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Chandigarh: नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के दोषी सौतेले पिता को 20 साल की कैद, बयानों से पलट गई थी मां
Wed, 04 Sep 2024 07:05 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2024 07:05 AM IST
सार
सौतेले पिता के खिलाफ 27 दिसंबर 2022 को मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पीड़िता की मां भी अपने बयानों से पलट गई थी लेकिन सीएफएसएल की जांच रिपोर्ट सहित अन्य सुबूतों के आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।
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court order
- फोटो : ANI
विस्तार
चंडीगढ़ फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सेक्टर-26 थाने में दर्ज दुष्कर्म के मामले में नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म के दोषी सौतेले पिता को 20 साल की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 75 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। धारा 506 के तहत एक साल की सजा, पांच हजार रुपये जुर्माना, पॉक्सो एक्ट 06 के तहत 20 साल की सजा व 50 हजार रुपये जुर्माना और पॉक्सो एक्ट-10 के तहत 5 साल की सजा व 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।
सौतेले पिता के खिलाफ 27 दिसंबर 2022 को मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पीड़िता की मां भी अपने बयानों से पलट गई थी लेकिन सीएफएसएल की जांच रिपोर्ट सहित अन्य सुबूतों के आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान दोषी पक्ष ने कहा कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है। वह बेटी को बिना अनुमति के घर से बाहर जाने, स्कूल से देर से आने, मोबाइल फोन के जरिए गलत वीडियो का प्रयोग करने से रोकता था। वह उसके परिवार में नहीं रहना चाहती और अपने दोस्तों के साथ उसके हस्तक्षेप के बिना घूमने-फिरने की अधिक स्वतंत्रता चाहती थी। दोषी के अधिवक्ता ने सजा के मामले में नरम रुख अपनाने की गुहार लगाई।
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पीड़ित पक्ष की ओर से सरकारी महिला अधिवक्ता ने दलील दी कि मासूम बच्चों पर यौन अपराध करने वाले मनोवैज्ञानिक विकृत लोग होते हैं, जिन पर कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दोषी सौतेले पिता को सजा सुनाई। वहीं, पॉक्सो अधिनियम की धारा 33 (8) के प्रावधान के तहत पीड़िता को 4 लाख रुपये की राशि दी जाएगी।
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सौतेले पिता के खिलाफ 27 दिसंबर 2022 को मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पीड़िता की मां भी अपने बयानों से पलट गई थी लेकिन सीएफएसएल की जांच रिपोर्ट सहित अन्य सुबूतों के आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।
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मंगलवार को सुनवाई के दौरान दोषी पक्ष ने कहा कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है। वह बेटी को बिना अनुमति के घर से बाहर जाने, स्कूल से देर से आने, मोबाइल फोन के जरिए गलत वीडियो का प्रयोग करने से रोकता था। वह उसके परिवार में नहीं रहना चाहती और अपने दोस्तों के साथ उसके हस्तक्षेप के बिना घूमने-फिरने की अधिक स्वतंत्रता चाहती थी। दोषी के अधिवक्ता ने सजा के मामले में नरम रुख अपनाने की गुहार लगाई।
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पीड़ित पक्ष की ओर से सरकारी महिला अधिवक्ता ने दलील दी कि मासूम बच्चों पर यौन अपराध करने वाले मनोवैज्ञानिक विकृत लोग होते हैं, जिन पर कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दोषी सौतेले पिता को सजा सुनाई। वहीं, पॉक्सो अधिनियम की धारा 33 (8) के प्रावधान के तहत पीड़िता को 4 लाख रुपये की राशि दी जाएगी।