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कोरोना संकट: चंडीगढ़ के अस्पतालों में 66 दिन से सर्जरी बंद... 8500 मरीज झेल रहे दर्द

Wed, 27 May 2020 02:14 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 27 May 2020 02:14 AM IST
सार

  • कोरोना की महामारी के चलते पीजीआई समेत सभी सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी दो महीने से बंद 
  • ओपीडी की सभी रूटीन सर्जरी भी टाली गईं, दर्द निवारक दवाओं के सहारे मरीज

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Surgery in Chandigarh's hospitals closed from 66 days
चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है लेकिन अस्पतालों में ओपीडी और सर्जरी बंद होने से हजारों मरीज दर्द से कराह रहे हैं। इन मरीजों के लिए एक-एक दिन काटना भारी पड़ रहा है फिर भी लॉकडाउन में यह मरीज इसी उम्मीद में दिन काट रहे हैं कि शायद अगले कुछ दिनों में उनकी सर्जरी हो जाए और उन्हें दर्द से छुटकारा मिले लेकिन शहर में बढ़ती कोरोना की चेन उनकी उम्मीदों पर पानी फेर रही है। 

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चंडीगढ़ में 20 मार्च से अस्पतालों की ओपीडी सेवा बंद होने के बाद से अब तक लगभग 8500 मरीजों की सर्जरी रुकी हुई है और संक्रमण के डर से ये मरीज अपना दर्द झेलकर घर में पड़े हुए हैं। दर्द निवारक दवाएं ही इन दिनों इनका सहारा हैं। लॉकडाउन के कारण अस्पतालों में रुटीन सर्जरी पूरी तरह से बंद होने के कारण अपेंडिक्स, यूट्रस, हृदय संबंधी जैसे स्टेंट, पेसमेकर लगाना, कैंसर की सर्जरी, पथरी, हड्डी संबंधी मर्ज की सर्जरी, गिल्टी, गांठ, सिस्ट, ट्यूमर, हर्निया और प्लास्टिक सर्जरी के मरीज सिर्फ व्यवस्था पटरी पर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। 
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पीजीआई में इन सर्जरी के लिए मरीज पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों से आते हैं। पीजीआई समेत जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 में पीडियाट्रिक,गाइनकोलॉजी और इमरजेंसी सेवा संचालित करने के आदेश जारी होने के बाद अब इन अस्पतालों में पीडियाट्रिक, गाइनी के साथ इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को इलाज मिल रहा है, हालांकि ओपीडी की सेवाएं पूरी तरह से ठप है।    

चंडीगढ़ के अस्पतालों में रोजाना आते हैं 20 हजार से ज्यादा मरीज 

सामान्य दिनों में पीजीआई की ओपीडी में 12 से 15 हजार मरीज प्रतिदिन आते हैं, जबकि जीएमसीएच-32 जीएमएसएच-16 को मिलाकर यह आंकड़ा 3 से 4 हजार का होता है। निजी अस्पतालों में भी प्रतिदिन दो से ढाई हजार मरीज ओपीडी में देखे जाते हैं। यानी चंडीगढ़ में 1 दिन में लगभग 20 से 22 हजार मरीजों को इलाज मिलता है। लॉकडाउन के कारण ओपीडी सेवा बंद होने से चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल के अलावा देश के अन्य शहरों से आने वाले हजारों मरीज इलाज के इंतजार में लॉकडाउन खुलने की राह देख रहे हैं। 

निजी अस्पतालों में भी बस इमरजेंसी सेवा  
लॉकडाउन के कारण सरकार के आदेश पर जब पीजीआई समेत जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 की ओपीडी सेवा बंद की गई तो मरीजों ने निजी अस्पतालों का रुख करना शुरू कर दिया। ऐसी स्थिति में संक्रमण पर काबू के लिए आईएमए ने भी शहर के सभी निजी अस्पतालों में रूटीन सर्जरी और ओपीडी सेवा बंद कर दी। शहर में लगभग 25 निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। जहां महीने भर में 2 से ढाई हजार सर्जरी होती है। दो महीने से निजी अस्पतालों में भी केवल इमरजेंसी और ट्रॉमा केस ही देखे जा रहे हैं।  
 

सामान्य दिनों में एक महीने की सर्जरी का आंकड़ा

अस्पताल            इमरजेंसी और ट्रॉमा सर्जरी     रुटीन सर्जरी  

  • पीजीआई              500 और 700                    1400  
  • जीएमसीएच-32     300                                  900  
  • जीएमएसएच-16    150                                  600  
  • निजी अस्पताल      1500                                2500  

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ओपीडी और रुटीन सर्जरी बंद की गई है लेकिन मरीजों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए लगभग सभी डिपार्टमेंट की टेली कंसल्टेंट सुविधा शुरू कर दी गई है। इमरजेंसी केस में कोरोना संक्रमण से बचाव के मानकों का पालन करते हुए तत्काल सर्जरी की जा रही है।  -डॉ. जगतराम, पीजीआई, डायरेक्ट    

 

ट्रामा इमरजेंसी के साथ ही गाइनी केस में सर्जरी पहले की ही तरह अब भी की जा रही है। जहां तक रूटीन और प्लान सर्जरी की बात है तो उसके मरीजों को दवा द्वारा आराम पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे उन्हें किसी प्रकार का दर्द न झेलना पड़े। -डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट जीएमएसएच-16


केस -1: हनुमानगढ़ (राजस्थान) निवासी 26 साल की सुनीता (बदला हुआ नाम ) को ब्रेस्ट कैंसर है। पिछले 7 महीने से पीजीआई में उनका इलाज चल रहा है। लॉकडाउन के कारण ढाई महीने से वह पीजीआई में इलाज कराने नहीं जा पा रही हैं, जबकि डॉक्टरों ने उन्हें मार्च में ही हर हाल में सर्जरी कराने की सलाह दी थी। ऐसी स्थिति में लगभग 2 महीने से ज्यादा समय निकल जाने के बाद सुनीता की परेशानी तेजी से बढ़ रही है। बीमारी में दर्द के कारण उनकी स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है। इलाज के लिए वह फरवरी से चंडीगढ़ में एक रिश्तेदार के यहां आकर रुकी हुई हैं लेकिन रूटीन सर्जरी बंद होने के कारण उन्हें लॉकडाउन खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है।   

केस-2: दिल्ली निवासी सुजीत कुमार (बदला हुआ नाम) की दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं। वह पिछले 9 महीने से डायलिसिस पर हैं। डॉक्टरों ने उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए कह दिया है। फरवरी में उन्होंने पीजीआई में इलाज शुरू कराया। उनकी माताजी उन्हें किडनी देने के लिए तैयार हैं लेकिन लॉकडाउन के कारण किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया बाधित हो गई है। ऐसी स्थिति में सुजीत को लगातार डायलिसिस कराना पड़ रहा है, जिसके साइड इफेक्ट से उनकी स्थिति गंभीर होती जा रही है। सुजीत का कहना है कि कोरोना के कारण उनका इलाज बीच में ही रुक गया है। अब एक-एक दिन काटना मुश्किल हो रहा है। 

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