फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Supreme Court Agree from Punjab Government Decision Regarding Schedule Caste

राहतः सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार के फैसले पर लगाई मुहर, अब नौकरी कोर्ट में हो सकेगा वर्गीकरण

Fri, 28 Aug 2020 10:22 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 28 Aug 2020 10:22 AM IST
विज्ञापन
Supreme Court Agree from Punjab Government Decision Regarding Schedule Caste
Supreme Court - फोटो : पीटीआई
अनुसूचित जाति में सबसे कमजोर वर्गों का जीवन स्तर नौकरी कोटे में तरजीही आरक्षण देकर ऊंचा उठाने के पंजाब सरकार के प्रयासों को और मजबूती मिल गई है। सर्वोच्च न्यायालय की सांविधानिक पीठ ने ऐसे आरक्षण के लिए कानून बनाने के राज्य के अधिकार को स्वीकार करते हुए मामला बड़ी पीठ को रेफर कर दिया।
विज्ञापन


इस संबंध में पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘पंजाब राज्य बनाम दविंदर सिंह व अन्य’ केस में अपने फ़ैसले पर विचार करते हुए माना कि पंजाब सरकार नौकरी कोटे में आगे तरजीही आरक्षण प्रदान करने के लिए अनुसूचित जातियों में वर्गीकरण करने का अधिकार रखती है। शीर्ष अदालत में ‘पंजाब अनुसूचित जातियों और पिछड़ी श्रेणियों (सेवाओं में आरक्षण) एक्ट, 2006 की धारा 4(5) विचाराधीन थी, जो सीधी भर्ती में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित कोटे के 50 प्रतिशत पद पहले वाल्मीकि और मजहबी सिखों को मुहैया करवाती है।
विज्ञापन


इस कानून को उच्च न्यायालय ने ‘ईवी चिनैया बनाम आंध्र प्रदेश सरकार व अन्य’ केस में साल 2005 के सर्वोच्च न्यायालय के 5 जजों के सांविधानिक पीठ के फ़ैसले के परिप्रेक्ष्य में ग़ैर सांविधानिक ठहराते हुए कहा था कि अनुसूचित जातियों में आगे उप-वर्गीकरण की इजाजत नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय की सांविधानिक पीठ ने अपने फ़ैसले में माना कि अनुसूचित जातियों में कई ख़ास जातियों के दूसरी जातियों की अपेक्षा काफ़ी  पिछड़ेपन संबंधी तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में राज्य सरकार के पास अनुसूचित जातियों में आगे वर्गीकरण का अधिकार है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने आगे कहा कि ईवी चिनैया मामले में कोऑर्डिनेट बेंच द्वारा सुनाए गए फ़ैसले को इंदिरा साहनी केस के फ़ैसले के परिप्रेक्ष्य में फिर विचारने के लिए बड़ी पीठ के पास भेजने की जरूरत है। राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी और 2014 में सर्वोच्च न्यायालय के 3 जजों की पीठ ने इस मामले को विचारने के लिए बड़ी पीठ को रेफर कर दिया।


इस केस में प्रारंभिक प्रश्न यह है कि क्या ईवी चिनैया केस में 5 जजों के सांविधानिक पीठ के फ़ैसले को इंदिरा साहनी व अन्य बनाम भारत सरकार व अन्य केस में अदालत के 9 जजों की पीठ द्वारा दिखाए कानून की व्याख्या के परिप्रेक्ष्य  में फिर विचार करने की जरूरत है, जिसमें बहुसंख्यक का मानना था कि पिछड़े वर्गों में आगे अन्य पिछड़े हो सकते हैं और राज्य सरकार के पास भारत के संविधान की धारा 16 (4) के अधीन आगे और वर्गीकरण का अधिकार होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed