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Chandigarh News: जीएमसीएच की इमरजेंसी से हटेगा स्ट्रेचर, सेक्टर-48 अस्पताल में अब हर दिन चलेगी ओपीडी
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चंडीगढ़। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया के 16 दिसंबर को जीएमसीएच-32 और सेक्टर-48 अस्पताल के निरीक्षण के बाद दोनों ही अस्पतालों की बदहाल स्थिति तेजी से बदलने की तैयारी शुरू कर दी गई है। कॉलेज प्रशासन ने बदलाव की रूपरेखा तैयार करते हुए जारी किए गए आदेश में कहा है कि जीएमसीएच की इमरजेंसी में ट्रॉली पर मरीज भर्ती नहीं किए जाएंगे। वहीं, सेक्टर-48 के अस्पताल में हफ्ते के गिने-चुने दिनों की बजाय प्रतिदिन ओपीडी चलाई जाएगी। इतना ही नहीं दोनों अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए सेक्टर- 48 के अस्पताल में जांच की सुविधा के साथ ही दवा की उपलब्धता में सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है।
बता दें कि अमर उजाला ने 23 नवंबर के अंक में करोड़ों का 100 बेड का अस्पताल चला नहीं, अब दो हजार बेड का नया बनाने की तैयारी शीर्षक के साथ विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी। जिसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासक ने 16 दिसंबर को जीएमसीएच और सेक्टर-48 अस्पताल का निरीक्षण कर स्थिति जांची थी। उस दौरान उन्होंने 48 के अस्पताल में नियमित ओपीडी चलाने के साथ ही सुविधाओं के विस्तार का निर्देश दिया था। वहीं, जीएमसीएच में स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करने की व्यवस्था करने को भी कहा था। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने दोनों ही जगहों पर व्यवस्था सुधार के लिए विस्तृत कार्य योजना बनाई है, जिसके अंतर्गत कई बदलाव किए जाएंगे। बता दें कि अमर उजाला ने सेक्टर-48 और जीएमसीएच की समस्याओं को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की हैं, जिसमें इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों की परेशानी, सेक्टर- 48 में जांच, दवा और ओपीडी की कमी के बारे में बताया गया है।
जीएमसीएच में होंगे ये बदलाव
-इमरजेंसी में भर्ती सभी मरीज जो प्रारंभिक उपचार के बाद स्थिर हो गए हैं, उन्हें 12 से 24 घंटे के भीतर उनके संबंधित वार्ड और स्पेशलिटी में ले जाया जाएगा।
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- प्रत्येक दिन सुबह 10 बजे तक इमरजेंसी से मरीजों को शिफ्ट करने/डिस्चार्ज करने के लिए उस क्षेत्र के एएनएस के साथ-साथ सभी स्पेशलिटी द्वारा सुबह का एक राउंड लिया जाएगा। इससे पहले कि वे अपने संबंधित ओपीडी से अपने वार्ड में नियमित रूप से भर्ती हों।
- लंबे समय तक देखभाल की आवश्यकता वाले किसी भी मरीज को भर्ती होने के 24 घंटे से अधिक समय तक इमरजेंसी में नहीं रखा जाएगा, सिवाय उन मामलों के जहां जीवन को खतरा हो या जहां मरीज को अभी भी लंबे समय तक आपातकालीन देखभाल की आवश्यकता हो।
- मरीजों को आपातकालीन से उस विशेषता के नियमित/संबंधित वार्डों में स्थानांतरित करने के लिए, यूनिट वार बिस्तर रिक्ति लागू नहीं होगी और खाली बिस्तरों की उपस्थिति में आपातकालीन रोगियों को प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा, भले ही वे उस विशेषता में किसी भी यूनिट से संबंधित हों।
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बता दें कि अमर उजाला ने 23 नवंबर के अंक में करोड़ों का 100 बेड का अस्पताल चला नहीं, अब दो हजार बेड का नया बनाने की तैयारी शीर्षक के साथ विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी। जिसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासक ने 16 दिसंबर को जीएमसीएच और सेक्टर-48 अस्पताल का निरीक्षण कर स्थिति जांची थी। उस दौरान उन्होंने 48 के अस्पताल में नियमित ओपीडी चलाने के साथ ही सुविधाओं के विस्तार का निर्देश दिया था। वहीं, जीएमसीएच में स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करने की व्यवस्था करने को भी कहा था। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने दोनों ही जगहों पर व्यवस्था सुधार के लिए विस्तृत कार्य योजना बनाई है, जिसके अंतर्गत कई बदलाव किए जाएंगे। बता दें कि अमर उजाला ने सेक्टर-48 और जीएमसीएच की समस्याओं को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की हैं, जिसमें इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों की परेशानी, सेक्टर- 48 में जांच, दवा और ओपीडी की कमी के बारे में बताया गया है।
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जीएमसीएच में होंगे ये बदलाव
-इमरजेंसी में भर्ती सभी मरीज जो प्रारंभिक उपचार के बाद स्थिर हो गए हैं, उन्हें 12 से 24 घंटे के भीतर उनके संबंधित वार्ड और स्पेशलिटी में ले जाया जाएगा।
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- प्रत्येक दिन सुबह 10 बजे तक इमरजेंसी से मरीजों को शिफ्ट करने/डिस्चार्ज करने के लिए उस क्षेत्र के एएनएस के साथ-साथ सभी स्पेशलिटी द्वारा सुबह का एक राउंड लिया जाएगा। इससे पहले कि वे अपने संबंधित ओपीडी से अपने वार्ड में नियमित रूप से भर्ती हों।
- लंबे समय तक देखभाल की आवश्यकता वाले किसी भी मरीज को भर्ती होने के 24 घंटे से अधिक समय तक इमरजेंसी में नहीं रखा जाएगा, सिवाय उन मामलों के जहां जीवन को खतरा हो या जहां मरीज को अभी भी लंबे समय तक आपातकालीन देखभाल की आवश्यकता हो।
- मरीजों को आपातकालीन से उस विशेषता के नियमित/संबंधित वार्डों में स्थानांतरित करने के लिए, यूनिट वार बिस्तर रिक्ति लागू नहीं होगी और खाली बिस्तरों की उपस्थिति में आपातकालीन रोगियों को प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा, भले ही वे उस विशेषता में किसी भी यूनिट से संबंधित हों।