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अगर ये सपोर्ट मिला तो टॉप लिस्ट में आएगा स्टील सेक्टर
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 28 Nov 2013 02:45 PM IST
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घर के बर्तन से लेकर इंडस्ट्री की बड़ी मशीनें तक बिना स्टील के नहीं बनती हैं। यही कारण है अब स्टील को चाहिए सपोर्ट। चाहे टैक्स हो या फिर पावर, सपोर्ट मिला तो यह सेक्टर टॉप लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराएगा।
कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री में आयोजित स्टील मार्ट के दौरान मौजूद विशेषज्ञों की माने तो स्टील सेक्टर के लिए सबसे आवश्यक है पावर के रेट्स में कटौती करना और टैक्स में छूट देना।
कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री सेक्टर-31 में आयोजित स्टील मार्ट में पंजाब सरकार के इंडस्ट्री आर कॉमर्स के प्रिंसिपल सचिव करन अवतार सिंह ने कहा कि स्किल का अपग्रेडेशन, बिजली के दामों में कटौती, टेक्नोलॉजी का अपग्रेडेशन और इंट्री टैक्स हटाने से स्टील सेक्टर में रेवेल्यूशन आएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में स्टील सेक्टर के लिए एक विशेष इंडस्ट्रियल पॉलिसी तैयार करने की आवश्यकता है।
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खासतौर से आटोमोबाइल, ट्रांसपोर्टेशन, कैपिटल प्रोजेक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस इक्युपमेंट और हैवी मशीनरी के लिए स्टील ही जरूरी है। नार्थ इंडिया देश की कुल स्टील प्रोडक्शन में सोलह फीसदी का साझेदार है।
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और अन्य नॉर्दर्न स्टेट्स की अपेक्षा प्राइमरी स्टील का आयातक है। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चर्स के साथ प्राइमरी और सेकेंडरी स्टील सेक्टर के बीच तालमेल बनाना आवश्यक है।
मिनिस्ट्री ऑफ स्टील भारत सरकार के चीफ इकोनामिस्ट डॉ. एएस फिरोज ने कहा कि स्टील सेक्टर के ग्रोथ के लिए यहां कई महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं।
जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के सीईओ वीआर शर्मा ने कहा कि नॉर्दर्न स्टेट्स खासतौर से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में सबसे ज्यादा डिफेंस इक्युपमेंट की आवश्यकता है। स्टील को फ्री फ्लो प्रोडक्ट बनना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्टील सेक्टर के लिए पावर टैरिफ तीन रुपये प्रति यूनिट कर दिया जाना चाहिए। एसेंचर इंडिया के मैनेजमेंट कंसलटेंट अजय नायर ने कहा कि रेगुलेशन और नार्म, दामों में परिवर्तन के साथ कच्चे माल की उपलब्धता स्टील सेक्टर के लिए चैलेंज है।
सीआईआई चंडीगढ़ काउंसिल के वाइस चेयरमैन दर्पण कपूर ने कहा कि स्टील सेक्टर में पिछले पांच साल के दौरान सात फीसदी सीएजीआर की ग्रोथ हो रही है। सीआईआई पंजाब स्टेट काउंसिल के सदस्य एएस चीमा ने कहा कि घरेलू स्टील की डिमांड के लिए यहां क्षमता की कमी नहीं है।
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कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री में आयोजित स्टील मार्ट के दौरान मौजूद विशेषज्ञों की माने तो स्टील सेक्टर के लिए सबसे आवश्यक है पावर के रेट्स में कटौती करना और टैक्स में छूट देना।
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कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री सेक्टर-31 में आयोजित स्टील मार्ट में पंजाब सरकार के इंडस्ट्री आर कॉमर्स के प्रिंसिपल सचिव करन अवतार सिंह ने कहा कि स्किल का अपग्रेडेशन, बिजली के दामों में कटौती, टेक्नोलॉजी का अपग्रेडेशन और इंट्री टैक्स हटाने से स्टील सेक्टर में रेवेल्यूशन आएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में स्टील सेक्टर के लिए एक विशेष इंडस्ट्रियल पॉलिसी तैयार करने की आवश्यकता है।
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खासतौर से आटोमोबाइल, ट्रांसपोर्टेशन, कैपिटल प्रोजेक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस इक्युपमेंट और हैवी मशीनरी के लिए स्टील ही जरूरी है। नार्थ इंडिया देश की कुल स्टील प्रोडक्शन में सोलह फीसदी का साझेदार है।
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और अन्य नॉर्दर्न स्टेट्स की अपेक्षा प्राइमरी स्टील का आयातक है। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चर्स के साथ प्राइमरी और सेकेंडरी स्टील सेक्टर के बीच तालमेल बनाना आवश्यक है।
मिनिस्ट्री ऑफ स्टील भारत सरकार के चीफ इकोनामिस्ट डॉ. एएस फिरोज ने कहा कि स्टील सेक्टर के ग्रोथ के लिए यहां कई महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं।
जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के सीईओ वीआर शर्मा ने कहा कि नॉर्दर्न स्टेट्स खासतौर से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में सबसे ज्यादा डिफेंस इक्युपमेंट की आवश्यकता है। स्टील को फ्री फ्लो प्रोडक्ट बनना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्टील सेक्टर के लिए पावर टैरिफ तीन रुपये प्रति यूनिट कर दिया जाना चाहिए। एसेंचर इंडिया के मैनेजमेंट कंसलटेंट अजय नायर ने कहा कि रेगुलेशन और नार्म, दामों में परिवर्तन के साथ कच्चे माल की उपलब्धता स्टील सेक्टर के लिए चैलेंज है।
सीआईआई चंडीगढ़ काउंसिल के वाइस चेयरमैन दर्पण कपूर ने कहा कि स्टील सेक्टर में पिछले पांच साल के दौरान सात फीसदी सीएजीआर की ग्रोथ हो रही है। सीआईआई पंजाब स्टेट काउंसिल के सदस्य एएस चीमा ने कहा कि घरेलू स्टील की डिमांड के लिए यहां क्षमता की कमी नहीं है।