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पंजाब सरकार के SYL बिल को सुप्रीम कोर्ट ले जाएगा हरियाणा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 19 Mar 2016 02:24 PM IST
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मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने पंजाब विधानसभा की ओर से पारित प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उल्लंघना बताते हुए उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इसे गंभीरता से लेगा। मुख्यमंत्री खट्टर हरियाणा विधानसभा में जब राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव रखने वाले थे, तभी नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने विधानसभा स्पीकर से आग्रह किया कि एसवाईएल मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्टे लगा दिए जाने के अगले ही दिन पंजाब विधानसभा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी नकार दिया है और एक प्रस्ताव पारित कर किसी भी आदेश का पालन नहीं करने का एलान किया है।
इसके लिए हरियाणा विधानसभा को भी पंजाब सरकार के फैसले के खिलाफ सदन में एक निंदा प्रस्ताव लाना चाहिए, जिसे सर्वसम्मति से पास किया जाए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एसवाईएल नहर पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पंजाब विधानसभा द्वारा पारित किए गए इस प्रस्ताव के साथ सुप्रीम कोर्ट में अपना दृष्टिकोण पेश करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि पंजाब विधानसभा के प्रस्ताव में सुप्रीम कोर्ट के नाम का सीधा उल्लेख नहीं किया गया है, इसलिए निंदा प्रस्ताव न लाते हुए हम इस प्रस्ताव का इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट में करेंगे और सुप्रीम कोर्ट से पंजाब सरकार के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह करेंगे। मुख्यमंत्री ने सदन में पंजाब विधानसभा की ओर से सर्वसम्मति से पास किए प्रस्ताव की पंक्तियों का भी उल्लेख किया कि, ‘‘वे किसी भी कीमत पर सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर का निर्माण नहीं करने देंगे। प्रस्ताव में यह भी कहा है कि न तो कभी एसवाईएल नहर के निर्माण की आवश्यकता थी और न ही आज है।’’
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चुनावी फायदे के लिए विषय छेड़ा है पंजाब ने
शुक्रवार को सत्र के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें लगता है कि इस मौके पर आकर पंजाब ने जो विषय छेड़ा है, वह चुनावी लाभ के लिए ऐसा कर रहे हैं। बहरहाल, यह मामला हरियाणा से संबंधित है, पंजाब से नहीं, क्योंकि राष्ट्रपति संदर्भ कई वर्षों से रुका हुआ था और हरियाणा सरकार ने इसकी शीघ्र सुनवाई करने की प्रार्थना की थी।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से हरियाणा के इस अनुरोध को स्वीकार किए जाने के बाद पंजाब की बौखलाहट सामने आई है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट और पंजाब सरकार के बीच है। इसमें हरियाणा की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को उठाया है, जिस पर पंजाब ने शुक्त्रस्वार को अपना प्रस्ताव पास किया है। सुप्रीम कोर्ट इस पर संज्ञान लेगा।
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इसके लिए हरियाणा विधानसभा को भी पंजाब सरकार के फैसले के खिलाफ सदन में एक निंदा प्रस्ताव लाना चाहिए, जिसे सर्वसम्मति से पास किया जाए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एसवाईएल नहर पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पंजाब विधानसभा द्वारा पारित किए गए इस प्रस्ताव के साथ सुप्रीम कोर्ट में अपना दृष्टिकोण पेश करेगी।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि पंजाब विधानसभा के प्रस्ताव में सुप्रीम कोर्ट के नाम का सीधा उल्लेख नहीं किया गया है, इसलिए निंदा प्रस्ताव न लाते हुए हम इस प्रस्ताव का इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट में करेंगे और सुप्रीम कोर्ट से पंजाब सरकार के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह करेंगे। मुख्यमंत्री ने सदन में पंजाब विधानसभा की ओर से सर्वसम्मति से पास किए प्रस्ताव की पंक्तियों का भी उल्लेख किया कि, ‘‘वे किसी भी कीमत पर सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर का निर्माण नहीं करने देंगे। प्रस्ताव में यह भी कहा है कि न तो कभी एसवाईएल नहर के निर्माण की आवश्यकता थी और न ही आज है।’’
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चुनावी फायदे के लिए विषय छेड़ा है पंजाब ने
शुक्रवार को सत्र के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें लगता है कि इस मौके पर आकर पंजाब ने जो विषय छेड़ा है, वह चुनावी लाभ के लिए ऐसा कर रहे हैं। बहरहाल, यह मामला हरियाणा से संबंधित है, पंजाब से नहीं, क्योंकि राष्ट्रपति संदर्भ कई वर्षों से रुका हुआ था और हरियाणा सरकार ने इसकी शीघ्र सुनवाई करने की प्रार्थना की थी।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से हरियाणा के इस अनुरोध को स्वीकार किए जाने के बाद पंजाब की बौखलाहट सामने आई है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट और पंजाब सरकार के बीच है। इसमें हरियाणा की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को उठाया है, जिस पर पंजाब ने शुक्त्रस्वार को अपना प्रस्ताव पास किया है। सुप्रीम कोर्ट इस पर संज्ञान लेगा।