सीबीएसई 12वीं की परीक्षा रद्द : चंडीगढ़ में विद्यार्थी चिंतित, अभिभावक बोले- ऑनलाइन करवाए जा सकते थे एग्जाम
छात्रों का कहना है कि परीक्षाएं होनी चाहिए। इससे सभी छात्रों को एक निष्पक्ष मौका मिलता। छात्र इस बातचीत से भी चिंतित हैं कि उन्हें अंक किस आधार पर दिए जाएंगे। वहीं कुछ अभिभावकों का कहना है कि टीकाकरण के बाद परीक्षा ली जा सकती है। कुछ ने ऑनलाइन परीक्षा की सलाह दी।
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सीबीएसई बोर्ड ने 12वीं की परीक्षा कोरोना के चलते रद्द करने का फैसला किया है। इस फैसले से चंडीगढ़ के विद्यार्थी और शिक्षा अधिकारी दोनों ही संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें सबसे अधिक तनाव अब 12वीं के अंकों की प्रक्रिया का है कि किस आधार पर उन्हें पास किया जाएगा।
शिक्षा अधिकारियों ने बताया कि जब इतने समय बाद में फैसला लिया है तो सरकार और बोर्ड को पूरी प्रक्रिया के साथ निर्णय लेना चाहिए था। इस समय विद्यार्थियों के साथ हम भी असंमजस में हैं कि किस आधार पर विद्यार्थियों को पास किया जाएगा।
बहुत से विद्यार्थी परीक्षा देने के पक्ष में भी थे, क्योंकि बारहवीं बोर्ड के अंक आगे कॉलेज में दाखिला लेने के लिए अधिक मायने रखते हैं, इसलिए विद्यार्थी अधिक चिंतित है। वहीं अभिभावकों का कहना है कि टीकाकरण के बाद परीक्षा ली जा सकती थी या ऑनलाइन का विकल्प भी रख सकते थे।
परीक्षा होती तो परिणाम का तनाव नहीं रहता
मेरी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर तैयारी अच्छी थी। अब किस आधार पर अंक लगेंगे, यह आधार कितना सही होगा इन सब कारणों को लेकर परिणाम का तनाव है। परीक्षा होती तो यह तनाव न होता।
-सोनल, रेयान इंटरनेशनल स्कूल
परीक्षा होनी चाहिए थी
बोर्ड परीक्षाओं को लेकर शुरुआत से ही तैयारी कर रहे थे। परीक्षा होनी चाहिए थी, क्योंकि इससे सभी विद्यार्थियों को एक निष्पक्ष मौका मिलता और हम अंकों को लेकर अधिक संतुष्ट होते।
-विशेष, जीएमएसएसएस-16
परिणाम के लिए सरकार अपनाए निष्पक्ष प्रणाली
इस बात से संतुष्ट है कि कोई एक निर्णय पर पहुंचे हैं, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से तनाव के कारण पढ़ाई भी नहीं हो पा रही थी। सरकार निष्पक्ष प्रणाली से अंक दे, ताकि कॉलेजों में दाखिला लेने में समस्या न आए।
-हर्षिता, जीएमएसएसएस-35
विद्यार्थी और शिक्षक दोनों असमंजस में
इस फैसले से सभी असमंजस की स्थिति में हैं। विद्यार्थियों को किस आधार पर बारहवीं के अंक दिए जाएंगे, कॉलेज में किस आधार पर दाखिला मिलेगा, इन सब सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं।
-एचएस मामिक, अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
टीकाकरण के बाद ले सकते थे परीक्षा
- कौशल, अभिभावक
सरकार का फैसला ठीक
परीक्षा नहीं होना भविष्य के लिए चिंताजनक है लेकिन वर्तमान हालातों को देखते हुए बच्चों का स्वास्थ्य अधिक जरूरी है। अभिभावक के तौर पर इस समय बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए यह फैसला ठीक लग रहा है, क्योंकि स्वास्थ्य सर्वोपरि है।
-विनोद इंदौरा, अभिभावक
फैसला निराश करने वाला
बारहवीं बोर्ड कक्षा के भविष्य को देखते हुए परीक्षा रद्द करना सही नहीं है। हर बार परीक्षा रद्द करने से शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित करेगी। वहीं दूसरी ओर जिन विद्यार्थियों ने पूरे साल कड़ी मेहनत की है, उनके लिए यह निराश करने वाला फैसला है।
-नितिन गोयल, अध्यक्ष, अभिभाववक संघ