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Tokyo Olympics 2021: किसान की बेटी गुरजीत कौर ने सच कर दिखाया सपना, ओलंपिक में बनीं भारत की जीत की सूत्रधार

Mon, 02 Aug 2021 01:33 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 02 Aug 2021 01:33 PM IST
सार

अमृतसर के मियादी कलां गांव की रहने वाली गुरजीत के परिवार का हॉकी से कुछ लेना देना नहीं था। अब टोक्यो ओलंपिक में गुरजीत ने इतिहास रच दिया।

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Tokyo Olympics 2021: Success Story Of Punjab Hockey Player Gurjit Kaur
टोक्यो ओलंपिक 2021: गुरजीत कौर - फोटो : Instagram @gurjit_02

विस्तार

भारत की महिला हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक में सबको चौंकाते हुए ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हराकर पहली बार सेमीफाइनल में कदम रख दिया है। ये इतिहास एक किसान परिवार में जन्मी गुरजीत कौर ने रचा। इस मैच में ड्रैग फ्लिकर गुरजीत कौर के गोल से ही भारत ने ऑस्ट्रेलिया को मात दी। उनकी इस सफलता से पंजाब गदगद है।

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अमृतसर के मियादी कलां गांव की रहने वाली 25 साल की गुरजीत के परिवार का हॉकी से कुछ लेना-देना नहीं था। उनके पिता सतनाम सिंह के लिए तो बेटी की पढ़ाई ही सबसे पहले थी। गुरजीत और उनकी बहन प्रदीप ने शुरुआती शिक्षा गांव के पास के निजी स्कूल से ली। इसके बाद वे तरनतारन के कैरों गांव में एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने गई। यहीं हॉकी के लिए उनका लगाव शुरू हुआ। वे लड़कियों को हॉकी खेलते देख प्रभावित हुई और उन्होंने इसमें हाथ आजमाने का फैसला किया।
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दोनों बहनों ने जल्द ही खेल में महारत हासिल की और छात्रवृत्ति भी पाई। इसने उन्हें मुफ्त स्कूली शिक्षा और बोर्डिंग मिला। इसके बाद गुरजीत कौर ने जालंधर के लायलपुर खालसा कॉलेज से ग्रेजुएशन की। गुरजीत ने इस कॉलेज में बीए आर्ट्स में दाखिला लिया था और करीब 5 साल तक कॉलेज की अकादमी में वे खेलती रही है।

कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. नवजोत ने बताया कि कॉलेज को आज बहुत मान महसूस हो रहा है कि उनकी छात्रा ने ओलंपिक में देश का नाम रोशन किया है। अब वाहेगुरु से यही अरदास करते हैं कि भारतीय महिला हॉकी टीम देश के लिए गोल्ड मेडल जीते। महिला हॉकी खिलाड़ियों ने जो कर दिखाया है उससे पूरे कॉलेज में जश्न का माहौल बन गया है। कॉलेज की छात्राएं भी बहुत गर्व महसूस कर रही हैं। 

डॉ. नवजोत ने कहा कि गुरजीत कौर को हर समय प्रैक्टिस को लेकर जुनून रहता था और उससे कभी छुट्टी कर मैदान नहीं छोड़ा। हर समय खेल अभ्यास को ही प्राथमिकता देती रही। इसी का नतीजा है कि उसने आज टोक्यो ओलंपिक में सबको चौंकाने वाला इतिहास रच दिया है। कॉलेज के हॉकी कोच कुलबीर सिंह सैनी ने कहा कि बहुत मान महसूस हो रहा है कि उनसे कोचिंग लेने वाली गुरजीत कौर ने आज देश का नाम ओलंपिक में चमकाया है। गुरजीत कौर अब तक करीब 53 इंटरनेशनल मैच खेल चुकी हैं। वह उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) प्रयागराज में सीनियर क्लर्क के पद पर तैनात है।

भारतीय हॉकी टीम की जीत पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बधाई दी है। कैप्टन ने ट्वीट किया कि तीन बार के ओलंपिक चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराकर ओलंपिक सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए मुझे हमारी महिला हॉकी टीम पर गर्व है। उन्होंने मैच में एकमात्र गोल करने वाली अमृतसर की गुरजीत कौर को बधाई दी। कैप्टन ने कहा कि हम इतिहास की दहलीज पर हैं।  

 

भारतीय टीम मास्को ओलंपिक 1980 में चौथे स्थान पर रही थी लेकिन केवल छह टीमों ने हिस्सा लिया था और मैच राउंड रोबिन आधार पर खेले गए थे। भारतीय हॉकी टीम अपने पूल में दक्षिण अफ्रीका और आयरलैंड को हराकर चौथे स्थान पर रही थी जबकि आस्ट्रेलिया अपने पूल में शीर्ष पर रहा था। भारतीय पुरुष टीम पहले ही सेमीफाइनल में जगह बना चुकी है। 

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