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जज्बे को सलामः दूसरों को इस तरह दिखाई राह, 17 सालों से नहीं जलाई पराली

Thu, 18 Oct 2018 08:59 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहगढ़ साहिब (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहगढ़ साहिब (पंजाब) Updated Thu, 18 Oct 2018 08:59 AM IST
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Surjeet Singh of Fatehgarh Sahib did not burn stubble for 17 years
 किसान सुरजीत सिंह

पराली पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। पराली न जले इसको लेकर सरकार कई तरह के प्रयास कर रही है। लेकिन एक किसान के जज्ब को भी सलाम करना होगा। इस किसान ने पिछले 17 साल से पराली नहीं जलाई है। अब इनसे बाकी किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले गांव साधूगढ़ के प्रगतिशील किसान सुरजीत सिंह वर्ष 2001 से अपने खेत में पराली को नहीं जला रहे हैं।

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 किसान सुरजीत सिंह ने बताया कि भले ही इस काम के लिए उनका खेती खर्च थोड़ा बढ़ गया है, लेकिन वह वातावरण में जहर नहीं घोलना चाहते। किसान ने वर्ष 2006 में पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना से मेकेनिकल इंजीनियर डॉ. हरिंदर सिंह सिद्धू के मार्गदर्शन से अनुसार हैपी सीडर की मदद के साथ गेहूं की बिजाई करनी शुरू की थी। हालांकि जमीन पथरीली होने की वजह से  हैपी सीडर क्षतिग्रस्त हो जाता था। 

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Surjeet Singh of Fatehgarh Sahib did not burn stubble for 17 years
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हैपी सीडर की कमानियों को मजबूत किया और सख्त जमीन में काम लेना शुरू कर दिया। जहां पहले हैपी सीडर से एक दिन में एक एकड़ में गेहूं की बिजाई होती थी, वहीं इस तकनीक से एक दिन में 6-8 एकड़ में पराली को जमीन में जोतकर गेहूं की बिजाई की जा रही है। सुरजीत धान की एसएमएस वाली कंबाइन से कटाई करते हैं और उसी वक्त हैपी सीडर से गेहूं की बिजाई कर देते हैं। इससे गेहूं की बुआई 20 पहले हो जाती है और इसका फायदा यह हुआ कि प्रति एकड़ ढाई क्विंटल पैदावर बढ़ गई।

 किसान सुरजीत सिंह 45 एकड़ में खेती कर रहे हैं, जिसमें से 42 एकड़ जमीन अपनी है और 3 एकड़ पंचायती जमीन ठेके पर ली है। यह किसान अपने खेत में प्रति एकड़ 56 किलो यूरिया और 50 किलो डीएपी का प्रयोग करते हैं। पानी की बचत के लिए इन्होंने 2006 से ही फव्वारा सिस्टम (रेन गन) के साथ फसलों की सिंचाई शुरू की, जो उसने भूमि रक्षा विभाग से 75 प्रतिशत सब्सिडी लेकर लगाया था। रेन गन के साथ सिंचाई करने से जमीनी पानी की बड़े स्तर पर बचत हो रही है और ज्यादा पानी आने से फसलों का नुकसान भी नहीं होता।

अगले साल से शुरू करेंगे जैविक खेती
सुरजीत सिंह ने बताया कि अभी उन्होंने 5 एकड़ में धान की सीधी बिजाई शुरू की है। एक एकड़ जमीन में जैविक ढंग के साथ बासमती की बुआई की है, जिसकी सफलता को देखते हुए वह अगले वर्ष से सारी जमीन में ही जैविक खेती तकनीक को अपनाएंगे।

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