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केंद्र के दखल के बाद भी SYL पर पंजाब- हरियाणा में नहीं बनी बात, यहां फंसा पेंच

Fri, 21 Apr 2017 09:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 21 Apr 2017 09:39 AM IST
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syl canal dispute continues in punjab and haryana
SYL पर बैठक - फोटो : file photo
हरियाणा और पंजाब के बीच विवाद की बड़ी वजह बनी सतलुज-यमुना लिंक नहर पर बात नहीं बन पाई है। हरियाणा और पंजाब के बीच विवाद की बड़ी वजह बनी सतलुज-यमुना लिंक नहर पर  बृहस्पतिवार को दोनों प्रदेशों के आला अधिकारियों की बैठक हुई, लेकिन कोई राय नहीं बन पाई। पंजाब सरकार ने केंद्र के समक्ष स्पष्ट किया है कि सूबे में पानी की स्थिति बेहद गंभीर है। वह किसी भी स्थिति में नदियों का पानी पड़ोसी राज्यों के साथ बांटने की स्थिति में नहीं है।
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साथ ही केंद्र सरकार से अपील की है कि वह एसवाईएल मामले में दखल दे ताकि पंजाब को इकोलॉजिकल डिजास्टर से बचाया जा सके। एसवाईएल के मुद्दे पर केंद्र सरकार द्वारा पंजाब और हरियाणा के बीच मध्यस्थता के एलान के बाद पंजाब के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा रिजुविनेशन मंत्रालय के सचिव डॉ. अमरजीत सिंह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव करन अवतार सिंह व प्रमुख सचिव सिंचाई केबीएस सिद्धू शामिल थे। दल ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसवाईएल मामले में पंजाब का पक्ष रखा।
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गौरतलब है कि केस की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को है। पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र ने 20 अप्रैल को होने वाली दोनों पक्षों की मीटिंगके कारण सुनवाई आगे बढ़ाने की अपील की थी।
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पंजाब की दलील

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कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : file photo
वहीं, पंजाब सरकार ने दलील दी थी कि सूबे में नई सरकार बनी है, इसलिए सुनवाई आगे बढ़ाई जाए। ताकि वे तैयारी कर सकें। करीब एक घंटे चली मीटिंग के दौरान पंजाब सरकार ने सुझाव दिया कि केंद्र मानसून के समय पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोकने के लिए कदम उठाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि हर एक बूंद का प्रयोग पंजाब में हो। 
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब के पास अतिरिक्त पानी नहीं है।

सूबे को अपनी धरती पर बहने वाली सभी नदियों के एक-एक बूंद पानी की जरूरत है। उन्होंने अपील की कि राज्य में पानी की स्थिति को देखते हुए केंद्र कोई व्यवहारिक हल निकाले। पंजाब के अधिकारियों ने कहा कि सूबे में सिर्फ 28 प्रतिशत सिंचाई नहरों से होती है, बाकी किसान ट्यूबवेल पर निर्भर हैं। पंजाब को तुरंत नहरी सिस्टम में विस्तार की जरूरत है। डॉ. अमरजीत ने जल संरक्षण के लिए कदम उठाने का सुझाव दिया।

इस पर पंजाब के अधिकारियों ने कहा कि सभी कदम उठाए जा चुके हैं, पर स्थिति बहुत खराब है। राज्य हर साल 12 एमएएफ भूजल खो रहा है। पंजाब के 138 में से सौ ब्लॉक पानी के अति दोहन की वजह से डार्क जोन करार दिए जा चुके हैं। उनमें से 45 को क्रिटिकल करार दिया गया है। एसवाईएल बनने से सूबे की दस लाख एकड़ जमीन बंजर हो जाएगी।

पंजाब की दलील
मानसून के समय पाक जाने वाले पानी को रोकने को कदम उठाए केंद्र
पानी की स्थिति देखते हुए केंद्र निकाले व्यवहारिक हल
सिर्फ 28 प्रतिशत सिंचाई नहरों से, बाकी ट्यूबवेलों पर निर्भर
हर साल 12 एमएएफ भूजल खो रहा है पंजाब
138 में से 100 ब्लॉक डार्क जोन, उनमें से 45 क्रिटिकल
एसवाईएल बनी तो बंजर बन जाएगी दस लाख एकड़ जमीन

एसवाईएल पर कोर्ट से बाहर बातचीत नहीं : खट्टर

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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एसवाईएल को लेकर अपना स्टैंड साफ कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कोर्ट के बाहर बातचीत का कोई सवाल ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के नहर निर्माण को लेकर दिए गए फैसले को लागू कराया जाएगा।  पीएम नरेंद्र मोदी के संदेश के बाद ही हरियाणा के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को ज्ञापन सौंपा था।

एसवाईएल हरियाणा की जीवनरेखा है। अब इसमें बीच का रास्ता निकालने की कोई गुंजाइश नहीं है। पीएम के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी के दौरान भुवनेश्वर में भी उनकी बातचीत हुई है। उन्होंने एसवाईएल को लेकर सभी पहलुओं से पीएम को अवगत कराया है। 

 
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