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Hindi News ›   Chandigarh ›   Story of elections When there was tension on border, Congress lost elections in Rohtak

कहानी चुनाव की: ...सरहद पर जब हुआ तनाव कांग्रेस हारी रोहतक में चुनाव; राष्ट्रवाद की लहर के बीच BJP को मिली जीत

Fri, 15 Mar 2024 10:53 AM IST
शाहरुख खान विजेंद्र कौशिक, अमर उजाला, रोहतक
विजेंद्र कौशिक, अमर उजाला, रोहतक Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 15 Mar 2024 10:53 AM IST
सार

जब-जब सरहद पर तनाव हुआ रोहतक में कांग्रेस चुनाव हार गई। राष्ट्रवाद की लहर के बीच भाजपा को जीत मिली। हुड्डा पिता-पुत्र जीत तो ताऊ देवीलाल की हार की हैट्रिक लग चुकी है। 1962, 1971, 1999 और 2019 में मजबूत गढ़ में कांग्रेस को मात मिल चुकी है।

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Story of elections When there was tension on border, Congress lost elections in Rohtak
lok sabha elections - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान या चीन बॉर्डर पर जब भी तनाव हुआ, तभी कांग्रेस रोहतक में लोकसभा चुनाव हारी है। दो बार जनसंघ, एक बार भाजपा-इनेलो गठबंधन व एक बार भाजपा ने कांग्रेस को मात दी। अब 2024 में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। 
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भाजपा मोदी की गारंटी के नाम पर वोट मांग रही है तो कांग्रेस 10 साल पुरानी रोहतक की चौधर को याद करवा रही है। पार्टी नेता कहते हैं कि चंडीगढ़ का रास्ता वाया दिल्ली होकर जाता है। प्रदेश ही नहीं, देश में भी रोहतक लोकसभा सीट काफी अहम है। 
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देशवाली बेल्ट की सीट पर जाट समुदाय का दबदबा रहा है। 1952 व 1957 में लगातार दो बार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पिता चौधरी रणबीर हुड्डा सांसद बने, लेकिन 1962 में भारत-चीन युद्ध के समय हुए लोकसभा चुनाव में रणबीर हुड्डा जनसंघ के लहरी सिंह से चुनाव हार गए। 
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पाकिस्तान के साथ 1971 में हुई लड़ाई के समय कांग्रेस के रणधीर सिंह भारतीय जनसंघ के मुख्तार सिंह से हार गए। कारगिल की लड़ाई के समय 1999 में भाजपा-इनेलो गठबंधन के प्रत्याशी कैप्टन इंद्रसिंह ने कांग्रेस के भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विजय रथ को रोक दिया था जबकि ताऊ देवीलाल को हुड्डा लगातार तीन बार रोहतक से हरा चुके थे। 

इतना ही नहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पुलवामा अटैक हुआ, जिसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की। जीत की हैट्रिक लगा चुके कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा भाजपा के डॉक्टर अरविंद शर्मा से हार गए थे।
 

हुड्डा पिता-पुत्र के नाम जीत की हैट्रिक
रोहतक लोकसभा सीट से लगातार तीन जीत हासिल करने का रिकॉर्ड भूपेंद्र सिंह हुड्डा व उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा के नाम दर्ज है जबकि ताऊ देवीलाल की लगातार तीन बार हार हो चुकी है। 1991, 1996 व 1998 में भूपेंद्र हुड्डा ने ताऊ देवीलाल को हराकर जीत हासिल की थी जबकि ताऊ देवीलाल 1991 से पहले देश के उप प्रधानमंत्री रह चुके थे।

वहीं, दीपेंद्र हुड्डा ने 2004, 2009 व 2014 में जीत हासिल की थी। उन्होंने पहले चुनाव में भाजपा के कैप्टन अभिमन्यु, दूसरे में इनेलो के नफे सिंह राठी व 2014 में भाजपा के ओमप्रकाश धनखड़ को हराया था।

रात तीन बजे 300 वोटों से जीते हुड्डा
1998 के लोकसभा चुनाव में भूपेंद्र सिंह हुड्डा व ताऊ देवीलाल के बीच कड़ी टक्कर हुई। ताऊ देवीलाल पिछली दो हार का बदला लेना चाहते थे, जबकि हुड्डा का भी जाट नेता के तौर पर कद बढ़ चुका था। रात तीन बजे तक दो बार मतगणना हुई। मात्र 300 वोट से हुड्डा जीत सके थे।
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