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हैरत में डाल देते हैं ये खास किस्म के ताले
हरमनप्रीत कौर
Updated Sat, 04 Jan 2014 10:32 AM IST
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कुछ खास किस्म के ताले हैं जो आपको हैरत में डाल सकते हैं। प्राचीन हस्तकला के दीवानों के लिए तो ये खास आकर्षण रखते हैं। सेक्टर-22 स्थित खादी शोरूम में पंचधातु के ताले चार से पांच सदी पुरानी देश में प्रचलित यंत्रकला के नमूने हैं।
कछुआ ताला
पंचधातु से बना कछुए के आकार के इस ताले को उसका राज जाने बिना सिर्फ चाबी से नहीं खोला जा सकता। इसे तिजोरी के लिए डिजाइन किया गया है। चाबी लगाने के बाद कुछए की गर्दन घुमाने पर ही यह ताला खुलता है। इसकी कीमत दो हजार रुपये है।
बुद्धा लॉक
पंचधातु का यह ताला भगवान बुद्ध की प्रतिमा के रूप में है। इसे भी तिजोरी के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी चाबी अगर आपके पास है तो भी आपको चाबी कहां लगेगी यह राज जानना होगा।
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प्रतिमा के माथे पर तिलक है, जो तीसरी आंख का भ्रम देता है। इसी आंख में चाबी लगाने पर ताला खुलता है। इसकी कीमत 1800 रुपये है।
मछली ताला
मछली के आकार का यह ताला पंचधातु से बना है। इसकी कीमत एक हजार रुपये है। चाबी लगाने के बाद भी जब तक मछली की आंख न दबाओ यह ताला नहीं खुलेगा।
शेरमुखी ताला
इसकी कीमत दो हजार रुपये है। यह पंचधातु से बना है। इसमें सात लीवर हैं। इसलिए इसे काफी सुरक्षित माना जाता है। इसकी सिर्फ दो चाबियां होती हैं।
कोट्स
यह शोरूम 1960 में यहां खुला था। हस्तशिल्प का ज्यादातर सामान खुर्जा के कारीगरों द्वारा तैयार किया जाता है। कुछ सामान जयपुर से भी आता है। तालों के अलावा कई अन्य तरह की उपयोगी चीजें भी हैं जो चार सौ से पांच सौ साल पुरानी हस्तशिल्प कला पर आधारित हैं।
-इंदरजीत सिंह, यूनिट हेड, खादी शोरूम, सेक्टर-22
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कछुआ ताला
पंचधातु से बना कछुए के आकार के इस ताले को उसका राज जाने बिना सिर्फ चाबी से नहीं खोला जा सकता। इसे तिजोरी के लिए डिजाइन किया गया है। चाबी लगाने के बाद कुछए की गर्दन घुमाने पर ही यह ताला खुलता है। इसकी कीमत दो हजार रुपये है।
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बुद्धा लॉक
पंचधातु का यह ताला भगवान बुद्ध की प्रतिमा के रूप में है। इसे भी तिजोरी के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी चाबी अगर आपके पास है तो भी आपको चाबी कहां लगेगी यह राज जानना होगा।
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प्रतिमा के माथे पर तिलक है, जो तीसरी आंख का भ्रम देता है। इसी आंख में चाबी लगाने पर ताला खुलता है। इसकी कीमत 1800 रुपये है।
मछली ताला
मछली के आकार का यह ताला पंचधातु से बना है। इसकी कीमत एक हजार रुपये है। चाबी लगाने के बाद भी जब तक मछली की आंख न दबाओ यह ताला नहीं खुलेगा।
शेरमुखी ताला
इसकी कीमत दो हजार रुपये है। यह पंचधातु से बना है। इसमें सात लीवर हैं। इसलिए इसे काफी सुरक्षित माना जाता है। इसकी सिर्फ दो चाबियां होती हैं।
कोट्स
यह शोरूम 1960 में यहां खुला था। हस्तशिल्प का ज्यादातर सामान खुर्जा के कारीगरों द्वारा तैयार किया जाता है। कुछ सामान जयपुर से भी आता है। तालों के अलावा कई अन्य तरह की उपयोगी चीजें भी हैं जो चार सौ से पांच सौ साल पुरानी हस्तशिल्प कला पर आधारित हैं।
-इंदरजीत सिंह, यूनिट हेड, खादी शोरूम, सेक्टर-22