{"_id":"614305f18ebc3e5ad7332cab","slug":"state-consumer-commission-rejected-the-appeal-of-the-corporation-the-amount-would-have-to-be-returned-chandigarh-news-pkl426906373","type":"story","status":"publish","title_hn":"राज्य उपभोक्ता आयोग ने खारिज की निगम की अपील, लौटानी होगी राशि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राज्य उपभोक्ता आयोग ने खारिज की निगम की अपील, लौटानी होगी राशि
विज्ञापन
चंडीगढ़। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ ने नगर निगम की अपील खारिज कर दी है। राज्य आयोग ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के फैसले को बरकरार रखा है। अब नगर निगम शिकायतकर्ता कुलदीप चंद को 54 हजार 790 रुपये अदा करेगा। इसके साथ ही 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा।
शिकायतकर्ता कुलदीप चंद निवासी पिपलीवाला टाउन मनीमाजरा ने नगर निगम द्वारा आयुक्त, सेक्टर-11 स्थित नगर निगम के जन स्वास्थ्य के एक्सईएन और मनीमाजरा स्थित सब-डिवीजन नंबर 8 के एसडीओ
के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दी थी।
शिकायतकर्ता ने शिकायत में कहा कि वह अपना घर मरम्मत करा रहे थे कि अचानक नगर निगम के सब-डिवीजन नंबर 8 के एसडीओ ने 18 जून 2010 को व्यापारिक बिल भेजना शुरू कर दिया। इस संबंध में 1 सितंबर 2010 को शपथ पत्र भी दिया था। इसके बाद भी निगम 27 अप्रैल 2017 तक पानी और सीवरेज का व्यापारिक बिल चार्ज करते रहे। यह बिल की राशि 69 हजार 45 रुपये थी।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग को कहा कि 69 हजार 45 रुपये में से 14 हजार 255 रुपये घरेलू बिल था। इस तरह निगम ने 54,790 रुपये नहीं लौटाए। निगम ने जिला उपभोक्ता आयोग में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने नियमों के अनुसार चार्ज किया, पर आयोग ने इसे नहीं माना।
उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता की सुनवाई पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निगम को निर्देश दिया था कि वह संयुक्त रूप से शिकायतकर्ता को 54,790 रुपये लौटाए। साथ ही 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी अदा करे।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता कुलदीप चंद निवासी पिपलीवाला टाउन मनीमाजरा ने नगर निगम द्वारा आयुक्त, सेक्टर-11 स्थित नगर निगम के जन स्वास्थ्य के एक्सईएन और मनीमाजरा स्थित सब-डिवीजन नंबर 8 के एसडीओ
विज्ञापन
के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दी थी।
शिकायतकर्ता ने शिकायत में कहा कि वह अपना घर मरम्मत करा रहे थे कि अचानक नगर निगम के सब-डिवीजन नंबर 8 के एसडीओ ने 18 जून 2010 को व्यापारिक बिल भेजना शुरू कर दिया। इस संबंध में 1 सितंबर 2010 को शपथ पत्र भी दिया था। इसके बाद भी निगम 27 अप्रैल 2017 तक पानी और सीवरेज का व्यापारिक बिल चार्ज करते रहे। यह बिल की राशि 69 हजार 45 रुपये थी।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग को कहा कि 69 हजार 45 रुपये में से 14 हजार 255 रुपये घरेलू बिल था। इस तरह निगम ने 54,790 रुपये नहीं लौटाए। निगम ने जिला उपभोक्ता आयोग में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने नियमों के अनुसार चार्ज किया, पर आयोग ने इसे नहीं माना।
उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता की सुनवाई पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निगम को निर्देश दिया था कि वह संयुक्त रूप से शिकायतकर्ता को 54,790 रुपये लौटाए। साथ ही 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी अदा करे।