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Chandigarh: ऑस्टियोपोरोसिस के 80 प्रतिशत मरीजों के स्पाइन में हो रहा फ्रैक्चर, पीजीआई के शोध में खुलासा
Fri, 20 Oct 2023 01:55 PM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 20 Oct 2023 01:55 PM IST
सार
हड्डियां कमजोर होने पर ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी होती है। इसमें हड्डियों का बोन मास कम हो जाता है और वे भुरभुरी हो जाती हैं। इस बीमारी के दर्द के अलावा हड्डियों के फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। यह धीरे-धीरे होता है, धीरे-धीरे बढ़ता है और फिर इसका इलाज मुश्किल हो जाता है। ऐसे में इसे रोका जाना महत्वपूर्ण है।
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विस्तार
ऑस्टियोपोरोसिस के 80 प्रतिशत मरीजों में स्पाइन फ्रैक्चर हो रहा है। यह स्थिति बेहद गंभीर है। ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों में महिलाओं की संख्या पुरुषों की अपेक्षा कहीं ज्यादा है। हैरानी की बात है कि 40 साल से कम उम्र के लोग भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। यह खुलासा पीजीआई के ऑस्टियोपोरोसिस और मेटाबोलिक बोन डिजीज (ओपीएमबीडी) क्लीनिक में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों पर किए गए शोध में हुआ है।
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इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रभारी प्रो. संजय भडाडा के नेतृत्व में उनकी टीम ने तीन साल में क्लीनिक में पंजीकृत 300 मरीजों पर यह शोध किया है। उन मरीजों में महिलाओं की संख्या 80 प्रतिशत है और इनकी उम्र 50 से 60 साल के बीच है। इससे यह साबित होता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में बीमारी का खतरा अधिक है।
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20 फीसदी मरीजों में हिप का फ्रेक्चर
प्रो. संजय भडाडा ने बताया कि शोध में 20 प्रतिशत मरीजों में हिप का फ्रैक्चर पाया गया। इसके अलावा हाथ, पैर, कोहनी और एड़ी का फैक्चर मिला। वहीं, पंजीकृत में 5 प्रतिशत मरीज ऐसे थे, जो लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे थे। प्रो. संजय भडाडा ने बताया कि ऐसे मरीजों के लिए ही पीजीआई न्यू ओपीडी बिल्डिंग के कमरा नंबर 4007 में हर महीने के पहले मंगलवार को क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है।
पीजीआई में देश का पहला एचआरपीक्यूसीटी
प्रो. संजय भडाडा ने बताया कि पीजीआई में एचआरपीक्यूसीटी की स्थापना की गई है, जो जल्द ही संचालित होने जा रही है। इसके लिए उपकरण खरीदे जा चुके हैं। उच्च-रिजॉल्यूशन परिधीय मात्रात्मक गणना टोमोग्राफी (एचआर-पीक्यूसीटी) वॉल्यूमेट्रिक हड्डी खनिज घनत्व (वीबीएमडी) और कैंसलस और कॉर्टिकल हड्डी के माइक्रोआर्किटेक्चर का आकलन करने के लिए एक गैर-इनवेसिव इमेजिंग पद्धति है।
हड्डियों को कर देता है कमजोर
प्रो. संजय भडाडा के मुताबिक हड्डियां कमजोर होने पर ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी होती है। इसमें हड्डियों का बोन मास कम हो जाता है और वे भुरभुरी हो जाती हैं। इस बीमारी के दर्द के अलावा हड्डियों के फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। यह धीरे-धीरे होता है, धीरे-धीरे बढ़ता है और फिर इसका इलाज मुश्किल हो जाता है। ऐसे में इसे रोका जाना महत्वपूर्ण है। इसके लिए लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में जानना चाहिए। महिलाओं में यह ज्यादा होता है, क्योंकि बढ़ती उम्र में एस्ट्रोजन नामक हॉर्मोन कम होने लगता है। यह हॉर्मोन महिलाओं को हड्डियों के साथ-साथ दिल की समस्या से भी बचाता है।
प्रो. संजय भडाडा का कहना है कि लड़का हो या लड़की। सबकी हड्डियां किशोरावस्था तक ही बनती हैं। जो 30 साल तक जितना खेलेगा-कूदेगा, उसकी हड्डी उतनी मजबूत होगी। 30 की उम्र के बाद हड्डियों का विकास बंद हो जाता है। जो लोग एक्सरसाइज नहीं करते हैं और जिनकी डाइट में कैल्शियम व विटामिन डी की कमी होती है, उनकी हड्डियां खोखली होने लगती हैं।