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ऑनलाइन पढ़ाई के साइड इफेक्ट : बच्चों की गर्दन में आ रहा झुकाव, आंखों में भैंगापन हावी, डॉक्टरों ने दी ये सलाह

Mon, 12 Apr 2021 02:16 PM IST
ajay kumar वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 12 Apr 2021 02:16 PM IST
सार

  • बच्चों में तेजी से बढ़ रही भैंगेपन व गर्दन झुकने की शिकायत
  • सरकारी के साथ ही निजी डॉक्टरों के पास पहुंच रहे ऐसे मामले

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squint cases increased in Children due to online studies
फाइल। - फोटो : पीटीआई

विस्तार

लॉकडाउन में जिस ऑनलाइन पढ़ाई को वरदान माना जा रहा था, अब उसके दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहने से बच्चों की गर्दन और आंखों पर असर पड़ रहा है। उनकी गर्दन एक से डेढ़ इंच झुक गई है और आंखें भी भैंगी हो रही हैं। यह समस्या देखकर अभिभावकों की चिंता बढ़ रही है। डॉक्टरों की सलाह है कि कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन से फौरन बच्चों को अलग कर दें।

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केस- 1 : सेक्टर 34 निवासी केशव (9) की दायीं आंख कुछ दिनों से तिरछी लग रही थी। केशव की मां ने पीजीआई टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से डॉक्टर से संपर्क किया। इसके बाद केशव को पीजीआई की आंखों की ओपीडी में विशेषज्ञ ने देखा। उन्होंने बताया कि मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर लगातार घंटों देखते रहने से यह परेशानी हुई है। डॉक्टर ने केशव को चश्मा लगाने को कहा। साथ ही हिदायत दी कि मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल तत्काल बंद कर दे। 
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केस- 2 : एमबीए कर रहे नवजोत सिंह को कुछ दिन से गर्दन में तेज दर्द की शिकायत थी। उन्होंने हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखाया तो एक्स रे के बाद पता चला कि उनकी गर्दन की हड्डी सामान्य के मुकाबले एक से डेढ़ इंच नीचे झुक गई है। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें टेक्स्ट नेक सिंड्रोम हुआ है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि वह मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन इस्तेमाल कम से कम करें। साथ ही गर्दन से जुड़ी एक्सरसाइज नियमित रूप से करें।

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टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की बढ़ रही शिकायत

जीएमएसएच- 16 के हड्डी रोग विभाग के पूर्व विशेषज्ञ डॉ. नीरज गुप्ता ने बताया, मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। मोबाइल पर घंटों व्यस्त रहने के कारण गर्दन की सही और वास्तविक मुद्रा बदल रही है। इससे गर्दन में एक से डेढ़ इंच तक  झुकाव की शिकायत सामने आ रही है। 

डॉ. नीरज ने बताया कि शुरुआती दौर में इसका पता नहीं चलता। दर्द बढ़ने और स्थिति गंभीर होने पर युवा व बच्चे डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। इस समस्या से बचाव का एकमात्र उपाय मोबाइल का कम से कम इस्तेमाल है। साथ ही व्यायाम और योग को अपनाया जाए। मोबाइल या कंप्यूटर पर काम करने के लिए टेबल कुर्सी पर बैठकर काम करें। 45 मिनट तक मोबाइल पर काम करने के बाद 5 मिनट के लिए गर्दन की एक्सरसाइज करें।

आंखें तिरछी बना रहा मोबाइल
मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन पर लगातार देखने से ड्राई आई के साथ ही अकोमोडेटिव स्क्विंट यानी भैंगेपन की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है। पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर जगतराम का कहना है कि मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर घंटों काम करने या ऑनलाइन क्लास करने से यह परेशानी है। 

बच्चों में भैंगेपन की शिकायत भी सामने आने लगी है। इसलिए जरूरी है कि मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल कम से कम किया जाए। अगर लगातार ऑनलाइन क्लास चल रही हो तो हर 40 से 45 मिनट के बीच कुछ सेकंड का ब्रेक जरूर लें। उस दौरान आंखों को आराम करने दें। पंजाब के पूर्व निदेशक स्वास्थ्य व नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आरके गुप्ता ने बताया कि 10 साल तक के बच्चों में भैंगेपन की शिकायत चिंता की बात है। इसका मुख्य कारण मोबाइल या कंप्यूटर पर लगातार आंखे टिकाना है। समाधान के लिए सही नंबर के चश्मे का इस्तेमाल किया जाए।

ऐसे करें बचाव

  • स्मार्टफोन की ब्राइटनेस (रोशनी) न तो बहुत अधिक हो, न बहुत कम।
  • टेक्स्ट का साइज सही होना चाहिए। इससे पढ़ने में आसानी होगी और आंखों पर कम जोर पड़ेगा।
  • मोबाइल की स्क्रीन को हमेशा साफ रखें। गंदी स्क्रीन से फोकस बनाने में दिक्कत होती है।
  • स्मार्टफोन को आंखों से आठ इंच की दूरी पर रखकर ही कुछ टाइप करें या पढ़ें।
  • कुछ-कुछ देर में पलकों को झपकते रहने से आंखों की नमी बनी रहती है और जलन नहीं होती।
  • स्मार्टफोन की स्क्रीन पर प्रोटेक्टर फिल्म लगाएं। आप चाहें तो एंटी-रिफ्लेक्टिंग कोट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऐसे रखें अपनी गर्दन का ध्यान

  • बातचीत में ईयर फोन का इस्तेमाल करें। इससे गर्दन पर दबाव कम होने के साथ ही मोबाइल के रेडिएशन से भी बचा जा सकता है। गर्दन और कंधे के बीच मोबाइल दबाकर बात कतई ना करें। गर्दन व कंधे में दर्द अकड़न या मांसपेशियों में दर्द हो तो फिजियोथेरेपी कराएं।
  • एक ही मुद्रा में गर्दन झुकाए रखने से मांसपेशियों में बदलाव आने लगता है। इसकी वजह से गर्दन की स्थिति बदल जाती है। ऐसी स्थिति से बचाव के लिए मोबाइल पर काम करने के दौरान गर्दन की मुद्राएं बदलते रहें और हर आधे घंटे के बाद एक बार गर्दन का व्यायाम जरूर करें।
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