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छात्र बोले- सैर सपाटे के लिए सुखना लेक तक खोल दी, अब पढ़ाई के लिए पीयू भी खोल दो
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चंडीगढ़। कोरोना के चलते पीयू डेढ़ साल से बंद है। केवल कार्यालयों में कामकाज हो रहा है। ऑफलाइन शिक्षण कार्य न होने के कारण विद्यार्थी परेशान हैं। उन्होंने पीयू प्रशासन से कहा है कि यूटी प्रशासन ने सुखना लेक तक खोल दी है, जहां हर दिन हजारों की संख्या में लोग आते हैं। अब पढ़ाई के लिए पीयू के दरवाजे भी खेल दें। यहां गिनती के विद्यार्थी हैं। पीयू चाहे तो दो शिफ्टों में पढ़ाई करवा सकती है। इससे पूर्व में नुकसान की भरपाई हो सकती है। अधिकारी जल्द से जल्द इस बारे में निर्णय लें।
पीयू में 18 मार्च 2020 को हुई थी पढ़ाई
कोरोना का आगमन देश में जनवरी 2020 में हो गया था। उसके बाद मार्च के आखिर सप्ताह में लॉकडाउन शुरू हुआ। ठीक इससे पहले कक्षाएं पीयू में लग रही थीं। 18 मार्च तक पढ़ाई हुई और उसके बाद विद्यार्थियों की छुट्टी कर दी गई। तब से लेकर आज तक पीयू में ऑफलाइन पढ़ाई नहीं हुई। ऑनलाइन पढ़ाई तो हो रही है, लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों में कमजोर नेटवर्क के चलते छात्रों को पढ़ाई में व्यवधान हो रहा है।
हालांकि इस बीच कोरोना का प्रकोप अधिक रहा, लेकिन कई सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों ने अपने कैंपस खोलकर ऑफलाइन पढ़ाई शुरू करवाई। पीयू ने ऑनलाइन ही शिक्षण कार्य रखा। कार्यालयों में काम होता रहा। शिक्षक ऑनलाइन शिक्षण पद्धति में पारंगत नहीं थे। काफी प्रयास किया और प्रशिक्षण लिया। पढ़ाई शुरू की और विद्यार्थियों ने भी इसके लिए मेहनत की। जैसे-तैसे काम तो चल गया लेकिन ऑफलाइन पढ़ाने का जितना फायदा नहीं मिल पाया। पिछले साल अक्तूबर से ही विद्यार्थियों ने कैंपस खोलने की मांग शुरू कर दी जो पूरी नहीं की गई।
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छात्र बोले- पीयू के कुछ अफसर अपना मतलब न देखें
पीयू के परास्नातक के छात्र शिवम भारद्वाज, विनोद सिंह, सुमित कुमार आदि का कहना है कि पीयू पिछले साल ही खोल देनी चाहिए थी, लेकिन कुछ अधिकारी अपने मतलब सिद्ध करने के लिए काम कर रहे हैं। अब तक कैंपस नहीं खोला गया। इस पर पहले ही ध्यान दिया जाना चाहिए। 15 हजार छात्रों का भविष्य लटका हुआ है। ऑनलाइन पढ़ाई से काम नहीं चलने वाला। फील्ड में जाने से पहले विद्यार्थियों को अभ्यास, प्रयोग कराने होंगे। इसके लिए कैंपस खोला जाए। विद्यार्थियों का कहना है कि कैंपस खुल गया तो सीनेट व सिंडिकेट चुनाव के अलावा छात्र संघ चुनाव करवाना पड़ेगा। इसलिए पीयू के अधिकारी इससे बच रहे हैं। इस दिशा में पीयू को काम करना होगा अन्यथा छात्रों का आक्रोश बढ़ेगा।
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पीयू में 18 मार्च 2020 को हुई थी पढ़ाई
कोरोना का आगमन देश में जनवरी 2020 में हो गया था। उसके बाद मार्च के आखिर सप्ताह में लॉकडाउन शुरू हुआ। ठीक इससे पहले कक्षाएं पीयू में लग रही थीं। 18 मार्च तक पढ़ाई हुई और उसके बाद विद्यार्थियों की छुट्टी कर दी गई। तब से लेकर आज तक पीयू में ऑफलाइन पढ़ाई नहीं हुई। ऑनलाइन पढ़ाई तो हो रही है, लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों में कमजोर नेटवर्क के चलते छात्रों को पढ़ाई में व्यवधान हो रहा है।
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हालांकि इस बीच कोरोना का प्रकोप अधिक रहा, लेकिन कई सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों ने अपने कैंपस खोलकर ऑफलाइन पढ़ाई शुरू करवाई। पीयू ने ऑनलाइन ही शिक्षण कार्य रखा। कार्यालयों में काम होता रहा। शिक्षक ऑनलाइन शिक्षण पद्धति में पारंगत नहीं थे। काफी प्रयास किया और प्रशिक्षण लिया। पढ़ाई शुरू की और विद्यार्थियों ने भी इसके लिए मेहनत की। जैसे-तैसे काम तो चल गया लेकिन ऑफलाइन पढ़ाने का जितना फायदा नहीं मिल पाया। पिछले साल अक्तूबर से ही विद्यार्थियों ने कैंपस खोलने की मांग शुरू कर दी जो पूरी नहीं की गई।
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छात्र बोले- पीयू के कुछ अफसर अपना मतलब न देखें
पीयू के परास्नातक के छात्र शिवम भारद्वाज, विनोद सिंह, सुमित कुमार आदि का कहना है कि पीयू पिछले साल ही खोल देनी चाहिए थी, लेकिन कुछ अधिकारी अपने मतलब सिद्ध करने के लिए काम कर रहे हैं। अब तक कैंपस नहीं खोला गया। इस पर पहले ही ध्यान दिया जाना चाहिए। 15 हजार छात्रों का भविष्य लटका हुआ है। ऑनलाइन पढ़ाई से काम नहीं चलने वाला। फील्ड में जाने से पहले विद्यार्थियों को अभ्यास, प्रयोग कराने होंगे। इसके लिए कैंपस खोला जाए। विद्यार्थियों का कहना है कि कैंपस खुल गया तो सीनेट व सिंडिकेट चुनाव के अलावा छात्र संघ चुनाव करवाना पड़ेगा। इसलिए पीयू के अधिकारी इससे बच रहे हैं। इस दिशा में पीयू को काम करना होगा अन्यथा छात्रों का आक्रोश बढ़ेगा।