Punjab Assembly: राज्यपाल के खिलाफ 30 को सुप्रीम कोर्ट जाएगी पंजाब सरकार, सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
राज्यपाल ने सीएम भगवंत मान को भेजे पत्र में कहा था कि यह सत्र राजभवन की बिना अनुमति बुलाया जा रहा है। ऐसे में तीन वित्त विधेयकों को पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कि इसके बावजूद अवैध विधानसभा सत्र बुलाया गया तो वह इसकी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजेंगे।
विस्तार
राज्यपाल की ओर से पंजाब विधानसभा के दो दिवसीय सत्र में तीन वित्त विधेयकों को पेश करने की अनुमति नहीं दिए जाने के खिलाफ पंजाब सरकार 30 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। इसके साथ ही शुक्रवार को दो दिवसीय सत्र के पहले दिन स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने दोपहर बाद सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
पहले दिन सदन में दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी गई लेकिन इसके बाद प्रश्नकाल में कांग्रेस सदस्यों ने यह सवाल उठाते हुए वेल में पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया कि स्पीकर बताएं कि यह सत्र वैध है या अवैध। हालांकि, स्पीकर ने इस सत्र को वैध बताया लेकिन कांग्रेसी सदस्य पूरे प्रश्नकाल के दौरान सदन में शोर-शराबा करते रहे। बाद में ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा और मुख्यमंत्री मान के बीच तू-तू-मैं-मैं हुई, जिसे लेकर सदन में दोनों पक्षों के बीच हाथापाई जैसी नौबत आ गई और स्पीकर को दस मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सुप्रीम कोर्ट जाने का एलान करने के बाद स्पीकर कुलतार सिंह संधवां से चालू सत्र को स्थगित करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद नवंबर के पहले हफ्ते में विधानसभा का सत्र फिर से बुलाया जाएगा और उसमें सभी बिल पेश किए जाएंगे। इस पर सत्तापक्ष और कांग्रेस से सदस्यों की सहमति के साथ स्पीकर ने दो दिवसीय सत्र को पहले ही दिन दोपहर बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। गौरतलब है कि बजट सत्र के हिस्से के रूप में सरकार की ओर से बुलाए गए इस दो दिवसीय सत्र को गैरकानूनी ठहराते हुए राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने राज्य सरकार को तीन वित्त विधेयक पेश करने की अनुमति देने से भी इन्कार कर दिया था।
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लोगों के कल्याण कार्यों में बाधाएं खड़ीं कर रहे राज्यपाल: सीएम
मुख्यमंत्री मान ने सदन में कहा कि उन्हें बजट सत्र के लिए भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था। वहां मात्र तीन मिनट में राज्य सरकार के पक्ष में फैसला आ गया था लेकिन इस प्रक्रिया के चलते सरकार को 25 लाख रुपये खर्च करने पड़े थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह 25 लाख रुपये जनता के थे, जो राज्यपाल की जिद के कारण खर्च करने पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे देश में गैर-भाजपा शासित राज्यों के राज्यपाल इस काम में लगे रहते हैं कि वह राज्य सरकारों को किस तरह ज्यादा से ज्यादा परेशान करें। उन्होंने कहा पंजाब में भी राज्यपाल लोगों के कल्याण के कार्यों में बाधाएं खड़ी कर रहे हैं।
मान ने दिखाया 2019 का पत्र
मुख्यमंत्री ने सदन में पिछली सरकार के दौरान संसदीय मामलों के मंत्री रहे ब्रह्म मोहिंद्रा की ओर से राज्यपाल को 23 नवंबर, 2019 को लिखा पत्र दिखाया, जिसमें उन्होंने राज्यपाल को 15वीं विधानसभा के नौवें सत्र के रूप में 26 नवंबर को विस्तारित सत्र बुलाने की जानकारी दी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय के राज्यपाल ने विस्तारित सत्र को लेकर कोई एतराज नहीं जताया था, जबकि मौजूदा राज्यपाल ने राष्ट्रपति से शिकायत करने की बात कही है। इससे पहले राज्यपाल अनुच्छेद 356 लगाने की बात भी कह चुके हैं। मान ने कहा कि वह राजभवन के साथ चल रही रोज-रोज की कड़वाहट को खत्म करना चाहते हैं। सरकार 30 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट जाएगी। इस पर कांग्रेस के सदस्य परगट सिंह ने कहा कि राज्यपाल के मुद्दे पर कांग्रेस राज्य सरकार के साथ है और राजभवन के साथ रोज-रोज की खींचतान को खत्म करना चाहती है।
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस का वेल में हंगामा
सदन में शुक्रवार को जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने स्पीकर से सवाल किया कि यह बताया जाए कि यह सत्र वैध है या अवैध? उन्होंने कहा कि राज्यपाल की ओर से सदन में बिल पेश करने की अनुमति नहीं देने से इस सत्र का कोई उद्देश्य नहीं रह गया है। सरकार को नए सिरे से सत्र बुलाना चाहिए। आखिर सरकार की क्या मजबूरी है? बाजवा ने स्पीकर से यह भी पूछा कि इस सत्र में क्या एसवाईएल के मुद्दे पर भी चर्चा कराई जाएगी? स्पीकर ने कहा कि यह सत्र पूरी तरह वैध है और उनके पास राज्यपाल की तरफ से कोई सूचना नहीं आई है। इसके बाद वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि जब स्पीकर तय कर चुके हैं कि सत्र वैध है तो सवाल खड़े नहीं करने चाहिए। इस पर चीमा और कांग्रेस सदस्यों के बीच बहस हो गई, जिसमें सत्ता पक्ष के अन्य सदस्य भी शामिल हो गए। कांग्रेस सदस्य स्पीकर के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए, जबकि स्पीकर ने उन्हें अनदेखा करते हुए प्रश्नकाल का कामकाज जारी रखा। पूरे प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस सदस्य वेल में नारेबाजी करते रहे।