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मिलिए ट्राईसिटी के ऐसे 'गण' से जिन्होंने 'गणतंत्र' को किया सार्थक
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 26 Jan 2016 11:49 AM IST
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गणतंत्र यानि गण जब तंत्र को सक्रिय कर दे। ये हैं ट्राइसिटी के ऐसे ही
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हीरो जिन्होंने शहर के तंत्र को झकझोरा। आगे बढ़कर कई इबादतें गढ़ी। ऐसे ही
लोगों की कहानी
हाईवे से हटवाए 50 फीसदी अवैध ठेके
कई बार हाईवे पर होने वाले जानलेवा हादसों का कारण शराब पीकर वाहन चलाना होता है। नेशनल हाईवे के किनारे सैकड़ों ठेके नजर आते हैं। सड़क सुरक्षा के लिए काम करने वाली एनजीओ अराइव सेफ के अध्यक्ष हरमन सिद्धू ने राष्ट्रीय राजमार्गों को ठेकों से आजाद कराने का बीड़ा उठा लिया।
इसके लिए उन्होंने मार्च 2012 में काम करना शुरू कर दिया। सिद्धू ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी ली। इससे मिली जानकारी और भी चौंकाने वाली थी। एनएच-1 पानीपत से जालंधर 291 किलोमीटर का है। अकेले इस मार्ग पर 185 शराब के ठेके अवैध रूप से चल रहे थे।
हरमन ने 2012 दिसंबर में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में राजमार्गों के किनारों से ठेके हटाने के लिए अपील दायर की। इस याचिका पर सुनवाई के बाद 2014 में कोर्ट का फैसला आया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा किराजमार्गों से लगते ठेके तय दूरी पर होने चाहिए और वह इस तरह खुलने चाहिए की वह आसानी से लोगों की पहुंच में न हो। हरमन सिद्धू ने बताया कि अब तक करीब 50 फीसदी ठेके बंद हो गए हैं या फिर हाईवे से दूर हो गए।
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कुछ ठेके वालों ने साइन बोर्ड हटाया है और कैश काउंटर घुमाकर दूसरी तरफ कर दिया है, लेकिन लड़ाई अब भी जारी है। कोर्ट के आदेशों की ठीक तरह से तामील नहीं हुई, इसके लिए अवमानना की एक याचिका दाखिल की गई है। उनका कहना है कि कई बार उनको शराब माफिया की तरफ केस वापस लेने के लिए धमकियां भी मिलीं, लेकिन वह न तो किसी से डरे और न ही रुके।
ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर रहती है इनकी नजर
मोहाली वर्ल्ड क्लास सिटी में एक पुलिस अधिकारी ऐसे भी हैं जो लोगों को ट्रैफिक नियम सिखाने के लिए अपनी नौकरी तक दांव पर लगा देते हैं। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर उनके लिए चाहे कोई जज का बेटा हो या चपरासी का सब एक समान हैं। इतना ही नहीं नेताओं की लाल बत्ती उतारने और पुुलिस वालों की गाड़ियों के चलान काटने में भी पीछे नहीं हटते हैं। यहां बात हो रही है ट्रैफिक इंचार्ज गुरमीत सिंह सोहल की। उन्होंने शहर में लोगों को ट्रैफिक नियम सिखाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रखी है।
वह अकसर शहर के उन स्थानों पर नाका लगाते हैं, जहां पर ट्रैफिक नियम अधिक टूटने की स्थिति बनती है। इस दौरान जहां कुछ समय पहले उन्होंने कई सरकारी अधिकारियों के चालान काटे। वहीं, नेताओं की बत्तियां भी उतारी है। इस दौरान वह किस तरह की कोई सिफारिश भी नहीं सुनते है। वहीं, उनकी छवि भी काफी साफ सुथरी है। वह हमेशा ही लोगों को नसीहत देते है कि सड़क पर निकलते समय ट्रैफिक नियमों की पालना करो। इससे जहां वह खुद भी सुरक्षित महसूस करते हैं, वहीं दूसरों का जीवन भी सुरक्षित रहेगा।
अमेरिका की ट्रैफिक व्यवस्था देख चंडीगढ़ को सिखाया
बेटों से अमेरिका की ट्रैफिक व्यवस्था के बारे में सुनकर और यहां लोगों को परेशानी में देखकर चरणजीत सिंह ग्रेवाल ने चंडीगढ़ में मार्शल बनने की ठानी। इसके लिए उन्होंने तीन महीने का अमेरिका का दौरा भी किया। 1994 में एयरफोर्स से रिटायर्ड पायलट चरणजीत सिंह ग्रेवाल ने 2004 में ट्रैफिक पुलिस से आम लोगों की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर ट्रैफिक एसएसपी अभिताभ ढिल्लन की अगुवाई में ट्रैफिक मार्शल के तौर पर शुरूआत की।
उस समय उनकी चार लोगों की टीम थी और आज आठ महिला ट्रैफिक मार्शल समेत उनकी 80 लोगों की टीम बन चुकी है। चरणजीत सिंह ग्रेवाल लोगों की सुविधा और सुरक्षा के लिए 12 साल से ट्रैफिक पुलिस जुड़े हैं। इस दौरान वह अमेरिका के ट्रैफिक से संबंधित वीडियो देखकर नए-नए आइडियाज यहां स्कूली बच्चों और लोगों से शेयर कर उन्हें जागरूक करते हैं। इतने सालों के बेदाग कार्यकाल को देखते हुए यूटी प्रशासन ने उन्हें फील्ड ऑफ पब्लिक सर्विस अवार्ड से सम्मानित करने की घोषणा की है।
मां को बेटे से मिलाने के लिए रात-दिन एक किया
नवंबर 2015 में परिवार का इकलौता बेटा अचानक घर के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों ने सेक्टर-3 थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने भी अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए 20 दिन की कड़ी मशक्कत के बाद बच्चे को यूपी से ढूंढ निकाला।
पुलिस ने एक मां को उसके बच्चे से मिलाकर गणतंत्र की परिभाषा को सार्थक किया। कैंबवाला में रहने वाले पति-पत्नी दिन में काम करते हैं। जब उनका तेरह साल का बेटा नीरज घर से लापता हो गया तो उसकी मां ने खाना-पीना तक छोड़ दिया था। पुलिस ने इस मामले में बड़ी ही सूझबूझ और तत्परता दिखाई और नीरज को यूपी के बाराबंकी से ढूंढ निकाला।
महिला कांस्टेबल ने जान पर खेलकर पकड़ा स्नैचर
आमतौर पर बड़े से बड़ा मुश्किल काम पुलिस की ड्यूटी का हिस्सा मान लिया जाता है, लेकिन कई बार ऐसे लोग मिसाल बन जाते हैं जो ड्यूटी से हटकर कुछ ऐसा कर जाते हैं, जो याद किया जाता रहे। कुछ ऐसा ही कर दिखाया था चंडीगढ़ पुलिस की ट्रैफिक महिला कांस्टेबल संतोष कुमारी ने। 26 जून 2015 को वह ट्रांसपोर्ट लाइट प्वाइंट पर तैनात थीं।
लंच टाइम के दौरान जैसे ही उन्होंने बीट बॉक्स के पास जाकर टिफिन खोला, वैसे ही रोती हुई एक महिला वहां आ पहुंची। पंचकूला निवासी महिला ने बताया कि एक स्नैचर उसका पर्स छीनकर जंगल की ओर भाग निकला है। महिला कांस्टेबल संतोष कुमारी ने न आव देखा न ताव तुरंत स्नैचर के पीछे भागीं।
करीब डेढ़ किलोमीटर वह जंगल तक उसके पीछे भागीं। जंगल में आरोपी कपड़े उतारकर एक खड्डे में छिप गया, लेकिन महिला कांस्टेबल ने अपने साहस और बुद्धिमता का परिचय देते हुए उसे धर दबोचा। इसके बाद महिला कांस्टेबल संतोष कुमारी को आईजी आरपी उपाध्याय और डीआईजी एएस चीमा ने पुलिस के एक कार्यक्रम में सम्मानित भी किया।
सट्टेबाजों को खुद पकड़ा
गण को तंत्र के साथ जोड़ने में पूर्व मेयर पूनम शर्मा ने अहम भूमिका निभाई है। बीते साल पूनम शर्मा ने मेयर रहते हुए सट्टेबाजी के खिलाफ मोर्चा खोला और सोए पुलिस तंत्र को जगाया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को मोर्चा खोलने से पहले चेतावनी भी दी थी, लेकिन पुलिस की नींद नहीं टूटी और पूनम शर्मा ने पिछले साल 22 जुलाई को सेक्टर-26 मंडी में सरेआम चल रहे सट्टे का भंडाफोड़ किया और एक सट्टेबाज को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया था।
इसके बाद प्रशासन भी हरकत में आया और सलाहकार विजय देव ने आदेश जारी किए कि अगर किसी के इलाके में भविष्य में कहीं भी सट्टा और नशा बिकते हुए पाया गया तो संबंधित थाना और चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया जाएगा। इसके बाद पुलिस हरकत में आई, लेकिन पूनम शर्मा की नजर सट्टेबाजों और नशा बेचने वालों पर रही। शहरवासी भी पुलिस की जगह मेयर को ही अपने एरिया में चल रहे सट्टेबाजी और नशे का कारोबार करने वालों की जानकारी देने लगे।
जब पुलिस की कार्रवाई ढीली पड़ी तो पूनम शर्मा ने अपने कार्यकाल में नागरिक कर्तव्य निभाते हुए मलोया में सात दिसंबर को एक घर में छापा मारा जहां सट्टा चल रहा था। मेयर ने सट्टेबाजों को पुलिस के आने तक मकान में बंद रखा। पूनम शर्मा ने अपराध के खिलाफ ही नहीं बल्कि समाजसेवा के काम में भी आगे रहीं। जिसे गणतंत्र में याद किए बिना नहीं रहा जा सकता है।
मानवता का धर्म निभाया
अपने मेयर के शुरुआती कार्यकाल में मनीमाजरा में रैबीज से पीड़ित सादिया के इलाज के दौरान वह खुद पीजीआई मे मौजूद रहीं, जहां उसकी मौत हो गई थी। शर्मा ने एक पुरुष से भी ज्यादा हौसला दिखाते हुए चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद को हादसे के बाद जंडपुरा के पास से उठाकर जिप्सी में इलाज के लिए पीजीआई लेकर आईं। जबकि उनके खुद के कपड़े चीफ इंजीनियर के सिर से निकल रहे खून से लथपथ हो गए थे। पूर्व मेयर पूनम शर्मा का कहना है कि बेशक वह मेयर नहीं है लेकिन नशे और सट्टेबाजों के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
आम आदमी और अफसरशाही के बीच दूरियों को किया कम
चंडीगढ़ शहर के लोगों में वाट्सअप मैन से उनकी पहचान बन चुकी है। दिक्कत में एक मैसेज करने के बाद उसका तुरंत समाधान हो जाता है। सालों बाद यूटी प्रशासन में एक दबंग सीनियर आईएएस अधिकारी ने शहर के लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है। दफ्तरों तक सीमित रहने वाली अफसरशाही और आम आदमी के बीच की दूरी को कम करने का श्रेय सलाहकार विजय कुमार देव को जाता है।
सिर्फ एक साल के कार्यकाल में उन्होंने शहर में सरकारी बाबुओं की कार्यप्रणाली को बदलने की कोशिश की है। कभी दफ्तरों के चक्कर काटने वाली आम जनता अब घर बैठे ऑनलाइन एस्टेट ऑफिस और दूसरे विभागों में अपने काम का स्टेटस पता कर सकते हैं। देव के वर्किंग स्टाइल का हर शहरवासी कायल है।
शहर के हर सेक्टर और गांवों में लोगों के बीच जाकर इन्होंने गण को तंत्र तक पहुंचाने की कोशिश की है। फ्रांस के साथ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने से लेकर कई सालों से ठंडे बस्ते में पड़े मेट्रो प्रोजेक्ट को देव ने ही आगे बढ़ाया है। आम आदमी द्वारा भेजे गए संदेश का भी देव न सिर्फ जवाब देते हैं बल्कि अधिकारियों से जवाब भी तलब करते हैं।
हाईवे से हटवाए 50 फीसदी अवैध ठेके
कई बार हाईवे पर होने वाले जानलेवा हादसों का कारण शराब पीकर वाहन चलाना होता है। नेशनल हाईवे के किनारे सैकड़ों ठेके नजर आते हैं। सड़क सुरक्षा के लिए काम करने वाली एनजीओ अराइव सेफ के अध्यक्ष हरमन सिद्धू ने राष्ट्रीय राजमार्गों को ठेकों से आजाद कराने का बीड़ा उठा लिया।
इसके लिए उन्होंने मार्च 2012 में काम करना शुरू कर दिया। सिद्धू ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी ली। इससे मिली जानकारी और भी चौंकाने वाली थी। एनएच-1 पानीपत से जालंधर 291 किलोमीटर का है। अकेले इस मार्ग पर 185 शराब के ठेके अवैध रूप से चल रहे थे।
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हरमन ने 2012 दिसंबर में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में राजमार्गों के किनारों से ठेके हटाने के लिए अपील दायर की। इस याचिका पर सुनवाई के बाद 2014 में कोर्ट का फैसला आया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा किराजमार्गों से लगते ठेके तय दूरी पर होने चाहिए और वह इस तरह खुलने चाहिए की वह आसानी से लोगों की पहुंच में न हो। हरमन सिद्धू ने बताया कि अब तक करीब 50 फीसदी ठेके बंद हो गए हैं या फिर हाईवे से दूर हो गए।
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कुछ ठेके वालों ने साइन बोर्ड हटाया है और कैश काउंटर घुमाकर दूसरी तरफ कर दिया है, लेकिन लड़ाई अब भी जारी है। कोर्ट के आदेशों की ठीक तरह से तामील नहीं हुई, इसके लिए अवमानना की एक याचिका दाखिल की गई है। उनका कहना है कि कई बार उनको शराब माफिया की तरफ केस वापस लेने के लिए धमकियां भी मिलीं, लेकिन वह न तो किसी से डरे और न ही रुके।
ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर रहती है इनकी नजर
मोहाली वर्ल्ड क्लास सिटी में एक पुलिस अधिकारी ऐसे भी हैं जो लोगों को ट्रैफिक नियम सिखाने के लिए अपनी नौकरी तक दांव पर लगा देते हैं। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर उनके लिए चाहे कोई जज का बेटा हो या चपरासी का सब एक समान हैं। इतना ही नहीं नेताओं की लाल बत्ती उतारने और पुुलिस वालों की गाड़ियों के चलान काटने में भी पीछे नहीं हटते हैं। यहां बात हो रही है ट्रैफिक इंचार्ज गुरमीत सिंह सोहल की। उन्होंने शहर में लोगों को ट्रैफिक नियम सिखाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रखी है।
वह अकसर शहर के उन स्थानों पर नाका लगाते हैं, जहां पर ट्रैफिक नियम अधिक टूटने की स्थिति बनती है। इस दौरान जहां कुछ समय पहले उन्होंने कई सरकारी अधिकारियों के चालान काटे। वहीं, नेताओं की बत्तियां भी उतारी है। इस दौरान वह किस तरह की कोई सिफारिश भी नहीं सुनते है। वहीं, उनकी छवि भी काफी साफ सुथरी है। वह हमेशा ही लोगों को नसीहत देते है कि सड़क पर निकलते समय ट्रैफिक नियमों की पालना करो। इससे जहां वह खुद भी सुरक्षित महसूस करते हैं, वहीं दूसरों का जीवन भी सुरक्षित रहेगा।
अमेरिका की ट्रैफिक व्यवस्था देख चंडीगढ़ को सिखाया
बेटों से अमेरिका की ट्रैफिक व्यवस्था के बारे में सुनकर और यहां लोगों को परेशानी में देखकर चरणजीत सिंह ग्रेवाल ने चंडीगढ़ में मार्शल बनने की ठानी। इसके लिए उन्होंने तीन महीने का अमेरिका का दौरा भी किया। 1994 में एयरफोर्स से रिटायर्ड पायलट चरणजीत सिंह ग्रेवाल ने 2004 में ट्रैफिक पुलिस से आम लोगों की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर ट्रैफिक एसएसपी अभिताभ ढिल्लन की अगुवाई में ट्रैफिक मार्शल के तौर पर शुरूआत की।
उस समय उनकी चार लोगों की टीम थी और आज आठ महिला ट्रैफिक मार्शल समेत उनकी 80 लोगों की टीम बन चुकी है। चरणजीत सिंह ग्रेवाल लोगों की सुविधा और सुरक्षा के लिए 12 साल से ट्रैफिक पुलिस जुड़े हैं। इस दौरान वह अमेरिका के ट्रैफिक से संबंधित वीडियो देखकर नए-नए आइडियाज यहां स्कूली बच्चों और लोगों से शेयर कर उन्हें जागरूक करते हैं। इतने सालों के बेदाग कार्यकाल को देखते हुए यूटी प्रशासन ने उन्हें फील्ड ऑफ पब्लिक सर्विस अवार्ड से सम्मानित करने की घोषणा की है।
मां को बेटे से मिलाने के लिए रात-दिन एक किया
नवंबर 2015 में परिवार का इकलौता बेटा अचानक घर के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों ने सेक्टर-3 थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने भी अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए 20 दिन की कड़ी मशक्कत के बाद बच्चे को यूपी से ढूंढ निकाला।
पुलिस ने एक मां को उसके बच्चे से मिलाकर गणतंत्र की परिभाषा को सार्थक किया। कैंबवाला में रहने वाले पति-पत्नी दिन में काम करते हैं। जब उनका तेरह साल का बेटा नीरज घर से लापता हो गया तो उसकी मां ने खाना-पीना तक छोड़ दिया था। पुलिस ने इस मामले में बड़ी ही सूझबूझ और तत्परता दिखाई और नीरज को यूपी के बाराबंकी से ढूंढ निकाला।
महिला कांस्टेबल ने जान पर खेलकर पकड़ा स्नैचर
आमतौर पर बड़े से बड़ा मुश्किल काम पुलिस की ड्यूटी का हिस्सा मान लिया जाता है, लेकिन कई बार ऐसे लोग मिसाल बन जाते हैं जो ड्यूटी से हटकर कुछ ऐसा कर जाते हैं, जो याद किया जाता रहे। कुछ ऐसा ही कर दिखाया था चंडीगढ़ पुलिस की ट्रैफिक महिला कांस्टेबल संतोष कुमारी ने। 26 जून 2015 को वह ट्रांसपोर्ट लाइट प्वाइंट पर तैनात थीं।
लंच टाइम के दौरान जैसे ही उन्होंने बीट बॉक्स के पास जाकर टिफिन खोला, वैसे ही रोती हुई एक महिला वहां आ पहुंची। पंचकूला निवासी महिला ने बताया कि एक स्नैचर उसका पर्स छीनकर जंगल की ओर भाग निकला है। महिला कांस्टेबल संतोष कुमारी ने न आव देखा न ताव तुरंत स्नैचर के पीछे भागीं।
करीब डेढ़ किलोमीटर वह जंगल तक उसके पीछे भागीं। जंगल में आरोपी कपड़े उतारकर एक खड्डे में छिप गया, लेकिन महिला कांस्टेबल ने अपने साहस और बुद्धिमता का परिचय देते हुए उसे धर दबोचा। इसके बाद महिला कांस्टेबल संतोष कुमारी को आईजी आरपी उपाध्याय और डीआईजी एएस चीमा ने पुलिस के एक कार्यक्रम में सम्मानित भी किया।
सट्टेबाजों को खुद पकड़ा
गण को तंत्र के साथ जोड़ने में पूर्व मेयर पूनम शर्मा ने अहम भूमिका निभाई है। बीते साल पूनम शर्मा ने मेयर रहते हुए सट्टेबाजी के खिलाफ मोर्चा खोला और सोए पुलिस तंत्र को जगाया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को मोर्चा खोलने से पहले चेतावनी भी दी थी, लेकिन पुलिस की नींद नहीं टूटी और पूनम शर्मा ने पिछले साल 22 जुलाई को सेक्टर-26 मंडी में सरेआम चल रहे सट्टे का भंडाफोड़ किया और एक सट्टेबाज को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया था।
इसके बाद प्रशासन भी हरकत में आया और सलाहकार विजय देव ने आदेश जारी किए कि अगर किसी के इलाके में भविष्य में कहीं भी सट्टा और नशा बिकते हुए पाया गया तो संबंधित थाना और चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया जाएगा। इसके बाद पुलिस हरकत में आई, लेकिन पूनम शर्मा की नजर सट्टेबाजों और नशा बेचने वालों पर रही। शहरवासी भी पुलिस की जगह मेयर को ही अपने एरिया में चल रहे सट्टेबाजी और नशे का कारोबार करने वालों की जानकारी देने लगे।
जब पुलिस की कार्रवाई ढीली पड़ी तो पूनम शर्मा ने अपने कार्यकाल में नागरिक कर्तव्य निभाते हुए मलोया में सात दिसंबर को एक घर में छापा मारा जहां सट्टा चल रहा था। मेयर ने सट्टेबाजों को पुलिस के आने तक मकान में बंद रखा। पूनम शर्मा ने अपराध के खिलाफ ही नहीं बल्कि समाजसेवा के काम में भी आगे रहीं। जिसे गणतंत्र में याद किए बिना नहीं रहा जा सकता है।
मानवता का धर्म निभाया
अपने मेयर के शुरुआती कार्यकाल में मनीमाजरा में रैबीज से पीड़ित सादिया के इलाज के दौरान वह खुद पीजीआई मे मौजूद रहीं, जहां उसकी मौत हो गई थी। शर्मा ने एक पुरुष से भी ज्यादा हौसला दिखाते हुए चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद को हादसे के बाद जंडपुरा के पास से उठाकर जिप्सी में इलाज के लिए पीजीआई लेकर आईं। जबकि उनके खुद के कपड़े चीफ इंजीनियर के सिर से निकल रहे खून से लथपथ हो गए थे। पूर्व मेयर पूनम शर्मा का कहना है कि बेशक वह मेयर नहीं है लेकिन नशे और सट्टेबाजों के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
आम आदमी और अफसरशाही के बीच दूरियों को किया कम
चंडीगढ़ शहर के लोगों में वाट्सअप मैन से उनकी पहचान बन चुकी है। दिक्कत में एक मैसेज करने के बाद उसका तुरंत समाधान हो जाता है। सालों बाद यूटी प्रशासन में एक दबंग सीनियर आईएएस अधिकारी ने शहर के लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है। दफ्तरों तक सीमित रहने वाली अफसरशाही और आम आदमी के बीच की दूरी को कम करने का श्रेय सलाहकार विजय कुमार देव को जाता है।
सिर्फ एक साल के कार्यकाल में उन्होंने शहर में सरकारी बाबुओं की कार्यप्रणाली को बदलने की कोशिश की है। कभी दफ्तरों के चक्कर काटने वाली आम जनता अब घर बैठे ऑनलाइन एस्टेट ऑफिस और दूसरे विभागों में अपने काम का स्टेटस पता कर सकते हैं। देव के वर्किंग स्टाइल का हर शहरवासी कायल है।
शहर के हर सेक्टर और गांवों में लोगों के बीच जाकर इन्होंने गण को तंत्र तक पहुंचाने की कोशिश की है। फ्रांस के साथ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने से लेकर कई सालों से ठंडे बस्ते में पड़े मेट्रो प्रोजेक्ट को देव ने ही आगे बढ़ाया है। आम आदमी द्वारा भेजे गए संदेश का भी देव न सिर्फ जवाब देते हैं बल्कि अधिकारियों से जवाब भी तलब करते हैं।