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जीएमएसएच 16 में शल्य चिकित्सा पूर्ण रूप से शुरू, नए मरीजों का हो रहा पंजीकरण
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चंडीगढ़। जीएमएसएच- 16 में शल्य चिकित्सा सेवा पूर्णतया बहाल कर दी गई है। अस्पताल में मौजूदा समय में प्रतिदिन 12 से 15 मरीजों की शल्य चिकित्सा की जा रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार शल्य चिकित्सा की संख्या धीरे धीरे और बढ़ाई जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को राहत मिल सके। गौरतलब है कि कोविड-19 के कारण 9 महीने बाद अस्पताल में शल्य चिकित्सा सेवा बहाल की गई है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके नागपाल ने बताया कि शुरुआती दौर में पुराने पंजीकृत मरीजों को प्रमुखता देने की योजना बनाई गई थी, लेकिन फॉलोअप के लिए पुराने मरीजों के न आने पर शल्य चिकित्सा के लिए नए मरीजों का पंजीकरण शुरू कर दिया गया है।
एक दिन में हो रही 12 से 15 शल्य चिकित्सा
अस्पताल में 1 दिन में 12 से 15 मरीजों की शल्य चिकित्सा की जा रही है। शनिवार को हड्डी रोग से संबंधित 7 और सामान्य सर्जरी के 5 मरीजों की शल्य चिकित्सा की गई । सामान्य दिनों में यह संख्या 18 से 20 होती है।
मोतियाबिंद के मरीजों को भी जल्द मिलेगा इलाज
मौजूदा समय में मोतियाबिंद के मरीजों की शल्य चिकित्सा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। डॉ. नागपाल ने बताया कि मोतियाबिंद की शल्य चिकित्सा में डॉक्टर को मरीज के चेहरे के पास आकर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। इसलिए संक्रमण के खतरे को देखते हुए उसे शीघ्र शुरू नहीं किया जाता रहा, लेकिन उन मरीजों को जल्दी इलाज मुहैया कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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पुराने पंजीकृत मरीज नहीं आ रहे
डॉ. नागपाल ने बताया कि शुरुआती दौर में यह योजना बनाई गई थी कि पहले पुराने पंजीकृत मरीजों की शल्य चिकित्सा की जाएगी, लेकिन उनमें से काफी मरीज नहीं आ रहे हैं। इसलिए अब नए मरीजों शल्य चिकित्सा की तिथि दी जानी शुरू कर दी गई है। कोरोना से बचाव के मानकों का पालन करते हुए धीरे धीरे शल्य चिकित्सा की संख्या और बढ़ाई जाएगी।
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एक दिन में हो रही 12 से 15 शल्य चिकित्सा
अस्पताल में 1 दिन में 12 से 15 मरीजों की शल्य चिकित्सा की जा रही है। शनिवार को हड्डी रोग से संबंधित 7 और सामान्य सर्जरी के 5 मरीजों की शल्य चिकित्सा की गई । सामान्य दिनों में यह संख्या 18 से 20 होती है।
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मोतियाबिंद के मरीजों को भी जल्द मिलेगा इलाज
मौजूदा समय में मोतियाबिंद के मरीजों की शल्य चिकित्सा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। डॉ. नागपाल ने बताया कि मोतियाबिंद की शल्य चिकित्सा में डॉक्टर को मरीज के चेहरे के पास आकर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। इसलिए संक्रमण के खतरे को देखते हुए उसे शीघ्र शुरू नहीं किया जाता रहा, लेकिन उन मरीजों को जल्दी इलाज मुहैया कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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पुराने पंजीकृत मरीज नहीं आ रहे
डॉ. नागपाल ने बताया कि शुरुआती दौर में यह योजना बनाई गई थी कि पहले पुराने पंजीकृत मरीजों की शल्य चिकित्सा की जाएगी, लेकिन उनमें से काफी मरीज नहीं आ रहे हैं। इसलिए अब नए मरीजों शल्य चिकित्सा की तिथि दी जानी शुरू कर दी गई है। कोरोना से बचाव के मानकों का पालन करते हुए धीरे धीरे शल्य चिकित्सा की संख्या और बढ़ाई जाएगी।