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एक युद्ध...पटाखों के विरुद्ध : छात्र बोले- पटाखे फिजूलखर्ची, मनोरंजन कम नुकसान ज्यादा

Wed, 04 Nov 2020 07:08 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/मोहाली/पंचकूला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/मोहाली/पंचकूला Published by: ajay kumar Updated Wed, 04 Nov 2020 07:08 PM IST
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Student Supported Amar Ujala Campaign against Firecrackers in Chandigarh
- फोटो : अमर उजाला

शहरवासियों के बाद अब कॉलेज के विद्यार्थी भी अमर उजाला के अभियान 'एक युद्ध पटाखों के विरुद्ध' से जुड़ने लगे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि पटाखे फिजूलखर्ची हैं। इससे मनोरंजन कम और नुकसान ज्यादा होता है। कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें एलर्जी की समस्या है, जो दिवाली पर बढ़ने वाले प्रदूषण के साथ ज्यादा परेशान करती है। पटाखों से स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण को भी नुकसान होता है। 

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धुएं और प्रदूषण से एलर्जी
तीसरी कक्षा तक फुलझड़ी जलाई है। पटाखे कभी नहीं जलाए। दिवाली पर होने वाले पटाखों के धुएं और प्रदूषण से एलर्जी है। घरों में पालतू जानवर भी दिवाली के दिन पटाखों के शोर से परेशान हो जाते हैं। डर कर कोने में छुप जाते हैं।  -आरुषि, छात्रा, डीएवी-10 
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पटाखों से पक्षियों को होती है परेशानी
कभी पटाखे नहीं जलाए। पटाखे जलाना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता। लोग अपनों के साथ दूसरों का भी नुकसान कर रहे होते हैं। पक्षियों को बहुत परेशानी होती है। शोर के कारण घोंसले छोड़ने पड़ते हैं। उनका नियमित चक्र ही बिगड़ जाता है। -आंचल, छात्रा, डीएवी-10 

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पैसों की बर्बादी है पटाखे

बचपन से ही भाई-बहनों को पटाखे पसंद नहीं थे। दिवाली के दिन घर में पकवान बनता है। पूजन के साथ परिवार में बैठकर समय व्यतीत करते हैं। पटाखे फिजूल खर्च लगते हैं। इससे कोई मनोरंजन नहीं होता। बुजुर्गों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं।  -नितेश, छात्र, पीजीजीसी-46 

दोस्तों व परिवार के साथ समय बिताएंगे
पटाखे कभी नहीं जलाए। दिवाली पर घर में सजावट और विभिन्न तरह का खाना बनता है। द़ोस्तों और परिवार के साथ घर में रहकर दिवाली मनाते हैं। पिछले तीन साल से दिवाली पर प्रदूषण से परेशानी भी हो रही है। पटाखे जलाने से किसी तरह का मनोरंजन नहीं होता। - ऋतिक, छात्र, एसडी कॉलेज 

दिवाली पर करते हैं घर डेकोरेट
पिछले पांच-छह सालं से पटाखे चलाने बंद कर दिए हैं। बचपन में ज्यादा समझ नहीं थी। अब हम देख रहे हैं, प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ रहा है। दिवाली पर पूरा घर डेकोरेट करते हैं। पिछले साल हॉस्टल में ग्रीन दिवाली मनाने के लिए सभी को प्रेरित किया था। -लक्षित, छात्र, डीएवी -10

पर्यावरण संरक्षण का देंगे संदेश

दिवाली पर पटाखे ना जलाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देंगे, ताकि पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके। आने वाली दिवाली पर सब लोग पटाखे चलाने की बजाय जरूरतमंदों की मदद करें, इससे देश का भला होगा। दिवाली खुशियों का त्योहार है और इसे एक-दूसरे के साथ खुशी-खुशी मनाना चाहिए। लोगों को चाहिए कि वह अपने घरों के बाहर दीये जलाएं और जितना हो सके दूसरों को पटाखे न चलाने के लिए प्रेरित करें। आशू, विद्यार्थी।

पटाखों से दूषित होता है पर्यावरण
जब भी दिवाली आती है तो सरकारें लोगों को पटाखे ना चलाकर उसकी जगह ग्रीन दिवाली मनाने को लेकर जागरूक करती हैं। परंतु लोग सरकार की हिदायतों को नजरअंदाज करके पटाखे चलाते हैं। इससे पर्यावरण तो दूषित होता ही है और साथ ही बच्चे भी हादसों का शिकार होते हैं। मैं इस दिवाली को बिना पटाखों के मनाऊंगा और अपने दोस्तों को से भी अपील करूंगा कि पटाखे न चलाकर जरूरतमंद लोगों की मदद करें। - रोबिन, विद्यार्थी।

घर में रहकर मनाएं दिवाली
कोविड-19 के चलते जो हालात पैदा हुए हैं, उसे देखते हुए मैंने दिवाली पर पटाखे ना चलाने का फैसला लिया है। पटाखे चलाने की जगह अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ घर में बैठकर ही दिवाली को मनाऊंगा। मेरी लोगों से भी यही अपील है कि इस त्योहार पर इधर-उधर जाने की बजाय घर में रहकर अपने परिवार के साथ मनाएं। घर में रहकर की कोरोना वायरस को जल्द से जल्द खत्म किया जा सकता है। - अंश, विद्यार्थी।

इस बार मैं पटाखे नहीं चलाऊंगा

मैं हर साल दिवाली पर पापा से पटाखे खरीदने की जिद करता था, अब नहीं करूंगा। साथ ही यह संकल्प भी लेता हूं कि मैं खुद दिवाली पर पटाखे नहीं जलाऊंगा। यही नहीं, पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए अपने दोस्तों और जान-पहचान वालों को भी इस अभियान से जोड़ने का प्रयास करूंगा। - आयुष गोप, शिवालिक विहार, नयागांव 

पटाखे ना जलाने की शपथ ली
मैं इस बार दिवाली पर पटाखे नहीं चलाऊंगी। मैंने यह संकल्प लिया है। क्योंकि इससे पर्यावरण दूषित होने के साथ शहर में गंदगी भी फैलती है। पटाखों से होने वाले प्रदूषण का हमारे स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। मैं दिवाली पर पटाखे ना जलाने के लिए अपनी सभी सहेलियों को भी शपथ दिलाऊंगी। इस बार दिवाली में घर को दीये और मोमबत्तियों से सजाऊंगी। - अरहमा, नयागांव 
 
दिवाली पर करेंगे जरूरतमंदों की सेवा
मेरे पापा शुरू से ही मुझे पटाखे जलाने से मना करते रहे हैं। क्योंकि वह भी यही कहा करते हैं कि दिवाली पर पटाखों पर पैसे खर्च करने की बजाय उन्हें अच्छे काम पर खर्च करना चाहिए। इसलिए मेरी लोगों से अपील है कि वह पटाखों के पैसों से जरूरतमंदों की मदद करें। इससे वातावरण को स्वच्छ रखने में हम भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं। - शिवम, नगर खेड़ा, नयागांव

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