ऑपरेशन ब्लू स्टार के 30 साल, जानिए पूरी कहानी
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पंजाब के गुरु नगरी अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार यानी सिखों के सबसे बड़े धार्मिक स्थल स्वर्ण मंदिर पर सैन्य कार्रवाई की कहानी जानिए।
13 अप्रैल 1978 - अकालियों और निरंकारियों के बीच हिंसक झड़प में 13 अकाली कार्यकर्ताओं की मौत। इसके विरोध में सिख धर्म प्रचार संस्था के प्रमुख जरनैल सिंह भिंडरावाला की अगुवाई में उग्र प्रदर्शन हुए। इसी घटना को पंजाब में चरमपंथ की शुरुआत माना जाता है।
1981 में जालंधर, तरनतारन, अमृतसर, फरीदकोट और गुरदासपुर में हिंसक घटनाएं।
सितंबर 1981 - अमृतसर के मेहता चौक गुरुद्वारे के बाहर भिंडरावाला की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस फायरिंग में 11 लोगों की मौत।
5 जून 1984 को स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई शुरू
अप्रैल 1983 - पंजाब पुलिस के तत्कालीन उपमहानिरीक्षक एएस अटवाल की श्री हरमंदिर साहिब परिसर में दिनदहाड़े गोलियां मारकर हत्या।
3 जून 1984 - पंजाब में कर्फ्यू लगा।
5 जून 1984 - मेजर जनरल कुलदीप सिंह बराड़ के नेतृत्व में आर्मी का आपरेशन ब्लूस्टार शुरू।
6 जून 1984 - आपरेशन के तहत तीर्थ से आतंकियों को पूरी तरह निकाला गया। इसकी पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई और कई सिख जवानों ने अपनी इकाइयां छोड़ दीं।
सेना के मुताबिक आपरेशन ब्लूस्टार में करीब 400 सिविलियन और 136 फौजी मारे गए। इस दौरान 200 लोग घायल हुए। हालांकि गैर सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस दौरान 5000 से ज्यादा सिविलियन मारे गए।
1 जून को पैरामिलिट्री फोर्स ने घेरा स्वर्ण मंदिर
1 जून 1984 को अर्द्धसैनिक बलों ने श्री हरमंदिर साहिब परिसर के आसपास पोजीशन लेकर फायरिंग शुरू कर दी थी। इसमें कई आतंकी मारे गए। फायरिंग 2 जून को भी जारी रही।
3 जून को पूरे पंजाब में कर्फ्यू लगा दिया गया और ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत कार्रवाई शुरू हो गई। प्रदेश में रेल, सड़क और वायु यातायात रोक दिया गया और दरबार साहिब परिसर की फोन-वाटर सप्लाई लाइनें काट दी गईं। रात को सैन्य कार्रवाई शुरू हुई। उस दौरान जरनैल सिंह भिंडरांवाला सहित उनके साथी जनरल सुबेग सिंह और अमरीक सिंह इस कार्रवाई का जवाब देते रहे।
7 जून को परिसर पर सेना का पूरा नियंत्रण
सैन्य कार्रवाई के समय समय शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लौंगोवाल सहित जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा, बलवंत सिंह रामूवालिया, भान सिंह, अबिनाशी सिंह आदि परिसर स्थित एसजीपीसी कार्यालय में उपस्थित थे।
स्व. टोहड़ा से संबंधित इस पुस्तक के अनुसार ऑपरेशन शुरू करते वक्त सेना या केंद्र सरकार ने अकाली नेताओं से कोई संपर्क नहीं साधा। अगर ऐसा किया होता तो सैन्य कार्रवाई टल सकती थी। तीन और चार जून की रात को सेना व आतंकियों के बीच जबरदस्त गोलीबारी जारी रही। 4 जून को बमबारी शुरू हुई।
ले. जनरल के. सुंदरजी और रंजीत सिंह दयाल की अगुवाई वाले इस ऑपरेशन के तहत 5 जून को मेजर जनरल केएस बराड़ के नेतृत्व में शुरू हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान जहां भिंडरावाला, अमरीक सिंह, सुबेग सिंह आदि चरमपंथी मारे गए, वहीं लौंगोवाल और टोहड़ा को बंदी बनाकर हवाई जहाज से अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। अन्य अकाली नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया।
श्री हरमंदिर साहिब परिसर स्थित श्री अकाल तख्त साहिब सहित इसके आसपास की विभिन्न इमारतों को भारी क्षति पहुंची। सात जून को परिसर पर सेना का पूरा नियंत्रण हो गया था।
जानकारी के अनुसार इस दौरान कई सिविलियंस की भी जान गई, जो 3 जून को गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर दरबार साहिब में माथा टेकने आए थे, लेकिन सैन्य कार्रवाई से पहले बाहर नहीं निकल पाए।