प्रदूषण बढ़ा: चिंता में डाल देंगी पराली जलाने की ये तस्वीरें, पंजाब में नहीं थम रहा सिलसिला
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पंजाब में पराली जलाने का सिलसिला थमने की जगह बढ़ता ही जा रहा है। अमृतसर और तरनतारन के बाद लुधियाना से पराली जलाने की ताजा तस्वीरें सामने आईं हैं। इन दिनों पंजाब में किसान अपने खेतों में पराली जला रहे हैं। पराली जलाने की ये ताजा तस्वीरें लुधियाना के लाडोवाल गांव की हैं।
एक किसान का कहना है कि हम इसके लिए मजबूर हैं। सरकार हमें कुछ भी उपलब्ध नहीं करा रही है। अमृतसर के काथूनंगल गांव में भी पराली जलाने की घटना सामने आई है। यहां एक किसान का कहना है कि वायु प्रदूषण में पराली का शायद ही योगदान है। वाहन और कारखानों का प्रदूषण में प्रमुख योगदान है। बता दें कि पराली जलाने का असर है कि प्रदेश के आठ जिलों की हवा खराब हो गई है। अगर से सिलसिला ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ना तय है।
Stubble burning continues in Punjab; visuals from Kathunangal village in Amritsar. A farmer says, "Stubble burning hardly contributes to air pollution. Vehicles and factories are major contributors to pollution." pic.twitter.com/bNbBeVhojI
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) October 21, 2020
Stubble burning continues in #Punjab, visuals from Ludhiana's Ladhowal village.
"We are compelled to this. The government is not providing us with anything," says a farmer. pic.twitter.com/VED4367RcH — ANI (@ANI) October 21, 2020
Punjab: Farmers continue to burn stubble in their fields in Tarn Taran; visuals from Bhurj village.
— ANI (@ANI) October 18, 2020
A farmer says, “Govt is responsible for stubble burning and the consequent rise in pollution. Govt has not given us any alternative.” pic.twitter.com/4EdeW4n0v0
तीन दिन पहले तरनतारन में पराली जलाने की घटना सामने आई थी। इससे पहले अमृतसर के घरी गांव के खेतों में जलती पराली की तस्वीरें सामने आई थीं। तरनतारन के भुर्ज गांव में पराली जला रहे किसान का कहना है कि पराली जलाने और बढ़ते प्रदूषण के लिए सरकार जिम्मेदार है। सरकार ने हमें कोई विकल्प नहीं दिया है।
पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 280 फीसदी की वृद्धिAmritsar: Farmers continue to burn stubble in their fields; visuals from Ghari Mandi. #Punjab pic.twitter.com/EBVt8JOMDy
— ANI (@ANI) October 16, 2020
पंजाब में पराली जलाने के मामलों में इस बार पिछले साल के मुकाबले 280 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल पंजाब में 21 सितंबर से 12 अक्तूबर तक 775 पराली जलाने की घटनाएं हुई थीं जो इस साल 2,873 तक पहुंच गई हैं। वहीं, हरियाणा में 25 सितंबर से 14 अक्तूबर तक 1386 से अधिक जगहों पर पराली जलाई जा चुकी है।
हरियाणा में 1386 जगह जलाई गई पराली
हरियाणा में 25 सिंतबर से 14 अक्तूबर तक 1386 से अधिक जगहों पर पराली जलाई जा चुकी है। इसके लिए सरकार ने किसानों के चालान करने भी शुरू कर दिए हैं। किसानों की इस हरकत पर सैटेलाइट से नजर भी रखी जा रही है। सरकार को यही चिंता सता रही है कि पराली जलाने का यह सिलसिला यदि दिवाली तक यूं ही चलता रहा तो प्रदेश की आबोहवा पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।
प्रदेश के आठ जिलों की हवा हुई खराब
पराली जलाने का असर है कि पंजाब के आठ जिलों की हवा की गुणवत्ता खराब हो गई है। लुधियाना का वायु गुणवत्ता सूचकांक ऑरेंज जोन में पहुंच गया है। बाकी सात जिले एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के अनुसार येलो जोन में हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में अभी धान की फसल पूरी तरह से नहीं कटी है। आने वाले दिनों में हालात और भी खराब होने की आशंका है। पंजाब के लिए पराली हमेशा ही परेशानी का सबब रही है। इस साल भी सरकार के दावों के विपरीत पराली जलाने से पंजाब की आबोहवा खराब होने लगी है।

पंजाब के आठ जिलों का एक्यूआई स्तर
- क्रम शहर एक्यूआई
- 1. लुधियाना 218
- 2. पटियाला 165
- 3. बठिंडा 157
- 4. मंडी गोविंदगढ़ 153
- 5. जालंधर 152
- 6. खन्ना 152
- 7. अमृतसर 145
- 8. रोपड़ 82
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए प्रयासरत है। जिन जिलों में एक्यूआई का स्तर बढ़ा है, वह जिले कृषि प्रधान हैं। धान कटाई का समय है, ऐसे में प्रदूषण का स्तर बढ़ना लाजिमी है। करुणेश गर्ग, मेंबर सेक्रेट्री, पीपीसीबी।