{"_id":"64e44a00aac389e44a035648","slug":"standing-committee-for-heritage-conservation-raised-question-on-vision-document-2047-of-chandigarh-2023-08-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"विजन डॉक्यूमेंट-2047: विरासत संरक्षण की स्थायी समिति का सवाल, कहा-इसके प्रावधान चंडीगढ़ की योजना के खिलाफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विजन डॉक्यूमेंट-2047: विरासत संरक्षण की स्थायी समिति का सवाल, कहा-इसके प्रावधान चंडीगढ़ की योजना के खिलाफ
Tue, 22 Aug 2023 11:51 AM IST
निवेदिता वर्मा
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 22 Aug 2023 11:51 AM IST
सार
समिति ने कहा कि विजन डॉक्यूमेंट 2047 में कोर्बुजिए विरासत के संदर्भ की पूर्ण चूक है, जिसे अब अनुमोदन के लिए गृह मंत्रालय को भेजा गया है। यह विजन डॉक्यूमेंट उस दस्तावेज पर आधारित प्रतीत होता है, जिसे पिछले साल संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की टीम ने तैयार किया था।
विज्ञापन
चंडीगढ़
- फोटो : file photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ प्रशासकीय सलाहकार परिषद की कला, संस्कृति, पर्यटन और विरासत संरक्षण की स्थायी समिति ने यूटी प्रशासन ने विजन डॉक्यूमेंट-2047 पर सवाल उठाए हैं। समिति की रिपोर्ट में सदस्यों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इसमें कई ऐसे प्रावधान हैं, जो शहर की स्वीकृत योजना और कानून के अन्य प्रावधानों के बिल्कुल विपरीत हैं। उन्होंने इसे गंभीरता से देखने की जरूरत पर जोर दिया है। समिति ने प्रशासन और नगर निगम को सुझाव भी दिए हैं।
समिति के चेयरमैन प्रसिद्ध कला इतिहासकार और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित डॉ. बीएन गोस्वामी हैं। आठ अगस्त को उनकी अध्यक्षता में समिति की बैठक हुई थी। बैठक की रिपोर्ट बीते दिनों हुई सलाहकार परिषद में रखी गई। उसमें डॉ. गोस्वामी ने कहा है कि पिछले कुछ समय से वह विभिन्न समितियों में शामिल रहे हैं और वह महसूस कर रहे हैं कि शहर की विरासत के मुद्दों पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जितना देना चाहिए।
यह भी पढ़ें: मुआवजे की मांग पर रार: किसानों को चंडीगढ़ में घुसने से रोकने के लिए भारी पुलिस तैनात, पंजाब में कई हिरासत में
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि हाल में तैयार किए गए विजन डॉक्यूमेंट 2047 में कोर्बुजिए विरासत के संदर्भ की पूर्ण चूक है, जिसे अब अनुमोदन के लिए गृह मंत्रालय को भेजा गया है। यह विजन डॉक्यूमेंट उस दस्तावेज पर आधारित प्रतीत होता है, जिसे पिछले साल संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की टीम ने तैयार किया था। इसके अलावा इसमें ऐसे प्रावधान हैं जो शहर की स्वीकृत योजना और कानून के अन्य प्रावधानों के बिल्कुल विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों को गंभीरता से देखने की जरूरत है।
समिति ने प्रशासन और नगर निगम को सुझाव दिया है कि आम जनता को असुविधा से बचाने के लिए शहर में विकास कार्य रात के समय में किए जाने चाहिए। कई देशों ने इस मॉडल को अपनाया है, जिसे चंडीगढ़ में भी अपनाया जाना चाहिए।
आर्किटेक्चरल टूरिज्म को बढ़ावा देने की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्ट के पूर्व प्रिंसिपल प्रो. रजनीश वत्स ने कहा है कि दस्तावेज में ग्रीन लैंडस्केपिंग और ग्रीन हेरिटेज की दृष्टि भी गायब है, जो चंडीगढ़ के लिए ली कार्बुजिए के दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि शहर में आर्किटेक्चरल टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाना चाहिए लेकिन यह तभी हो सकता है जब एक सुविचारित कार्ययोजना बनाई गई हो।
चंडीगढ़ में हो कला महोत्सव का आयोजन
उन्होंने सुझाव दिया कि कोच्चि-मुजिरिस बिएननेल महोत्सव की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी एक कला महोत्सव के आयोजन पर विचार किया जाए। बता दें कि कोच्चि-मुजिरिस बिएननेल केरल के कोच्चि शहर में आयोजित कंटेम्पररी आर्ट की एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी है। यह देश की सबसे बड़ी कला प्रदर्शनी और एशिया का सबसे बड़ा कंटेम्पररी आर्ट उत्सव है। कोच्चि-मुजिरिस बिएननेल केरल सरकार के सहयोग से कोच्चि बिएननेल फाउंडेशन की एक पहल है।
विजन डॉक्यूमेंट में सामाजिक विरासत पर भी हो जोर
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील एमएल सरीन भी बैठक में उपस्थित रहे। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिसमें विरासत और शहर के भविष्य को निर्देशित करने में प्रशासन की विरासत समिति की भूमिका पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक विरासत भी विजन डॉक्यूमेंट 2047 का एक अभिन्न अंग होना चाहिए, क्योंकि चंडीगढ़ सामाजिक विरासत में अग्रणी रहा है, विशेष रूप से स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में जिसकी शुरुआत 1964 में चंडीगढ़ में हुई थी। बैठक में यूटी प्रशासन के सांस्कृतिक मामलों के निदेशक सौरभ अरोड़ा, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट के चेयरमैन शिव देव सिंह और उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (पटियाला) के निदेशक के नॉमिनी भी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
समिति के चेयरमैन प्रसिद्ध कला इतिहासकार और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित डॉ. बीएन गोस्वामी हैं। आठ अगस्त को उनकी अध्यक्षता में समिति की बैठक हुई थी। बैठक की रिपोर्ट बीते दिनों हुई सलाहकार परिषद में रखी गई। उसमें डॉ. गोस्वामी ने कहा है कि पिछले कुछ समय से वह विभिन्न समितियों में शामिल रहे हैं और वह महसूस कर रहे हैं कि शहर की विरासत के मुद्दों पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जितना देना चाहिए।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: मुआवजे की मांग पर रार: किसानों को चंडीगढ़ में घुसने से रोकने के लिए भारी पुलिस तैनात, पंजाब में कई हिरासत में
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि हाल में तैयार किए गए विजन डॉक्यूमेंट 2047 में कोर्बुजिए विरासत के संदर्भ की पूर्ण चूक है, जिसे अब अनुमोदन के लिए गृह मंत्रालय को भेजा गया है। यह विजन डॉक्यूमेंट उस दस्तावेज पर आधारित प्रतीत होता है, जिसे पिछले साल संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की टीम ने तैयार किया था। इसके अलावा इसमें ऐसे प्रावधान हैं जो शहर की स्वीकृत योजना और कानून के अन्य प्रावधानों के बिल्कुल विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों को गंभीरता से देखने की जरूरत है।
समिति ने प्रशासन और नगर निगम को सुझाव दिया है कि आम जनता को असुविधा से बचाने के लिए शहर में विकास कार्य रात के समय में किए जाने चाहिए। कई देशों ने इस मॉडल को अपनाया है, जिसे चंडीगढ़ में भी अपनाया जाना चाहिए।
आर्किटेक्चरल टूरिज्म को बढ़ावा देने की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्ट के पूर्व प्रिंसिपल प्रो. रजनीश वत्स ने कहा है कि दस्तावेज में ग्रीन लैंडस्केपिंग और ग्रीन हेरिटेज की दृष्टि भी गायब है, जो चंडीगढ़ के लिए ली कार्बुजिए के दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि शहर में आर्किटेक्चरल टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाना चाहिए लेकिन यह तभी हो सकता है जब एक सुविचारित कार्ययोजना बनाई गई हो।
चंडीगढ़ में हो कला महोत्सव का आयोजन
उन्होंने सुझाव दिया कि कोच्चि-मुजिरिस बिएननेल महोत्सव की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी एक कला महोत्सव के आयोजन पर विचार किया जाए। बता दें कि कोच्चि-मुजिरिस बिएननेल केरल के कोच्चि शहर में आयोजित कंटेम्पररी आर्ट की एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी है। यह देश की सबसे बड़ी कला प्रदर्शनी और एशिया का सबसे बड़ा कंटेम्पररी आर्ट उत्सव है। कोच्चि-मुजिरिस बिएननेल केरल सरकार के सहयोग से कोच्चि बिएननेल फाउंडेशन की एक पहल है।
विजन डॉक्यूमेंट में सामाजिक विरासत पर भी हो जोर
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील एमएल सरीन भी बैठक में उपस्थित रहे। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिसमें विरासत और शहर के भविष्य को निर्देशित करने में प्रशासन की विरासत समिति की भूमिका पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक विरासत भी विजन डॉक्यूमेंट 2047 का एक अभिन्न अंग होना चाहिए, क्योंकि चंडीगढ़ सामाजिक विरासत में अग्रणी रहा है, विशेष रूप से स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में जिसकी शुरुआत 1964 में चंडीगढ़ में हुई थी। बैठक में यूटी प्रशासन के सांस्कृतिक मामलों के निदेशक सौरभ अरोड़ा, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट के चेयरमैन शिव देव सिंह और उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (पटियाला) के निदेशक के नॉमिनी भी उपस्थित रहे।