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कोचिंग सेंटरों पर केंद्रीय टीम का औचक निरीक्षण, चौंकाने वाला खुलासा

Sat, 07 May 2016 01:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 07 May 2016 01:55 AM IST
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surprise inspections of Coaching Centers by CCPCR and NCPCR team
जांच - फोटो : demo pics

कोचिंग सेंटरों पर NCPCR और CCPCR की टीम ने किया औचक निरीक्षण। इस जांच में खुले कई राज। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) के सदस्यों ने संयुक्त रूप से शहर के पांच नामी कोचिंग सेंटरों में औचक निरीक्षण किया। यहां एक-एक क्लास में सौ से डेढ़ सौ स्टूडेंट्स को देखकर उन्होंने संचालकों से कोचिंग की क्वालिटी जानी। साथ ही टीम स्टूडेंट्स से रूबरू हुई।

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टीम के सदस्यों के अनुसार चंडीगढ़ के कोचिंग संस्थानों का इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर नहीं है। यहां एक-एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में 2500 से 3000 स्टूडेंट हैं। लेकिन काउंसलर केवल एक या दो। कहीं-कहीं तो एक हजार बच्चों को गाइड करने के लिए एक-एक काउंसलर है। हालांकि टीम ने इस बात पर संतोष जताया कि यहां सिलेक्शन के दबाव में किसी स्टूडेंट ने कभी सुसाइड नहीं किया। 
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शुक्रवार को एनसीपीसीआर के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने एससीपीसीआर यूटी, पंजाब और हरियाणा के सदस्यों के साथ शहर के कोचिंग सेंटरों में निरीक्षण किया। मलोया स्थित स्नेहालय में पत्रकारों से वार्ता में आयोग के सदस्य प्रियंक ने बताया कि कोटा में पिछले 3 वर्षों में कोचिंग इंस्टीट्यूट के 42 स्टूडेंट्स सुसाइड कर चुके हैं। ऐसा पढ़ाई और आईआईटी या मेडिकल कॉलेज में दाखिले के दबाव के कारण हुआ है। नाबालिगों में 10वीं के बाद से प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन का दबाव रहता है।
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इस कारण उनका बचपन कहीं खो सा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने देशभर के कोचिंग संस्थानों में चेकिंग अभियान शुरू किया है। इसी के मद्देनजर वह कोटा के बाद चंडीगढ़ आए हैं। इसके बाद देश के अन्य शहरों में जाएंगे। प्रियंक के अनुसार चंडीगढ़ में उन्होंने ऐलन इंस्टीट्यूट, बंसल, डॉ. खेड़ा, आकाश व एक अन्य कोचिंग संस्थान में निरीक्षण किया। पत्रकार वार्ता और निरीक्षण में एससीपीसीआर की चेयरपर्सन प्रो. देवी सिरोही, एससीपीसीआर पंजाब के सदस्य परमजीत सिंह बडोला, एससीपीसीआर हरियाणा के सदस्य डॉ. यशपाल खन्ना सहित अन्य मौजूद रहे।

बच्चों पर है दबाव संयुक्त टीम ने विजिट में पाया कि स्टूडेंट्स पर कम उम्र में पढ़ाई का बहुत अधिक दबाव है। 10वीं के बाद से ही बच्चों पर आईआईटी और मेडिकल परीक्षाओं में चयन का दबाव हो रहा है। इस कारण वह स्पोर्ट्स, मनोरंजन सामाजिक जिंदगी से बहुत दूर हो रहे हैं। एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में विजिट के दौरान स्टूडेंट्स से वार्ता में बच्चों ने उनसे कहा कि वह एक दिन में 15 से 18 घंटे पढ़ाई करते हैं। इस कारण वह इंटरनेट, सोशल लाइफ सबसे दूर हो गए हैं। उनके लिए बस उनका सिलेक्शन ही अहम है। इसके अलावा उन्हें देश-दुनिया में क्या हो रहा है इससे कोई मतलब नहीं रह जाता।

बैच शफल का भी है असर टीम के सदस्यों के अनुसार उन्होंने पाया कि कोचिंग संस्थानों में बैच शफल के कारण भी बच्चों में काफी दबाव रहता है। संस्थानों ने ऐसा सिस्टम बनाया हुआ है कि जो बच्चे पढ़ाई में सबसे आगे हैं उनका अलग बैच बनाया हुआ है और जो कमजोर हैं उनका अलग। इससे बच्चों में उनके प्रति अलग रवैया देखने को मिलता है।

क्विज या जरनल नॉलेज बेस्ड प्रतियोगिताएं रोकी जाएंगी आयोग के अनुसार देशभर में होने वाली क्विज, ओलंपियाड या अन्य जरनल नॉलेज बेस्ड प्रतियोगिताओं से स्कॉलर स्टूडेंट्स का रिकार्ड चोरी किया जा रहा है। ऐसी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने वाले स्टूडेंट्स का डाटा बनाकर कोचिंग इंस्टीट्यूट उन्हें अपने संस्थानों के लिए आकर्षित करते हैं। आयोग के सदस्य के अनुसार यह जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का उल्लंघन है। इसलिए वह प्रयास करेंगे ऐसी प्रतियोगिताएं बंद की जाएं।

देशभर के कोचिंग संस्थानों में करेंगे विजिट आयोग के सदस्य प्रियंक के अनुसार वह देशभर के कोचिंग संस्थानों में विजिट करेंगे। इसके बाद वह एक रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को सौंपेंगे। आयोग की सिफारिशों को केंद्र सरकार नई बनने वाली एजुकेशन पॉलिसी के शामिल करेगी। 


हॉस्टलों में किया विजिट टीम ने कोचिंग संस्थानों की ओर से उपलब्ध कराए गए पीजीनुमा हॉस्टलों का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने स्टूडेंट्स को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं के बारे में जाना। हालांकि उन्होंने पाया कि स्टूडेंट्स को सुविधाओं के नाम पर कुछ खास नहीं दिया जा रहा है, जबकि इसकी एवज में उनसे अच्छे खासे पैसे वसूले जा रहे हैं।

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