमरिंदर सरकार ने रद्द कर दिए थे जल समझौते
पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर सारे पुराने जल समझौते रदद् कर दिए थे। उसके बाद से एसवाईएल नहर का मामला लटक गया।
हरियाणा सरकार ने राष्ट्रपति के पास मामला भेज दिया। राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से राय मांग ली। अब तक सुप्रीम कोर्ट की राय राष्ट्रपति को नहीं मिली है।
हम नहर बनवाकर रहेंगे : सुरजेवाला
संसदीय कार्य मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने राज्यपाल के अभिभाषण में हर साल एसवाईएल नहर बनवाने की प्रतिबद्धता दोहराने के सवाल पर कहा कि कांग्रेस सरकार हर हालत में इस नहर को बनवाकर रहेगी। हरियाणा अपने हिस्से का 3.83 एमएएफ पानी लेने के लिए प्रयासरत है।
जब राजीव-लौंगोवाल समझौता हुआ था, इराड़ी ट्रिब्यूनल हरियाणा में आया था, तब चौधरी देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला ने उन्हें काले झंडे दिखाकर विरोध किया था। मगर, कांग्रेस ने ही यह मनवाया कि हरियाणा रिपेयिरन राज्य है और उसका पानी पर हक है।
हरियाणा सरकार ने ही यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से आग्रह किया था। तब जल समझौता रद्द करने के मामले पर राष्ट्रपति संदर्भ भिजवाया गया। राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से राय मांग रखी है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह राय जल्द मिल जाएगी और नहर बन जाएगी।
विज्ञापन
हर साल प्रदेश के राज्यपाल विधानसभा सत्र के दौरान अपने अभिभाषण में एसवाईएल नहर बनवाने के लिए अपनी सरकार को प्रतिबद्ध बताते हैं। इस बार 21 फरवरी से शुरू हो रहे सत्र में हरियाणा सरकार फिर एसवाईएल नहर बनवाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगी।
एसवाईएल नहर के जरिए हरियाणा को अपने हिस्से का 3.83 मिलियन एकड़ फुट पानी मिलना है। सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में फैसला दिया था कि एक साल के भीतर पंजाब सरकार इस नहर का निर्माण कराए।
विज्ञापन
अगर, पंजाब सरकार नहर नहीं बनाती तो केंद्र अपने खर्च पर यह नहर बनाए। जब सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आया था, तब हरियाणा में इनेलो-भाजपा सरकार थी। ओमप्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री थे।
विज्ञापन
इनेलो ने प्रदेश में लड्डू बांटकर फैसले पर खुशी जताई थी। अगले साल 2005 में चौटाला सरकार सत्ता में नहीं लौटी और कांग्रेस सरकार बन गई।
तब से एसवाईएल नहर बनवाने के लिए प्रदेश सरकार वादा करती है और विधानसभा के भीतर इनेलो विधायक आरोप लगाते हैं कि सरकार यह नहर नहीं बनवा रही। हर बार इस मसले पर हंगामा होता है और हर साल सरकार राज्यपाल के अभिभाषण में यह नहर बनवाने का वादा करती है।
कैप्टन अमरिंदर सरकार ने रद्द कर दिए थे जल समझौते
पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर सारे पुराने जल समझौते रदद् कर दिए थे। उसके बाद से एसवाईएल नहर का मामला लटक गया।
हरियाणा सरकार ने राष्ट्रपति के पास मामला भेज दिया। राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से राय मांग ली। अब तक सुप्रीम कोर्ट की राय राष्ट्रपति को नहीं मिली है।
हम नहर बनवाकर रहेंगे : सुरजेवाला
संसदीय कार्य मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने राज्यपाल के अभिभाषण में हर साल एसवाईएल नहर बनवाने की प्रतिबद्धता दोहराने के सवाल पर कहा कि कांग्रेस सरकार हर हालत में इस नहर को बनवाकर रहेगी। हरियाणा अपने हिस्से का 3.83 एमएएफ पानी लेने के लिए प्रयासरत है।
जब राजीव-लौंगोवाल समझौता हुआ था, इराड़ी ट्रिब्यूनल हरियाणा में आया था, तब चौधरी देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला ने उन्हें काले झंडे दिखाकर विरोध किया था। मगर, कांग्रेस ने ही यह मनवाया कि हरियाणा रिपेयिरन राज्य है और उसका पानी पर हक है।
हरियाणा सरकार ने ही यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से आग्रह किया था। तब जल समझौता रद्द करने के मामले पर राष्ट्रपति संदर्भ भिजवाया गया। राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से राय मांग रखी है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह राय जल्द मिल जाएगी और नहर बन जाएगी।