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केंद्रीय मंत्रालय ने हाईकोर्ट में किया सुखना लेक को लेकर बड़ा खुलासा, 30 साल बाद सच आया सामने
Tue, 19 Mar 2019 09:35 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 19 Mar 2019 09:35 AM IST
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सुखना लेक
- फोटो : फाइल फोटो
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने हाईकोर्ट में सुखना लेकर को लेकर वो खुलासा किया, जिसे जानकर सभी दंग रह गए। 30 साल के बाद यह सच सामने आया है। दरअसल, चंडीगढ़ की शान सुखना लेक एक वेटलैंड है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 1988 में ही सुखना लेक को वेटलैंड घोषित कर दिया था, लेकिन इस बात का खुलासा चंडीगढ़ प्रशासन ने 30 साल बाद सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में किया। यह सच उस स्थिति में बताया गया, जब हाईकोर्ट ने ही प्रशासन से पूछ लिया कि सुखना लेक वेटलैंड है या नहीं?
उल्लेखनीय है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2009 में सुखना लेक के मामले पर संज्ञान लिया गया था। तब से सुनवाई चल रही है। इन दस वर्षों के दौरान हुई अनेक सुनवाइयां हुई, पर चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट को यह नहीं बताया कि सुखना लेक को 1988 में ही वेटलैंड घोषित किया जा चुका है। सोमवार को प्रशासन ने कहा कि एक कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो आगे की कार्यवाही पर गौर करेगी।
इस बीच एमिक्स क्यूरी सीनियर एडवोकेट एमएल सरीन ने हाईकोर्ट से कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन ने अब जो 50 पन्नों का हलफनामा दायर किया है, यह सुनवाई से पहले दायर किया जाना चाहिए था। इसलिए अब उन्हें इस विषय पर चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय चाहिए। यह सुनने के बाद जज ने मामले की सुनवाई 23 अप्रैल तक स्थगित कर दी।
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उल्लेखनीय है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2009 में सुखना लेक के मामले पर संज्ञान लिया गया था। तब से सुनवाई चल रही है। इन दस वर्षों के दौरान हुई अनेक सुनवाइयां हुई, पर चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट को यह नहीं बताया कि सुखना लेक को 1988 में ही वेटलैंड घोषित किया जा चुका है। सोमवार को प्रशासन ने कहा कि एक कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो आगे की कार्यवाही पर गौर करेगी।
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इस बीच एमिक्स क्यूरी सीनियर एडवोकेट एमएल सरीन ने हाईकोर्ट से कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन ने अब जो 50 पन्नों का हलफनामा दायर किया है, यह सुनवाई से पहले दायर किया जाना चाहिए था। इसलिए अब उन्हें इस विषय पर चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय चाहिए। यह सुनने के बाद जज ने मामले की सुनवाई 23 अप्रैल तक स्थगित कर दी।
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चंडीगढ़ बस नाम का सिटी ब्यूटीफुल रह गया: हाईकोर्ट
चंडीगढ़ में साफ-सफाई के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने सोमवार को प्रशासन और चंडीगढ़ नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- ‘चंडीगढ़ अब सिर्फ नाम का ही सिटी ब्यूटीफुल रह गया है। क्या इसकी सफाई की नगर निगम और प्रशासन को कोई चिंता नहीं है? एक साल पहले जो शहर देश भर में साफ-सफाई के मामले में तीसरे नंबर पर था, वह आज महज एक वर्ष में 20वें स्थान पर पहुंचा गया है।
यह चिंता की बात होने के साथ ही दोनों (प्रशासन और निगम) के लिए शर्म की भी बात है।’ हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ जैसे छोटे से शहर को साफ रखने में नगर निगम और प्रशासन नाकाम रहे हैं। देश में सफाई के मामले में 20वें स्थान पर चंडीगढ़ का नाम आना ही इसका सबूत है। शहर को साफ सुथरा रखने में नगर निगम नाकाम रहा है। हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या इस बात पर गौर किया जा रहा है कि महज एक वर्ष में कैसे यह शहर 17 पायदान पर खिसक गया और अब इसे सुधारने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?
यह चिंता की बात होने के साथ ही दोनों (प्रशासन और निगम) के लिए शर्म की भी बात है।’ हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ जैसे छोटे से शहर को साफ रखने में नगर निगम और प्रशासन नाकाम रहे हैं। देश में सफाई के मामले में 20वें स्थान पर चंडीगढ़ का नाम आना ही इसका सबूत है। शहर को साफ सुथरा रखने में नगर निगम नाकाम रहा है। हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या इस बात पर गौर किया जा रहा है कि महज एक वर्ष में कैसे यह शहर 17 पायदान पर खिसक गया और अब इसे सुधारने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?