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स्वच्छ सर्वेक्षण 2019: सबसे साफ शहरों की लिस्ट में चंडीगढ़ को मिली 20वीं रैंक, तीसरे नंबर पर था

Wed, 06 Mar 2019 02:54 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 06 Mar 2019 02:54 PM IST
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Swachh Survekshan 2019, Chandigarh on 20th Number in Cleanest City List
सांकेतिक तस्वीर

चंडीगढ़ स्वच्छता सर्वेक्षण में काफी पिछड़ गया है। पिछले वर्ष शहर को पूरे देश में तीसरा स्थान मिला था। लेकिन एक वर्ष में ही 17 स्थान फिसलकर 20 वें स्थान पर पहुंच गया। शहर की रैंकिंग चार वर्ष पूर्व 2015 में सबसे कम थी। तब चंडीगढ़ 21 वें स्थान पर रहा था। चंडीगढ़ में घरों से गीले और सूखे कूड़े को अलग करने की योजना सिरे नहीं चढ़ सकी और उसके विरोध में कचरा इकट्ठा करने वाले हड़ताल पर चले गए थे।

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 इस साल रैंकिंग में पिछड़ने की सबसे बड़ी वजह यही मानी जा रही है। मेयर राजेश कालिया ने रैंकिंग में पिछड़ने की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि नगर निगम की आर्थिक स्थिति ठीक न होना भी स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ने का कारण है। देशभर में चले स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान के नतीजे बुधवार को दिल्ली में घोषित किए गए। 
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अवार्ड कार्यक्रम में नगर निगम कमिश्नर केके यादव और मेयर राजेश कालिया भी मौजूद थे। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से 2019 में देश के 4237 शहरों में स्वच्छता सर्वेक्षण किया गया। 31 जनवरी 2019 को सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूरी हुई थी। इस प्रक्रिया में देशभर से 64 लाख लोगों के फीडबैक लिए गए थे और सोशल मीडिया के जरिए चार करोड़ लोगों को जोड़ा गया था। ओवरआल रैकिंग में पिछले सर्वेक्षण की तरह इस बार भी इंदौर को सबसे साफ सुथरे शहर का दर्जा दिया गया। इंदौर नंबर-1, अंबिकापुर नंबर-2 और मैसूर नंबर-3 पर रहा है।

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पिछले साल रैंकिंग में आया था सुधार

पिछले साल चंडीगढ़ को सर्वेक्षण में तीसरा स्थान हासिल हुआ था। जबकि 2017 में चंडीगढ़ रैंकिंग में 11 वें स्थान पर था। उस समय नगर निगम की जमकर किरकिरी हुई थी। रैंकिंग सुधरने में नगर निगम के साथ-साथ शहरवासियों ने पिछले साल अहम योगदान दिया था, क्योंकि 2017 में नगर निगम फीडबैक की कैटेगरी में पिछड़ गया था। लेकिन पिछले साल नगर निगम ने शहरवासियों को जोड़ते हुए फीडबैक बढ़ाया था और ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्वच्छता एप डाउनलोड करवाया था।

राजनीति की भेंट चढ़ी योजना
स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 में अव्वल आने के लिए चंडीगढ़ नगर निगम को जो तैयारी करनी थी, वह नगर निगम के पार्षदों की राजनीति की भेंट चढ़ गई। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी और डोर-टु-डोर गारबेज कलेक्शन के लिए जो डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट थी, वह अब तक नगर निगम सदन की बैठक में पेश नहीं हो पाई है। 

जब तक यह पास नहीं होगी, तब तक सूखे और गीले कचरे का शहर से सेग्रीगेशन शुरू नहीं होगा। पिछले साल सर्वेक्षण में चंडीगढ़ को जब तीसरा स्थान मिला था तब नगर निगम ने 2019 में चंडीगढ़ को नंबर-1 आने का दावा किया था। पिछले साल हुए सर्वेक्षण में जो भी टॉप-10 पर शहर रहे थे, उन सब में सेग्रीगेशन का काम चल रहा है।

इस तरह तय होती है रेटिंग

अगर सूखा और गीला कचरा 25 प्रतिशत अलग-अलग इकट्ठा हो रहा है तो वन स्टार, 50 प्रतिशत एकत्र होने पर टू स्टार, 80 प्रतिशत होने पर 3 स्टार और शत प्रतिशत पर 5 स्टार रेटिंग मिलती है। अगर रेजिडेंशियल, पब्लिक एरिया और बाजारों की सफाई प्रतिदिन एक बार होगी तो एक से चार स्टार तक की रेटिंग मिलेगी।

5 स्टार रेटिंग के लिए इन इलाकों में सुबह और रात में दो बार सफाई होनी चाहिए। वर्तमान में शहर में इस समय सफाई केवल एक बार ही हो रही है। इस तरह के कुल 21 मापदंड हैं, जिनमें प्रथम आने पर चंडीगढ़ को 5 स्टार रेटिंग मिलती।

जिम्मेदारी लेता हूं: मेयर
मेयर होने के नाते स्वच्छ सर्वेक्षण में तीसरा स्थान से 20 वां स्थान आने की जिम्मेदारी नैतिकता के आधार पर लेता हूं। अपने अधिकारियों और पार्षदों के साथ बैठक कर समीक्षा करूंगा कि किस कारण से हम पिछड़ गए।

शहर की जनता को भी इसमें भागीदार बनाएंगे ताकि पहले नंबर पर आएं। आर्थिक मोर्चें पर भी पिछड़ गए। पैसे के अभाव में कई काम नहीं हो सके। तीन से पांच करोड़ रुपये रुपये सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए आने थे जो नहीं आए। -राजेश कुमार कालिया, मेयर नगर निगम चंडीगढ़।

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