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SYL मामला: सीएम बादल ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, मिलने का समय मांगा

Fri, 11 Nov 2016 11:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 11 Nov 2016 11:00 PM IST
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SYL issue: CM Badal writes letter to president, sought the appointment
CM Badal at Barnala - फोटो : File Photo
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर समझौतों की समाप्ति के पंजाब बिल को मिली राष्ट्रपति की सहमति पर उनका ध्यान खींचा किया है। शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन को भेजे गए पत्र में सीएम बादल ने समझौतों की समाप्ति के पंजाब बिल पर सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले का जिक्र करते हुए कहा है कि हम अदालत का सम्मान करते करते हैं, लेकिन भारत के संविधान का भी सम्मान करते हैं। मुख्यमंत्री ने पत्र में आगे लिखा है कि वे अपने मंत्रियों के साथ राष्ट्रपति से व्यक्तिगत तौर पर मिलना चाहते हैं।
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मुख्यमंत्री बादल ने पत्र में लिखा है कि मैं देश की आजादी के बाद से पंजाब को लोगों के लिए सबसे संवेदनशील और नाजुक मुद्दे पर ध्यान दिलाते हुए यह पत्र लिख रहा हूं। पंजाब के अपनी नदियों के पानी पर वैध और संवैधानिक अधिकार का मुद्दा आज हर पंजाबी के लिए जीवन और मौत का सवाल बन गया है और हमेशा बना रहेगा। यह न तो राजनीतिक और न ही एकमात्र मुद्दा है, लेकिन यह अत्यंत मानवीय मुद्दा है। हालांकि, कानूनी रूप से पंजाब के लोग कुछ भी ऐसा नहीं मांग रहे हैं, जो संवैधानिक तौर पर उनका नहीं है।
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केंद्र पर लगाया पंजाब से भेदभाव करने का आरोप

SYL issue: CM Badal writes letter to president, sought the appointment
पंजाब विधानसभा की ओर से पास किए गए दि पंजाब टर्मिनेशन आफ रीवर वाटर एग्रीमेंट एक्ट 2004 पर आपकी सहमति की प्रतीक्षा की जा रही थी। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने एक सलाह दी है, जिसने पंजाब के लोगों के मन में गंभीर शंका पैदा कर दी है। हम अदालत का सम्मान करते हैं लेकिन हम भारत के संविधान का भी सम्मान करते हैं।

भारत का संविधान साफ तौर पर भारत सरकार को राज्यों के बीच नदियों के पानी के बंटवारे पर निर्णय लेने के अधिकार पर मनमानी करने से भी रोकता है। लेकिन भारत सरकार की ओर से संविधान की धाराओं का उल्लंघन कर पंजाब के साथ घोर अन्याय किया जा रहा है।

पंजाब कैबिनेट ने वीरवार को फैसला किया था कि राष्ट्रपति से इस बात का आग्रह किया जाएगा कि पंजाब विधानसभा की ओर से वर्ष 2004 में पारित किए समझौतों की समाप्ति के बिल पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू न किया जाए।
 
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