नेपाल भूकंप ने 'हिमालय विजय' अभियान पर लगा दिया ब्रेक
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‘हम 17 हजार 500 फुट की ऊंचाई पर पहुंच चुके थे। छह दिन और सब कुछ ठीक रहता तो एवरेस्ट फतेह कर लेते।’ यह कहना है सीवन की लाड़ली और पर्वतारोही सीमा गोस्वामी का।
गौरतलब है कि सीमा माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए निकली थी। लेकिन नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप ने उनके अभियान पर ब्रेक लगा दी। मंगलवार को अपने घर लौटी सीमा ने ‘अमर उजाला’ ऑफिस पहुंचकर अपने अनुभव सांझा किए। सीमा ने कहा कि वह दोबारा प्रयास करेंगी। सीमा ने अपना संकल्प दोहराया और कहा कि ‘अब नहीं तो फिर सही’। मंजिल हासिल करके रहेंगी।
हम भूकंप के बाद दो दिन बर्फ में ही रहे...
25 अप्रैल को हम सभी प्रैक्टिस के बाद अपने टेंट में लौटे ही थे कि अचानक सब कुछ हिलने लगा। पहले तो कुछ सामान्य सा दिखा। लेकिन जब पेंडुलम की तरह से ग्लेशियर हिलने लगा तो पता चला कि भूकंप आ गया। हम सभी टेंट में ही दुबके रहे। यह भूकंप 11 बजकर 50 मिनट पर आया था। 12 बजे तक सब कुछ तबाह हो गया। हम गर्दन से ऊपर तक बर्फ में दबे थे।
जोर लगाकर टेंट उठाया तो बाहर निकले। बाहर निकले तो देखा कि सब कुछ सफेद हो चुका था। वहां 800 से ज्यादा लोग थे। हमने कुछ दबे लोगों को बाहर निकाला। मेरी आंखों के सामने 50 से ज्यादा लोगों की जान गई। इसके बाद मौसम खराब रहा। हम दो दिन वहीं बर्फ में रहे।
इसके बाद में हमारा 5 लोगों का ग्रुप दो शेरपाओं के साथ 160 किलोमीटर तक पैदल चलकर लुकला पहुंचा। यहां अपने पर्वतारोहण के लिए पूरी किट एवं अन्य उपकरणों के सामान का इंतजार किया।
उसके पहुंचने पर सामान कंपनी को जमा करवाने के बाद इंडियन आर्मी के हेलीकॉप्टर से काठमांडू पहुंचे। यहां एक होटल में रुके। इस दौरान लुकमा व काठमांडू में भारतीय सेना ने राहत अभियान चलाया था। इसे देखकर लगा ही नहीं कि मैं दूसरे देश में हूं।
परिवार के लोग मुझे मिले तो लगा की जहान मिल गया
भारतीय सेना ने दबे लोगों को निकाला। डॉक्टरों ने इलाज किया। राहत सामग्री बांटी। कुछ लोग भारत के प्रयासों से खुश भी नहीं हैं। लेकिन जिन लोगों को सहायता मिल रही है, वे भारत के प्रति शुक्रगुजार हैं। मैंने वहां देखा कि भारत के अलावा कई अन्य देशों की राहत टीमें भी जुटी हुई हैं। यह एक बड़ी त्रासदी थी। जिसमें मेरी जान बची। मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं।
सीमा ने बताया कि तीन दिन तक काठमांडू में रुके रहे। इसके बाद भारतीय दूतावास से सूचना के बाद भारतीय एयरफोर्स के विमान से मंगलवार सुबह 7 बजे चंडीगढ़ पहुंचे। यहां मेरे पापा ओमप्रकाश सहित परिवार के लोग मुझे मिले तो लगा की अपना जहान मिल गया। इसके बाद चंडीगढ़ में मुझे शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने आशीर्वाद दिया।
साथ ही सीएम ने मुझे अपने लक्ष्य के लिए प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया है। यह दूसरे जन्म लेने जैसा है। मैं अपने लक्ष्य पर फिर निकलूंगी। इसे हासिल करूंगी।
ट्रैकिंग का सामान अब भी वहां फंसा: सीमा ने बताया कि उसका करीब 3 लाख रुपये से ज्यादा का सामान फंसा है। जिसमें पर्वतारोहण में प्रयोग किए जाने वाले सभी प्रकार के उपकरण, ड्रेस एवं अन्य शामिल है। जिसे कंपनी में जमा करवा गया था। उम्मीद है इसमें से कुछ सामान मिल जाएगा।
सीमा के पिता ओमप्रकाश, सीवन के पूर्व सरपंच सतीश मुंजाल, परिजनों रामेश्वर, राममेहर, राजेश कुमार, बहन कुसुम, वंदना, कलश सहित भाजपा नेता दरबारा सिंह ने सीमा का स्वागत किया। सीवन के पूर्व सरपंच सतीश मुंजाल ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सीमा को आशीर्वाद दिया तथा कहा कि उसे कोई बड़ा कार्य पूरा करना है।
इसीलिए वह जीवित बचकर वापिस लौटी है। उन्होंने उसके मंगल भविष्य की कामना की। वहीं शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने 1100 रुपये का शगुन भी दिया। सीमा के पिता ओमप्रकाश ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है।