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एग्रीगेटर कंपनियों की मनमर्जी पर एसटीए की सख्ती, 25 गाड़ियों के काटे चालान

Tue, 26 Apr 2022 02:06 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2022 02:06 AM IST
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Strictness of STA on the will of aggregator companies, invoices of 25 vehicles deducted
चंडीगढ़। शहर में एग्रीगेटर कंपनियां मनमर्जी पर उतर आई हैं। ये कंपनियां निजी व टेंपरेरी नंबरों की गाड़ियों को भी कैब टैक्सी चलाने व उनका मोबाइल एप इस्तेमाल करने की इजाजत दे रही हैं। इस पर सोमवार को स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) की तरफ से कार्रवाई की गई। एसटीए ने करीब 25 गाड़ियों के चालान काटे हैं।
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एसटीए ने शहर में दो एग्रीगेटर कंपनियां ओला व उबर को चंडीगढ़ में कैब टैक्सी चलाने की अनुमति दी है, लेकिन ये अपनी मनमर्जी कर रहे हैं। कंपनियाें ने कमर्शियल गाड़ियों के साथ कई निजी गाड़ियों व टेंपरेरी नंबरों को भी कैब चलाने की मंजूरी दी हुई है और कई चालक निजी नंबरों पर ओला व उबर के लिए कैब चला रहे हैं। एसटीए के पास काफी समय से इसको लेकर शिकायत मिल रही थी इसलिए सोमवार को ऐसी गाड़ियों का चालान काटा गया। इनमें से कुछ चालकों को दो मई को एसटीए दफ्तर बुलाया है। बता दें एसटीए ने शनिवार को ओला-उबर और कैब-ऑटो संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। इस दौरान एसटीए अमित कुमार ने माना कि दोनों कंपनियों की ओर से खामियां हैं। बैठक में तय हुआ कि एसटीए की त्रैमासिक फीस कंपनी ही भरेंगी, साथ ही अधिकारियों ने कहा कि तीन दिन के अंदर दोनों कंपनियां अनियमितताओं को दूर करें। कंपनियां को किराया नियमानुसार बढ़ाना होगा। इस दौरान एसटीए ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि निजी नंबर की गाड़ियों पर शिकंजा कसें। इसके अलावा अस्थायी नंबर की गाड़ियों से सवारी ढोने का काम करने पर इसे गैरकानूनी माना जाएगा और गाड़ी जब्त कर ली जाएगी। इन्हीं निर्देशों पर एसटीए ने सोमवार को कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार इस समय चंडीगढ़ में ओला व उबर में 3000 से ज्यादा कैब टैक्सी चल रही हैं।
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एग्रीगेटर कंपनियों पर शिकंजा कसना चाहिए
कैब-ऑटो यूनाइटेड फ्रंट के कॉर्डिनेटर विक्रम पुंडीर ने कहा कि एसटीए को कैब चालकों को परेशान करने की बजाए एग्रीगेटर कंपनियों पर शिकंजा कसना चाहिए। प्रशासन की तरफ से कंपनियों को लाइसेंस दिया गया है। अगर वो नियमों को नहीं मान रहे हैं और मनमर्जी कर रही हैं तो उन पर कार्रवाई करनी चाहिए। अधिकारियों ने ओला और ऊबर के प्रतिनिधियों से कहा है कि अपनी पॉलिसी में सुधार करें। ऐसा न होने पर उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
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