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Chandigarh News: सारंगपुर में डबल डेकर फ्लाइओवर का सुझाव, एक मेट्रो-दूसरे पर चल सकेंगे सामान्य वाहन
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यूटी प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा की अध्यक्षता में हुई बैठक, यूटी ने राइट्स को इस पर काम करने का दिया सुझाव
मेट्रो का इंतजार लंबा, वरिष्ठ अधिकारियों ने सवारियों के आंकड़े, खर्च, कन्वर्जन फैक्टर पर दोबारा काम करने के दिए निर्देश
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। शहर में मेट्रो का इंतजार लंबा होता जा रहा है। सारंगपुर रूट पर मेट्रो भी चलाने का प्रस्ताव है और रोड सेफ्टी कमेटी ने खुड्डा लाहौरा के पास लगने वाले जाम को खत्म करने के लिए एक फ्लाईओवर भी बनाने का सुझाव दिया है। ऐसे में अब यूटी ने राइट्स को सुझाव दिया है कि वह एक डबल डेकर फ्लाईओवर पर काम करे, जिसमें एक पर मेट्रो और दूसरे पर सामान्य वाहन चल सकें।
यूटी प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा की अध्यक्षता में मंगलवार को सेक्टर-9 स्थित उनके दफ्तर में मेट्रो के मुद्दे पर बैठक हुई। इसमें विभाग के अधिकारियों के अलावा राइट्स (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस लिमिटेड) के अधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान चीफ इंजीनियर ने वर्तमान प्रगति की समीक्षा की और डबल डेकर फ्लाईओवर बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दिशा में राइट्स को प्रारंभिक काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इससे माना जा रहा है कि शहर की मेट्रो परियोजना में फिर देरी हो सकती है, क्योंकि पिछली बैठकों में वरिष्ठ अधिकारियों की कमेटी ने राइट्स की सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कैग रिपोर्ट के आधार पर 6 अहम बिंदुओं पर दोबारा काम करने के निर्देश दिए हैं। इसमें अन्य शहरों की मेट्रो परियोजनाओं के वास्तविक और अनुमानित सवारियों के आंकड़े, खर्च, कन्वर्जन फैक्टर पर दोबारा काम करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, हाल ही में डीसी की अध्यक्षता में होने वाली रोड सेफ्टी कमेटी ने पीजीआई से सारंगपुर तक एक फ्लाईओवर बनाने का सुझाव दिया है। ऐसे में दोनों प्रोजेक्ट एक-दूसरे से टकरा रहे थे। इसलिए, इंजीनियरिंग विभाग ने यह समाधान निकाला है और राइट्स को काम करने का सुझाव दिया है।
लेटेस्ट रिपोर्ट में भी राइट्स ने मेट्रो को ही बताया सही
प्रशासन को हाल ही में जमा की गई राइट्स की सिनेरियो रिपोर्ट के अनुसार भी ट्राइसिटी के लिए मेट्रो परियोजना को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बताया। हालांकि इसको लाभदायक होने में एक दशक का समय लग सकता है। रिपोर्ट में अहमदाबाद, कोच्चि, जयपुर और नोएडा की मेट्रो से तुलना की गई है। बताया गया है कि मेट्रो परियोजनाओं को आमतौर पर 30 वर्षों की संचालन अवधि के आधार पर आंका जाता है। अहमदाबाद मेट्रो का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में बताया है कि पूंजी निवेश की वसूली में कम से कम पांच साल लगते हैं। रिपोर्ट में कोविड-19 महामारी के बारे में भी बात की गई, जिससे 2019 में शुरू हुए मेट्रो को काफी नुकसान हुआ था। मार्च में हुई कमेटी की बैठक में हरियाणा के पूर्व परिवहन अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक खेमका ने राइट्स से 11.3 लाख वार्षिक यात्रियों के अनुमान को दोबारा जांचने को कहा था। इसके बाद मई में यह संशोधित रिपोर्ट जमा की गई थी।
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न्यू चंडीगढ़ में बढ़ रही जनसंख्या, इसी सड़क पर पीजीआई, फ्लाईओवर जरूरी
रोड सेफ्टी कमेटी ने कहा है कि पीजीआई से खुड्डा लाहौरा व खुड्डा जस्सू की ओर जाने वाली सड़क बड़ा बॉटलनेक है। यहां पुल के पास से ही जाम लग जाता है। न्यू चंडीगढ़ में धीरे-धीरे जनसंख्या बढ़ रही है। इसी सड़क पर पीजीआई और जीएमएसएच-16 भी है। ऐसे में इस रास्ते पर भविष्य में काफी जाम लगेगा। इसलिए कमेटी ने पीजीआई के पास एचएलबी से बोटेनिकल गार्डन तक 1.75 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर बनाने को कहा है। यह फ्लाईओवर पीजीआई, खुड्डा जस्सू और खुड्डा लाहौरा गांवों को कवर करेगा। इसकी कुल चौड़ाई 19.1 मीटर और कैरिजवे की चौड़ाई 17.5 मीटर होगी।
यूएमटीए ने दो साल में की सिर्फ तीन बैठकें
मेट्रो के लिए बनाई गई सबसे बड़ी युनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (यूएमटीए) की स्थापना 28 अप्रैल 2023 को हुई थी। तब से अब तक तीन बैठकें ही हुई हैं। पहली बैठक 18 जुलाई 2023, दूसरी बैठक 13 दिसंबर और तीसरी बैठक 2 सितंबर 2024 को हुई थी। इन बैठकों में चंडीगढ़ ट्राइसिटी मेट्रो परियोजना की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा की गई। तीसरी बैठक के दौरान इस परियोजना की व्यवहार्यता को लेकर नई समीक्षा कराने का फैसला लिया गया। प्रशासन ने राइट्स को दोबारा वित्तीय व्यवहार्यता अध्ययन के लिए नियुक्त किया। 1 नवंबर 2024 को हरियाणा के एक वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा की नई कमेटी गठित की गई।
प्रस्तावित एमआरटीएस फेज-1
- न्यू चंडीगढ़ के पड़ौल से पंचकूला के सेक्टर 28 - 32.20 किमी
- सुखना लेक से पंचकूला के सेक्टर-20 वाया एयरपोर्ट और आईएसबीटी जीरकपुर - 39.50 किमी
- सेक्टर-39 के ग्रेन मार्केट चौक से ट्रांसपोर्ट लाइट चौक वाया ट्रिब्यून चौक - 13.95 किमी
- अंडरग्राउंड - 16.5 किमी
- प्रस्तावित कॉरिडोर विस्तार - 6.15 किमी
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मेट्रो का इंतजार लंबा, वरिष्ठ अधिकारियों ने सवारियों के आंकड़े, खर्च, कन्वर्जन फैक्टर पर दोबारा काम करने के दिए निर्देश
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। शहर में मेट्रो का इंतजार लंबा होता जा रहा है। सारंगपुर रूट पर मेट्रो भी चलाने का प्रस्ताव है और रोड सेफ्टी कमेटी ने खुड्डा लाहौरा के पास लगने वाले जाम को खत्म करने के लिए एक फ्लाईओवर भी बनाने का सुझाव दिया है। ऐसे में अब यूटी ने राइट्स को सुझाव दिया है कि वह एक डबल डेकर फ्लाईओवर पर काम करे, जिसमें एक पर मेट्रो और दूसरे पर सामान्य वाहन चल सकें।
यूटी प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा की अध्यक्षता में मंगलवार को सेक्टर-9 स्थित उनके दफ्तर में मेट्रो के मुद्दे पर बैठक हुई। इसमें विभाग के अधिकारियों के अलावा राइट्स (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस लिमिटेड) के अधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान चीफ इंजीनियर ने वर्तमान प्रगति की समीक्षा की और डबल डेकर फ्लाईओवर बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दिशा में राइट्स को प्रारंभिक काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इससे माना जा रहा है कि शहर की मेट्रो परियोजना में फिर देरी हो सकती है, क्योंकि पिछली बैठकों में वरिष्ठ अधिकारियों की कमेटी ने राइट्स की सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कैग रिपोर्ट के आधार पर 6 अहम बिंदुओं पर दोबारा काम करने के निर्देश दिए हैं। इसमें अन्य शहरों की मेट्रो परियोजनाओं के वास्तविक और अनुमानित सवारियों के आंकड़े, खर्च, कन्वर्जन फैक्टर पर दोबारा काम करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, हाल ही में डीसी की अध्यक्षता में होने वाली रोड सेफ्टी कमेटी ने पीजीआई से सारंगपुर तक एक फ्लाईओवर बनाने का सुझाव दिया है। ऐसे में दोनों प्रोजेक्ट एक-दूसरे से टकरा रहे थे। इसलिए, इंजीनियरिंग विभाग ने यह समाधान निकाला है और राइट्स को काम करने का सुझाव दिया है।
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लेटेस्ट रिपोर्ट में भी राइट्स ने मेट्रो को ही बताया सही
प्रशासन को हाल ही में जमा की गई राइट्स की सिनेरियो रिपोर्ट के अनुसार भी ट्राइसिटी के लिए मेट्रो परियोजना को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बताया। हालांकि इसको लाभदायक होने में एक दशक का समय लग सकता है। रिपोर्ट में अहमदाबाद, कोच्चि, जयपुर और नोएडा की मेट्रो से तुलना की गई है। बताया गया है कि मेट्रो परियोजनाओं को आमतौर पर 30 वर्षों की संचालन अवधि के आधार पर आंका जाता है। अहमदाबाद मेट्रो का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में बताया है कि पूंजी निवेश की वसूली में कम से कम पांच साल लगते हैं। रिपोर्ट में कोविड-19 महामारी के बारे में भी बात की गई, जिससे 2019 में शुरू हुए मेट्रो को काफी नुकसान हुआ था। मार्च में हुई कमेटी की बैठक में हरियाणा के पूर्व परिवहन अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक खेमका ने राइट्स से 11.3 लाख वार्षिक यात्रियों के अनुमान को दोबारा जांचने को कहा था। इसके बाद मई में यह संशोधित रिपोर्ट जमा की गई थी।
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न्यू चंडीगढ़ में बढ़ रही जनसंख्या, इसी सड़क पर पीजीआई, फ्लाईओवर जरूरी
रोड सेफ्टी कमेटी ने कहा है कि पीजीआई से खुड्डा लाहौरा व खुड्डा जस्सू की ओर जाने वाली सड़क बड़ा बॉटलनेक है। यहां पुल के पास से ही जाम लग जाता है। न्यू चंडीगढ़ में धीरे-धीरे जनसंख्या बढ़ रही है। इसी सड़क पर पीजीआई और जीएमएसएच-16 भी है। ऐसे में इस रास्ते पर भविष्य में काफी जाम लगेगा। इसलिए कमेटी ने पीजीआई के पास एचएलबी से बोटेनिकल गार्डन तक 1.75 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर बनाने को कहा है। यह फ्लाईओवर पीजीआई, खुड्डा जस्सू और खुड्डा लाहौरा गांवों को कवर करेगा। इसकी कुल चौड़ाई 19.1 मीटर और कैरिजवे की चौड़ाई 17.5 मीटर होगी।
यूएमटीए ने दो साल में की सिर्फ तीन बैठकें
मेट्रो के लिए बनाई गई सबसे बड़ी युनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (यूएमटीए) की स्थापना 28 अप्रैल 2023 को हुई थी। तब से अब तक तीन बैठकें ही हुई हैं। पहली बैठक 18 जुलाई 2023, दूसरी बैठक 13 दिसंबर और तीसरी बैठक 2 सितंबर 2024 को हुई थी। इन बैठकों में चंडीगढ़ ट्राइसिटी मेट्रो परियोजना की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा की गई। तीसरी बैठक के दौरान इस परियोजना की व्यवहार्यता को लेकर नई समीक्षा कराने का फैसला लिया गया। प्रशासन ने राइट्स को दोबारा वित्तीय व्यवहार्यता अध्ययन के लिए नियुक्त किया। 1 नवंबर 2024 को हरियाणा के एक वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा की नई कमेटी गठित की गई।
प्रस्तावित एमआरटीएस फेज-1
- न्यू चंडीगढ़ के पड़ौल से पंचकूला के सेक्टर 28 - 32.20 किमी
- सुखना लेक से पंचकूला के सेक्टर-20 वाया एयरपोर्ट और आईएसबीटी जीरकपुर - 39.50 किमी
- सेक्टर-39 के ग्रेन मार्केट चौक से ट्रांसपोर्ट लाइट चौक वाया ट्रिब्यून चौक - 13.95 किमी
- अंडरग्राउंड - 16.5 किमी
- प्रस्तावित कॉरिडोर विस्तार - 6.15 किमी