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अकाल तख्त का फरमान, पाकिस्तान में नहीं छपेंगे श्री गुरुग्रंथ साहिब

Thu, 06 Apr 2017 09:40 AM IST
रमेश शुक्ला सफर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
रमेश शुक्ला सफर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Updated Thu, 06 Apr 2017 09:40 AM IST
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Sri Guru Granth Sahib will not be printed in Pakistan
Akal Takht Jathedar Giani Gurbachan Singh - फोटो : File Photo
श्री अकाल तख्त साहिब ने कहा है कि अब फिल्मों या किसी टीवी कार्यक्रम में पंज प्यारे के रूप में अभिनय केवल असली पंज प्यारे ही कर सकते हैं। कोई कलाकार पंज प्यारे के रूप में अभिनय नहीं कर सकता। फरमान में कहा गया है कि फिल्मों में पांज प्यारे केवल असली सिंह ही बनेंगे, जिन्हें पंथ सर्वसम्मति से पंज प्यारे के तौर पर नवाजता है। इसी प्रकार गुरुघरों में इस प्रकार की शूटिंग के लिए भी श्री अकाल तख्त साहिब से अब मंजूरी लेना जरूरी होगा। 
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यह फरमान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेजार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने जारी किया है। जत्थेदार ने कहा कि फिल्में मनोरंजन के लिए होती हैं या फिर समाज को संदेश देने के लिए। दुखद पहलू है कि आज के दौर में फिल्में न स्वस्थ मनोरंजन दे पा रही हैं और न बेहतर संदेश। सिख कौम को कभी चुटकलों के सहारे सोशल मीडिया पर बदनाम किया जाता है, तो कभी फिल्मों में सिख धर्म के नाम पर फिल्में सुपरहिट कराई जाती हैं।
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कई बार फिल्म को चर्चा में लाने के लिए विवादित सीन डाल दिए जाते हैं। फिल्मों में पंज प्यारे का किरदार निभाने वाले ज्यादातर कलाकार सिख नहीं होते, ऐसे में पंज प्यारे का किरदार अब केवल असली पंज प्यारे ही करेंगे, वो भी इजाजत के बाद। किसी भी गुरुद्वारे में फिल्म-सीरियल की शूटिंग मंजूरी के बाद ही करने दी जाएगी, क्योंकि सिख धर्म के प्रचार के लिए मर्यादा भी जरूरी है। 
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पाकिस्तान में नहीं छपेंगे श्री गुरुग्रंथ साहिब 
बैसाखी पर्व भारत-पाकिस्तान दोनों ही मुल्कों में मनाया जाता है। पाकिस्तान में ननकाना साहिब में इसे विशेष रूप से मनाया जाता है। इस बार भी बैसाखी के मद्देनजर पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व एक्यू ट्रस्ट प्रापर्टी बोर्ड की बैठक मंगलवार देर शाम हुई। इसमें कमेटी के प्रधान तारा सिंह व एक्यू ट्रस्ट के चेयरमैन फारुक-उल-सिद्दीकी शामिल हुए। सिद्दीकी ने साफ कर दिया कि पाकिस्तानी हुकूमत ने मुल्क में श्री गुरुग्रंथ साहिब की छपाई से इंकार कर दिया है। ऐसे में इस बार करतार पुर साहिब की बावली का पवित्र अमृत ननकाना साहिब आने वाले श्रद्धालुओं को नहीं दे पाएंगे। 

Sri Guru Granth Sahib will not be printed in Pakistan
Akal Takht Jathedar Giani Gurbachan Singh - फोटो : File Photo
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने फरमान जारी किया है कि देश-दुनिया में कोई भी बिना श्री अकाल तख्त साहिब की मंजूरी के गुरुद्वारे का निर्माण नहीं करा सकता। बगैर इजाजत निर्माण को गुरुद्वारे के तौर पर मान्यता नहीं दी जा सकती। हालांकि फरमान से इसी अकाल तख्त साहिब के लिए सरबत खालसा के मनोनीत जत्थेदार ध्यान सिंह मंड सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि गुरुघर बनाने के लिए इजाजत कैसी, हां धार्मिक मर्यादा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। 

अब जत्थेदार ध्यान सिंह मंड ने 20 अप्रैल को जत्थेदारों की बैठक बुलाई है। वहीं दूसरी तरफ जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने नौ अप्रैल को बैठक बुला ली है। दोनों जत्थेदारों के बीच जहां मतभेद नजर आ रहे हैं, वहीं एसजीपीसी चुनाव करवाने को लेकर भी आवाज उठने लगी है। ऐसे में जत्थेदार  ध्यान सिंह मंड बड़ा फरमान जारी कर सकते हैं। 

सिद्धू के बयान पर बोले जत्थेदार, राजनीति करने वालों का एसजीपीसी में क्या काम
जत्थेदार ध्यान सिंह मंड ने कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बयान पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि राजनीति करने वालों का एसजीपीसी में क्या काम। बाते दें कि बुधवार सुबह जब कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू से मीडियाकर्मियों ने पूछा कि कहीं सरकार का इरादा एसजीपीसी पर कब्जे का तो नहीं है? इसके जवाब में सिद्धू ने कहा कि सवारी अपने सामान का जिम्मेदार खुद है। 
 

'श्री अकाल तख्त साहिब का मैं हूं असली जत्थेदार'

Sri Guru Granth Sahib will not be printed in Pakistan
Jathedar Dhian Singh - फोटो : फाइल फोटो
नो को हो सकती है झींडा की यस
9 अप्रैल को जगदीश सिंह झींडा (हरियाणा) को पंथ में यस हो सकती है।  हरियाणा गुरूद्वारों पर कब्जा के आरोप में में झींडा को 16 जुलाई 2016 को पंथ से निष्काषित कर दिया गया था। पंथ में लौटने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब से 9 को फैसला होगा। माना जा रहा है कि झींडा को पंथ में शामिल होना तय है। 

श्री अकाल तख्त साहिब का मैं हूं असली जत्थेदार - जत्थेदार ध्यान सिंह मंड
 सरबत खालसा ने मुझे जत्थेदार की जिम्मेदारी सौंप रखी है। मैंने 20 अप्रैल को पांच सिंह साहिबान की बैठक बुलाई है। बैठक में बहुत फैसले लिए जाएंगे। एसजीपीसी चुनाव की बातें होगी। क्योंकि एसजीपीसी केवल गुरूद्वारों की देखभाल के लिए बनाई गई थी, किसी एक परिवार के लिए नहीं। मुझे श्री अकाल तख्त साहिब जी के जत्थेदार तौर पर बख्शीश हुई है। लेकिन अधिकार छीना जाता रहा है।सियासत एक ग्रुप में बंट गई। वक्त बदला है।

बहुत कुछ बदलने वाला है। बेअदबी करने और करवाने वाले चेहरे अब ज्यादा देर तक सियासत की कोठियों में पनाह नहीं ले पाएंगे। फोन पर हुई बातचीत में सरबत खालसा के मनोनीत जत्थेदार भाई ध्यान सिंह मंड ने कहा कि जो फैसले लिए जाएं वो किसी एक वर्ग के लिए नहीं हर धर्म हर वर्ग के लिए हो तभी तो सरबत का भला होगा। एसजीपीसी धर्म और सियासत में पुल का काम करती रही है।
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