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Chandigarh News: संघर्ष किया और जारी रखी सपनों की उड़ान, ऐसे पाई मां ने एक खास मुकाम

Sun, 12 May 2024 05:51 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 12 May 2024 05:51 AM IST
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Struggled and continued the flight of dreams, this is how the mother achieved a special position
चंडीगढ़। शादी के 22 साल बाद मुझे अपनी खासियत बेटी के माध्यम से पता चली। आज भी वह दिन याद है जब ससुराल में छिप-छिप कर कविताएं लिखती थी। घर की रसोई में डायरी और कलम रखी होती थी। जैसे ही कविता की अगली लाइन समझ आती, झट से नोट कर लेती थी। कई बार उन कविताओं को मेरे सामने फाड़ा गया। बेटी बड़ी हुई तो उसने मुझे घर वालों से छिपकर अपनी कविताएं पढ़ते हुए देखा। समय के साथ उसने मुझे समझा। सच कहूं तो बेटी के रूप में प्रिय दोस्त मिल गई। अब मैं उसे अपनी कविताएं सुनाती हूं और मन की हर बात भी साझा करती हूं। उसी की बदौलत बुटीक शुरू किया। ये बातें डेराबस्सी की दीपमाला ने अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले शुक्रवार को अमर उजाला कार्यालय में अपराजिता कार्यक्रम में कहीं। उनके साथ बेटी आस्था भी मौजूद थी। मदर्स डे पर संघर्ष से सफलता की कहानी थीम पर आयोजित कार्यक्रम में दीपमाला की ही तरह शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में मुकाम हासिल कर चुकी महिलाओं ने अपनी कहानी साझा की। इस कार्यक्रम में माताएं अपनी और उनकी बेटियां के साथ शामिल हुईं।
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पीजीआई के एनेस्थीसिया विभाग की प्रो. नीरजा भारती और अपनी बेटी टिया के साथ पहुंचीं। टिया ने 12वीं आईसीएसई बोर्ड में ट्राइसिटी टॉप किया है। नीरजा ने बताया कि बचपन में उनके घर में बेटियों को ज्यादा पढ़ाने पर पाबंदी थी लेकिन मेरी मां ने विरोध कर पढ़ाना जारी रखा। 12वीं के बाद वह डॉक्टरी की परीक्षा की तैयारी कर रही थीं तभी सगाई कर दी गई। उन्होंने विरोध जताया और शादी करने से इन्कार कर दिया। एमबीबीएस पूरा करने के बाद एमडी और फिर रिसर्च वर्क को भी अपनी सोच के अनुसार पूरा कर सफलता की कहानी खुद लिखी। आज पीजीआई के कई बड़े प्रोजेक्ट में अहम जिम्मेदारी का निर्वाह कर रही हैं। उनके मार्गदर्शन में बेटी टिया ने भी 12वीं में नाम रोशन किया।
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लेखिका, निर्देशक, नाटककार और फिल्मकार निशा लूथरा ने अपनी 17 साल की बेटी निकाशा के साथ सफलता की कहानी सुनाई। निशा ने बताया कि एक बिजनेसमैन की पत्नी होने के नाते साहित्य लेखन में आगे बढ़ना काफी कठिन निर्णय रहा लेकिन घर-परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए अपने शौक को बरकरार रखा। अपने दृढ़ निश्चय के बल पर कई किताबें लिखीं। कई फिल्मों और नाटकों का निर्देशन किया। मेंटल हेल्थ पर काम कर रही हूं। बेटी निकाशा भी काफी कम उम्र में किताबें लिख रही है, साथ-साथ थिएटर करती है।
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बचपन में आकाश में उड़ान भरने की सोच रखने वाली पायल को अपनी बेटी से ही जीने का सबसे बड़ा उद्देश्य मिला। पायल ने बताया कि वह बिजनेस वुमन होने के साथ एक सफल बेटी की मां भी है। उन्होंने बताया कि वह अपनी बेटी की ओर से स्थापित सोसाइटी को आगे बढ़ा रही हैं। इसमें असहाय बेटियों की शादी के साथ जागरूकता संबंधी कई कार्यक्रम कर रही हैं।

संवाद थिएटर ग्रुप की रजनी बजाज जो एक अभिनेत्री, टीचर, कवित्री, निर्देशिका और डांसर भी है, ने अपनी सफलता की कहानी कई मुश्किलों को पार कर लिखी है। रजनी ने बताया कि शादी के बाद सपने थम से गए, जब बेटे ने दसवीं पास किया तब मुझे एहसास हुआ कि जब सभी अपनी दुनिया में व्यस्त हो जाएंगे तब मैं अकेले क्या करूंगी। इसी बीच अपनी कला को बचाने के लिए थिएटर का शौक पूरा करने का निर्णय लिया। हालांकि पति को यह बिल्कुल पसंद नहीं है। इस लड़ाई में मुझे कई भूमिकाओं में खुद को सफल साबित करने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। रजनी ने बताया कि स्कूल में डांस टीचर की जिम्मेदारी मिलने के बाद शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू किया। घर में सभी के चले जाने के बाद घुंघरू बांध प्रैक्टिस शुरू किया। एक दिन मेहनत रंग लाई। रजनी के साथ उनकी स्टूडेंट व्याख्या भी कार्यक्रम में शामिल हुईं।

घर की जिम्मेदारी के साथ पीजीआई जैसे संस्थान में प्रशासनिक क्षेत्र की बागडोर मिल जाए तो दोहरी भूमिका को निभाना असमंजस भरा हो सकता है। उन्होंने इसे चुनौती माना और सफल रहीं। यह कहना है पीजीआई में हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में अहम भूमिका निभा रही डॉ. रंजना सिंह का। कार्यक्रम में उनकी बेटी ईवा भी शामिल हुई। रंजना ने बताया कि उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाना था। 12वीं के बाद सिविल सेवा की तैयारी करना चाहती थीृ लेकिन इस बीच एमबीबीएस कर लिया। उसके बाद सिविल करने की इच्छा जताई तो परिवार ने डॉक्टर के साथ विवाह करने की सलाह दी। उस वक्त मेरे लिए हामी भरना काफी कठिन था। लेकिन परिवार के निर्णय का सम्मान किया। पीजीआई ज्वाइन करने के बाद संस्थान में प्रशासनिक क्षेत्र में आने के लिए परीक्षा दी और सपने को पूरा किया।
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