{"_id":"b1e6b85bae16bc6a5d242ee280601066","slug":"stall-of-special-childrens-in-cii-fair","type":"story","status":"publish","title_hn":" बेजुबान की आवाज को यहां मिली पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेजुबान की आवाज को यहां मिली पहचान
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 27 Oct 2013 11:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीआईआई चंडीगढ़ फेयर में विशेष बच्चों ने सभी का दिल जीत लिया। फेयर के बीच में लगाया गया इन बच्चों का सभी के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
ये स्टाल है पेंटिंग का। इस पर एक खास पेंटिंग है जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस पेंटिंग को एक 27 वर्षीय युवक सौरभ सैनी ने तैयार की हैं जो बोल नहीं सकते।
वे बरवाला के स्कूल में युवाओं को प्रशिक्षण देते हैं। कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री ने सौरभ को एक मंच प्रदान किया है ताकि वे अपनी पेंटिंग की मार्केटिंग कर सकें। सीआईआई फेयर से उनको ऑर्डर भी मिल रहे हैं।
सीआईआई के रीजनल डायरेक्टर नॉर्दर्न रीजन पिकेंदर पाल सिंह ने कहा कि सीआईआई की कोशिश है कि टैलेंट को प्रोत्साहित किया जाए। सौरभ के पिता जेएस सैनी ने कहा, ‘सौैरभ को बचपन से ही पेंटिंग का शौक था।
विज्ञापन
उसने 1990 में महात्मा गांधी और पाकिस्तानी क्रिकेटरों के स्केच तैयार किए थे। जब मैंने उसका टैलेंट देखा तो उसको प्रोत्साहित करने का मन बनाया।’ सौरभ ने अपनी पहली एक्जिबिशन 1999 में चंडीगढ़ में लगाई थी।
उसमें सौरभ की पेंटिंग को काफी रिस्पांस मिला। कलाकार दिवंगत जसपाल भट्टी भी सौरभ की पेंटिंग को देखकर कायल हो गए थे। गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट ने उनके रास्ते खोल दिए।
सौरभ ने उसके बाद डिप्लोमा किया और अब वे अध्यापक बन गए। सौरभ के पिता नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रुरल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में प्रोफेसर हैं। सौरभ को पेंटिंग और फोटोग्राफी के लिए नेशनल अवार्ड भी मिल चुका है।
विज्ञापन
ये स्टाल है पेंटिंग का। इस पर एक खास पेंटिंग है जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस पेंटिंग को एक 27 वर्षीय युवक सौरभ सैनी ने तैयार की हैं जो बोल नहीं सकते।
वे बरवाला के स्कूल में युवाओं को प्रशिक्षण देते हैं। कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री ने सौरभ को एक मंच प्रदान किया है ताकि वे अपनी पेंटिंग की मार्केटिंग कर सकें। सीआईआई फेयर से उनको ऑर्डर भी मिल रहे हैं।
विज्ञापन
सीआईआई के रीजनल डायरेक्टर नॉर्दर्न रीजन पिकेंदर पाल सिंह ने कहा कि सीआईआई की कोशिश है कि टैलेंट को प्रोत्साहित किया जाए। सौरभ के पिता जेएस सैनी ने कहा, ‘सौैरभ को बचपन से ही पेंटिंग का शौक था।
विज्ञापन
उसने 1990 में महात्मा गांधी और पाकिस्तानी क्रिकेटरों के स्केच तैयार किए थे। जब मैंने उसका टैलेंट देखा तो उसको प्रोत्साहित करने का मन बनाया।’ सौरभ ने अपनी पहली एक्जिबिशन 1999 में चंडीगढ़ में लगाई थी।
उसमें सौरभ की पेंटिंग को काफी रिस्पांस मिला। कलाकार दिवंगत जसपाल भट्टी भी सौरभ की पेंटिंग को देखकर कायल हो गए थे। गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट ने उनके रास्ते खोल दिए।
सौरभ ने उसके बाद डिप्लोमा किया और अब वे अध्यापक बन गए। सौरभ के पिता नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रुरल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में प्रोफेसर हैं। सौरभ को पेंटिंग और फोटोग्राफी के लिए नेशनल अवार्ड भी मिल चुका है।