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बड़ी राहतः अब होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल-26 में भी करवाएं सर्जरी, फायदा उठाएं
Tue, 09 Jul 2019 10:59 AM IST
खुशबू गोयल
मोनिका नागर, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोनिका नागर, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 09 Jul 2019 10:59 AM IST
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फाइल फोटो
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किडनी स्टोन और हर्निया की सर्जरी के लिए भी चंडीगढ़ के सरकारी हॉस्पिटल में लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसमें मरीजों का दर्द बढ़ता जाता है। यह शहर के मरीजों के लिए अच्छी खबर है कि सेक्टर 26 स्थित होम्योपैथिक मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल में सर्जरी की सुविधा शुरू हो चुकी है। सीनियर सर्जन डॉ. आरएस सचदेवा अब तक यहां 12 से ज्यादा सर्जरी कर चुके हैं। इनमें पाइल्स, फिस्टुला, गॉल ब्लेडर, हर्निया, किडनी स्टोन की सर्जरी शामिल है।
डॉ. सचदेवा जीएमएसएच सेक्टर 16 में कार्यरत थे। उन्होंने जीएमएसएच से वीआरएस लेने के बाद होम्योपैथिक कालेज ज्वाइन किया है। यहां पर सर्जरी की ओपीडी सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक चलती है। हॉस्पिटल में सर्जरी की फिलहाल कोई वेटिंग नहीं है। कॉलेज के प्रिसिंपल डॉ. संदीप पुरी ने बताया कि मार्च महीने में सर्जरी की शुरुआत की गई थी। पहला आपरेशन पित्ते की थैली का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से किया गया था, जो पूरी तरह से सफल रहा।
यहां पर अब तक 5 बड़ी सर्जरी हो चुकी है, इसके अलावा कई माइनर सर्जरी की गईं। होम्योपैथिक मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल में सर्जरी का रेट वही है, जो सरकारी हॉस्पिटल में है। हां, प्राइवेट हास्पिटल के मुकाबले काफी कम है, इसलिए मरीजों को कोई दिक्कत नहीं होती। डॉ. संदीप पुरी ने कहा कि होम्योपैथिक कालेज में आपरेशन थियेटर पहले से ही मौजूद था। इसका इस्तेमाल स्टूडेंट की पढ़ाई में किया जाता था, उन्हें वहां पर ट्रेनिंग दी जाती थी।
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कई लोग उनके यहां पर आते थे और सर्जरी की बारे में पूछते थे। उसके बाद हुई एक मीटिंग में फैसला लिया गया कि जब हास्पिटल के पास इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है तो यहां पर सर्जरी क्यों नहीं हो सकती। इसी बीच डॉ. सचदेवा ने हॉस्पिटल ज्वाइन किया और सर्जरी की शुरुआत की गई।
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डॉ. सचदेवा जीएमएसएच सेक्टर 16 में कार्यरत थे। उन्होंने जीएमएसएच से वीआरएस लेने के बाद होम्योपैथिक कालेज ज्वाइन किया है। यहां पर सर्जरी की ओपीडी सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक चलती है। हॉस्पिटल में सर्जरी की फिलहाल कोई वेटिंग नहीं है। कॉलेज के प्रिसिंपल डॉ. संदीप पुरी ने बताया कि मार्च महीने में सर्जरी की शुरुआत की गई थी। पहला आपरेशन पित्ते की थैली का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से किया गया था, जो पूरी तरह से सफल रहा।
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यहां पर अब तक 5 बड़ी सर्जरी हो चुकी है, इसके अलावा कई माइनर सर्जरी की गईं। होम्योपैथिक मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल में सर्जरी का रेट वही है, जो सरकारी हॉस्पिटल में है। हां, प्राइवेट हास्पिटल के मुकाबले काफी कम है, इसलिए मरीजों को कोई दिक्कत नहीं होती। डॉ. संदीप पुरी ने कहा कि होम्योपैथिक कालेज में आपरेशन थियेटर पहले से ही मौजूद था। इसका इस्तेमाल स्टूडेंट की पढ़ाई में किया जाता था, उन्हें वहां पर ट्रेनिंग दी जाती थी।
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कई लोग उनके यहां पर आते थे और सर्जरी की बारे में पूछते थे। उसके बाद हुई एक मीटिंग में फैसला लिया गया कि जब हास्पिटल के पास इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है तो यहां पर सर्जरी क्यों नहीं हो सकती। इसी बीच डॉ. सचदेवा ने हॉस्पिटल ज्वाइन किया और सर्जरी की शुरुआत की गई।