दोहरा संविधान मामला: सुप्रीम कोर्ट ने बादल पिता-पुत्र के खिलाफ केस की सुनवाई रोकी, जानें क्या है मामला
न्यायालय ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए शिरोमणि के दोहरे संविधान के विवाद में सुखबीर सिंह बादल, प्रकाश सिंह बादल और दलजीत सिंह चीमा के खिलाफ दर्ज जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले में पंजाब की होशियारपुर अदालत के समक्ष लंबित कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
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शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के दोहरे संविधान को लेकर सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के वयोवृद्ध नेता बलवंत सिंह खेड़ा द्वारा होशियारपुर की अदालत में दायर आपराधिक शिकायत के मामले में नया मोड़ आ गया है। अब सुप्रीम कोर्ट ने उक्त मामले की होशियारपुर अदालत में सुनवाई पर रोक लगा दी। मामले में सुखबीर सिंह बादल, प्रकाश सिंह बादल और दलजीत सिंह चीमा के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप लगाते हुए आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें उक्त सभी जमानत पर हैं।
गौरतलब है कि होशियारपुर निवासी बलवंत सिंह खेड़ा ने 2009 में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक आपराधिक शिकायत दर्ज की थी जिसमें शिअद पर दो अलग-अलग संविधान प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया था। इनमें से एक गुरुद्वारा चुनाव आयोग (जीईसी) के पास और दूसरा भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के पास राजनीतिक दल के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए जमा किया गया था।
आपराधिक शिकायत इस आरोप पर आधारित है कि पार्टी ने एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी होने का दावा किया है और ईसीआई के समक्ष दायर अपने संविधान में धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का पालन करने की घोषणा की है, जबकि वह एक धार्मिक पार्टी होने के नाते, एक धार्मिक निकाय, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के चुनाव लड़ती है।
होशियारपुर में मामले की पैरवी कर रहे बादल के वकील हरजोत कमल सिंह ने इस संबंध में बताया कि सुप्रीम कोर्ट में उनके पक्ष के वकीलों ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि धार्मिक होना धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के विपरीत नहीं है और केवल इसलिए कि एक राजनीतिक संगठन गुरुद्वारा समिति के लिए चुनाव लड़ रहा है इसका मतलब यह नहीं होता कि दल धर्मनिरपेक्ष नहीं है। इसलिए चुनाव आयोग और जीईसी के समक्ष दायर पार्टी के संविधान पर जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप पर आपराधिक मामले का कोई आधार नहीं है।
न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम की खंडपीठ ने आपराधिक मामले के खिलाफ याचिकाओं को खारिज करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट होशियारपुर के समक्ष आपराधिक शिकायत की कार्रवाई पर रोक लगा दी।
सुखबीर सिंह बादल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर एस चीमा पेश हुए। प्रकाश सिंह बादल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के वी विश्वनाथन पेश हुए जबकि दलजीत सिंह चीमा की ओर से अधिवक्ता संदीप कपूर पेश हुए। शिकायतकर्ता खेड़ा की ओर से इंदिरा उन्नीनार, एडवोकेट उपस्थित हुईं। शिकायतकर्ता बलवंत सिंह खेड़ा की ओर से पेश अधिवक्ता इंदिरा उन्नीनायर ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें संक्षिप्त दलीलें देने की अनुमति दी जाए। हालांकि, न्यायालय ने निर्देश दिया कि वह अपना जवाब दाखिल कर सकती हैं और उस पर बाद में सुनवाई होगी।
न्यायालय ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए शिरोमणि के दोहरे संविधान के विवाद में सुखबीर सिंह बादल, प्रकाश सिंह बादल और दलजीत सिंह चीमा के खिलाफ दर्ज जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले में पंजाब की होशियारपुर अदालत के समक्ष लंबित कार्रवाई पर रोक लगा दी है।