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Chandigarh News: री-नीट की मुश्किलों को हराकर चमके विद्यार्थी, टॉप-70 में बनाई जगह
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चंडीगढ़। नीट यूजी 2026 के री-एग्जाम में चंडीगढ़ के तीन विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर में टॉप रैंक हासिल की है। प्राकुल गर्ग ने ऑल इंडिया रैंक 63, हर्षुल गर्ग ने 66 और समर्थ सैनी ने 70वीं रैंक प्राप्त की। तीनों ने 695 अंक हासिल कर अपनी मेहनत, अनुशासन और लगातार रिवीजन के दम पर यह सफलता हासिल की। री-नीट और पेपर लीक जैसे विवादों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई पर पूरा ध्यान बनाए रखा। इन विद्यार्थियों का कहना है कि परिवार का सहयोग, नियमित पढ़ाई और आत्मविश्वास ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी रहे।
-- -अनुशासन और परिवार का साथ बना सफलता की कुंजी
मेरी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र अनुशासन और तय रूटीन रहा। सुबह कठिन सवाल हल करता था, जबकि दोपहर और शाम को थ्योरी पढ़ता था। पेपर लीक और री-नीट के कारण मानसिक दबाव जरूर रहा और विदेश यात्रा भी रद्द करनी पड़ी, लेकिन माता-पिता के सहयोग ने मुझे संभाला। परिवार के समर्थन से ही मैं पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित रख सका और यह सफलता हासिल हुई।— समर्थ सैनी
निरंतर रिवीजन और गलतियों से सीखने का मिला फल
मैंने कभी पढ़ाई में निरंतरता नहीं छोड़ी। रोज रिवीजन किया और हर गलती से सीखने की कोशिश की। री-नीट की घोषणा से शुरुआत में निराशा हुई, लेकिन अतिरिक्त समय का उपयोग बेहतर तैयारी के लिए किया। तनाव लेने के बजाय शांत मन से मेहनत करता रहा। मेरा सपना डॉक्टर बनकर जरूरतमंद लोगों की सेवा करना है और यही मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।— हर्षुल गर्ग
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स्मार्ट वर्क और अनुशासन से हासिल की बड़ी सफलता
मैंने नियमित और अनुशासित पढ़ाई के साथ स्मार्ट वर्क पर भरोसा किया। शुरुआत में भौतिकी और रसायन विज्ञान पर अधिक ध्यान दिया, जबकि अंतिम तीन महीनों में जीवविज्ञान पर पूरा फोकस किया। रोज करीब 16 घंटे पढ़ाई की। मेरा लक्ष्य शुरू से ही शीर्ष 10 में स्थान बनाना था। निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास ने मुझे यह उपलब्धि दिलाई। — प्राकुल गर्ग
निरंतरता और सही योजना ने दिलाई सफलता
मेरी सफलता का आधार निरंतरता और सही योजना रही। मैं हर दिन की शुरुआत अपने लक्ष्य तय करके करता था। यदि किसी दिन कोई काम अधूरा रह जाता, तो उसे अगले दिन पूरा करता था। एनसीईआरटी और क्लास नोट्स का बार-बार रिवीजन मेरी तैयारी का सबसे अहम हिस्सा था। री-नीट का फैसला पहले निराशाजनक लगा, लेकिन बाद में मैंने इसे खुद को और बेहतर साबित करने का दूसरा अवसर मान लिया।— माधवन महाजन
एकाग्रता के साथ पढ़ाई ही सफलता की कुंजी
मेरा मानना है कि लंबे समय तक पढ़ने से अधिक जरूरी है कि जितना भी पढ़ें, पूरी एकाग्रता और दक्षता के साथ पढ़ें। मैं हर सुबह बायोलॉजी से पढ़ाई शुरू करता था और नियमित अभ्यास करता था। परीक्षा रद्द होने के बाद भी मैंने तनाव लेने के बजाय अपनी तैयारी जारी रखी। अनुशासन, निरंतर मेहनत और सकारात्मक सोच ने मुझे यह सफलता दिलाई। मेरा सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है।— अर्नव जिंदल
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मेरी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र अनुशासन और तय रूटीन रहा। सुबह कठिन सवाल हल करता था, जबकि दोपहर और शाम को थ्योरी पढ़ता था। पेपर लीक और री-नीट के कारण मानसिक दबाव जरूर रहा और विदेश यात्रा भी रद्द करनी पड़ी, लेकिन माता-पिता के सहयोग ने मुझे संभाला। परिवार के समर्थन से ही मैं पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित रख सका और यह सफलता हासिल हुई।— समर्थ सैनी
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निरंतर रिवीजन और गलतियों से सीखने का मिला फल
मैंने कभी पढ़ाई में निरंतरता नहीं छोड़ी। रोज रिवीजन किया और हर गलती से सीखने की कोशिश की। री-नीट की घोषणा से शुरुआत में निराशा हुई, लेकिन अतिरिक्त समय का उपयोग बेहतर तैयारी के लिए किया। तनाव लेने के बजाय शांत मन से मेहनत करता रहा। मेरा सपना डॉक्टर बनकर जरूरतमंद लोगों की सेवा करना है और यही मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।— हर्षुल गर्ग
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स्मार्ट वर्क और अनुशासन से हासिल की बड़ी सफलता
मैंने नियमित और अनुशासित पढ़ाई के साथ स्मार्ट वर्क पर भरोसा किया। शुरुआत में भौतिकी और रसायन विज्ञान पर अधिक ध्यान दिया, जबकि अंतिम तीन महीनों में जीवविज्ञान पर पूरा फोकस किया। रोज करीब 16 घंटे पढ़ाई की। मेरा लक्ष्य शुरू से ही शीर्ष 10 में स्थान बनाना था। निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास ने मुझे यह उपलब्धि दिलाई। — प्राकुल गर्ग
निरंतरता और सही योजना ने दिलाई सफलता
मेरी सफलता का आधार निरंतरता और सही योजना रही। मैं हर दिन की शुरुआत अपने लक्ष्य तय करके करता था। यदि किसी दिन कोई काम अधूरा रह जाता, तो उसे अगले दिन पूरा करता था। एनसीईआरटी और क्लास नोट्स का बार-बार रिवीजन मेरी तैयारी का सबसे अहम हिस्सा था। री-नीट का फैसला पहले निराशाजनक लगा, लेकिन बाद में मैंने इसे खुद को और बेहतर साबित करने का दूसरा अवसर मान लिया।— माधवन महाजन
एकाग्रता के साथ पढ़ाई ही सफलता की कुंजी
मेरा मानना है कि लंबे समय तक पढ़ने से अधिक जरूरी है कि जितना भी पढ़ें, पूरी एकाग्रता और दक्षता के साथ पढ़ें। मैं हर सुबह बायोलॉजी से पढ़ाई शुरू करता था और नियमित अभ्यास करता था। परीक्षा रद्द होने के बाद भी मैंने तनाव लेने के बजाय अपनी तैयारी जारी रखी। अनुशासन, निरंतर मेहनत और सकारात्मक सोच ने मुझे यह सफलता दिलाई। मेरा सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है।— अर्नव जिंदल