भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान व खेलमंत्री संदीप सिंह से विशेष बातचीत, बच्चों को दिए तीन सुझाव
- सूरमा को ओलंपिक खेलने के एक साल बाद मिली थी बाइक चलाने की अनुमति
- रील के सूरमा ने 100 स्पीड में दौड़ाई थी बाइक,पर रीयल वाले बोले ना बाबा ना
- रील का सूरमा 100 की स्पीड में था बाइक पर,मगर रीयल में साईकिल ही थी हाथ में
- यूथ और बच्चों को जंकफूड,मोबाइल और टू व्हीलर से दूरी अपनाने की अपील
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भारतीय हॉकी के सूरमा भले सिल्वर स्क्रीन पर कच्ची उम्र में 100 की स्पीड पर बाइक दौड़ाते दिखे हों, मगर रीयल के सूरमा बोलते हैं ना बाबा ना... ये खतरनाक है। देश के युवाओं को इससे गुरेज करना होगा। अगर छोटी उम्र के बच्चों को टू व्हीलर से दूर नहीं किया तो इससे देश में हादसों की संख्या में और अधिक इजाफा होगा।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान एवं हरियाणा के खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह ने यह खुलासा किया कि उन्हें तो ओलंपिक खेलने के एक साल बाद पिता ने बाइक चलाने की अनुमति दी थी। उनका लर्निंग लाइसेंस 2005 में बना था, इसके बाद उन्हें पिता ने मोटर साइकिल चलाने की आज्ञा दी थी।
यहां बता दें कि भारतीय सिनेमा की चर्चित फिल्म सूरमा के एक दृश्य में कच्ची उम्र में ही 100 की स्पीड पर बाइक चलाने वाला दृश्य फिल्माया गया था।
जंकफूड, मोबाइल और टू व्हीलर से दूरी अपनाएं
बहरहाल खेल की दुनिया के इस सूरमा को राजनीति की दुनिया में आए अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ है, मगर राजनीति के दांवपेच सीखकर आगे बढ़ते हुए संदीप सिंह अब हरियाणा में राज्यमंत्री के पद पर हैं और राजनीति के साथ खेलों और खेल की दुनिया में बेहतर खिलाड़ियों को आगे लाने के लिये प्रयासरत हैं।
उनका कहना है कि छोटी उम्र के बच्चों के लिए जरूरी है कि वह जंकफूड, मोबाइल और टू व्हीलर से दूरी अपनाएं। क्योंकि जंकफूड से बच्चों की ग्रोथ कम हो रही है और मोबाइल से फोकस कम हो रहा है। वहीं छोटी उम्र में टू व्हीलरों और ओवर स्पीड के कारण हादसों में इजाफा हो रहा है। इसके लिए वह समय समय पर जागरूकता अभियान चलाते रहे हैं और यरह कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा।
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चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान भी वह साइकिल पर ही चलते थे और रोजाना करीब 30 से 36 किलोमीटर साईकिल चलाते थे। संदीप सिंह के मुताबिक, वह शाहाबाद से अमृतसर दरबार साहिब तक जून की गर्मी में 300 किलोमीटर साइकिल पर साढ़े 37 घंटे में पहुंचे थे, जिसमें आठ घंटे का ब्रेक भी था।
ओलंपिक को लेकर भी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ
खेलमंत्री ने बताया है कि विश्वस्तर पर भी अभी ओलंपिक को लेकर भी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने माना कि कोरोना की वजह से विश्वभर में हर क्षेत्र के साथ खेल भी प्रभावित हुए हैं। वहीं कोराना काल में सरकार के आदेशानुसार कुछ शर्तों पर खेल प्रांगण खोले हैं। इसमें कुछ व्यक्तिगत और कुछ टीम खेलों की शुरुआत हुई है। हालांकि ये हरसंभव प्रयास होगा कि कोई भी खिलाड़ी दूसरे को ना छूकर फिटनेस पर फोकस रखे।
छोटी और बड़ी उम्र के खिलाड़ी नहीं कर सकेंगे अभ्यास
संदीप सिंह के मुताबिक वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से लॉकडाउन में हरियाणा के खिलाड़ियों को मानसिक और शारीरिक तौर अपने आपको मजबूत करने का एक अवसर मिला है। इस लॉकडाउन के बाद सरकार ने कुछ शर्तों के साथ खेल स्टेडियम को खोलने की इजाजत दी है, लेकिन और छोटी और बड़ी उम्र के खिलाडिय़ों पर फिलहाल खेल प्रांगणों में अभ्यास करने की अभी इजाजत नहीं दी है।