कहां खर्च हुए 16 हजार करोड़, कुछ विकास नहीं दिखा : हाईकोर्ट
गुरुग्राम में दो दशक तक एक्स्ट्रा डेवलेपमेंट चार्ज(ईडीसी) वसूलने और 16 हजार करोड़ से अधिक का विकास कार्य करने के दावे पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सवालिया निशान लगा दिया।
हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल बीआर महाजन से पूछा कि मिस्टर एजी क्या आपने देखा है कि 16 हजार करोड़ से क्या विकास हुआ है, हमने तो कोशिश की पर दिखाई नहीं दिया। हां, अखबारों में बारिश के बाद दो दिन तक गाड़ियों के जाम में फंसे रहने की खबर जरूर पढ़ी है।
इस टिप्पणी के बाद एजी ने हाईकोर्ट को बताया कि स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि कितना विकास कार्य हुआ है और कितना जारी है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर हरियाणा सरकार से इस बारे में विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।
याची के वकील ने बताया कि हरियाणा सरकार की ओर से जो पिछले दो हलफनामे दाखिल किए गए हैं, उनमें खर्च के ब्यौरे में 3200 करोड़ से अधिक का फर्क है। हाईकोर्ट ने इस पर हरियाणा सरकार से जवाब मांगा।
16 हजार करोड़ खर्च हुआ फिर भी जलभराव क्यों?
हरियाणा सरकार ने कहा कि इन दोनों के मध्य कुछ जमीन का अधिग्रहण किया गया था और इसके कारण ही राशि में फर्क आया है। हाईकोर्ट ने कहा न तो पिछले दो दशक में ईडीसी का कोई ऑडिट हुआ और न ही इसके लिए कोई मानक निर्धारित किए गए, जो भी खर्च हुआ उसे ईडीसी से करने का काम किया गया। इसी बीच, एडवोकेट जनरल बीआर महाजन कोर्ट में पहुंचे।
हाईकोर्ट ने महाजन से पूछा कि गुड़गांव में थोड़ी सी बारिश से सड़क नालों में तब्दील हो जाती हैं, शहर के निचले इलाकों में पानी भरा रहता है, लोगों को पीने के पानी की किल्लत है, सीवरेज सिस्टम ठप पड़े हुए हैं और सरकार दावा कर रही है कि 16 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, क्या आप बता सकते हैं यह कहां खर्च हुएं हैं।
इसके साथ ही सरकार की ओर से सौंपे गए दो हलफनामों में खर्च की राशि में 3200 करोड़ के खर्च पर सरकार का क्या पक्ष है। हाईकोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार की स्थिति वर्तमान में सामने है, उसे देखकर लगता है कि ईडीसी के खर्च को स्कैम मानकर इसकी जांच को विजिलेंस को सौंप दिया जाए।
एजी ने इससे इनकार करते हुए कहा कि सरकार ने जो हलफनामे सौंपे हैं, उसमें विकास कार्य का पूरा ब्यौरा मौजूद है। कुछ कार्य किया जा रहा है और कुछ कार्य पूरा हो चुका है। पिछले तीन वर्ष में बड़ी तेजी से विकास कार्य हुआ है।
हाईकोर्ट ने कहा कि तीन साल में विकास कार्य आरंभ हुआ, क्या इससे पहले अधिकारी सो रहे थे। हाईकोर्ट ने एजी को आदेश दिए कि वे अगली सुनवाई पर बताएं कि ईडीसी के अधीन कौन-कौन से कार्य किए जा रहे हैं और इसके साथ ही खर्च में अंतर क्यों आ रहा है। जस्टिस एसएस सरों की खंडपीठ ने अगली सुनवाई 9 फरवरी को निर्धारित की है।