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पंजाबः अब पढ़ाई के वक्त चुनाव ड्यूटी नहीं करेंगे टीचर, 65 की उम्र में रिटायर होंगे स्पेशलिस्ट डॉक्टर
Sat, 21 Sep 2019 10:37 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 21 Sep 2019 10:37 AM IST
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पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब में अब टीचर्स पढ़ाई के वक्त चुनाव ड्यूटी नहीं करेंगे। वहीं प्रदेश में अब स्पेशलिस्ट डॉक्टर 65 साल की उम्र में रिटायर होंगे। पंजाब के मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने केंद्रीय चुनाव आयोग की हिदायतों के अनुसार राज्य के टीचरों को इन दिनों जारी फोटो वोटर सूची में सुधार की मुहिम में शामिल होने से छूट दे दी है। इस संबंध में फैसला पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा उठाए गए मुद्दे को ध्यान में रखते हुए लिया गया।
शिक्षा सचिव ने राज्य के सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिखकर कहा था कि अगर टीचिंग स्टाफ को स्कूल टाइम में बीएलओ की चुनाव ड्यूटी पर लगाया जाता है तो इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर विपरीत असर पड़ेगा। ऐसे में बच्चों के भविष्य को देखते हुए जहां तक संभव हो सके, टीचिंग स्टाफ को बीएलओ की चुनाव ड्यूटी से छूट दी जाए और नान-टीचिंग स्टाफ को चुनाव ड्यूटी पर लगाया जाए।
वहीं, वोटर सूची में सुधार के लिए डोर-टू-डोर सर्वे से संबंधित ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की चुनाव ड्यूटी टीचिंग स्टाफ से कराने के बारे में सुप्रीम कोर्ट और भारतीय चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्देशों में भी कहा गया है कि टीचिंग स्टाफ को केवल छुट्टियों में और गैर-शिक्षण दिनों के दौरान ही चुनाव ड्यूटी पर लगाया जाना चाहिए।
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टीचरों से पढ़ाई के दिनों में चुनाव ड्यूटी नहीं ली जानी चाहिए। हालांकि नान टीचिंग स्टाफ को ऐसी ड्यूटी पर किसी भी समय लगाया जा सकता है। पंजाब के मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने सभी डीसी को हिदायत जारी की है कि वोटर सूची में सुधार का काम 30 सिंतबर, 2019 तक हर हाल में पूरा किया जाना है। इसलिए नॉन टीचिंग स्टाफ को इस काम में लगाया जाए।
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शिक्षा सचिव ने राज्य के सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिखकर कहा था कि अगर टीचिंग स्टाफ को स्कूल टाइम में बीएलओ की चुनाव ड्यूटी पर लगाया जाता है तो इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर विपरीत असर पड़ेगा। ऐसे में बच्चों के भविष्य को देखते हुए जहां तक संभव हो सके, टीचिंग स्टाफ को बीएलओ की चुनाव ड्यूटी से छूट दी जाए और नान-टीचिंग स्टाफ को चुनाव ड्यूटी पर लगाया जाए।
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वहीं, वोटर सूची में सुधार के लिए डोर-टू-डोर सर्वे से संबंधित ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की चुनाव ड्यूटी टीचिंग स्टाफ से कराने के बारे में सुप्रीम कोर्ट और भारतीय चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्देशों में भी कहा गया है कि टीचिंग स्टाफ को केवल छुट्टियों में और गैर-शिक्षण दिनों के दौरान ही चुनाव ड्यूटी पर लगाया जाना चाहिए।
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टीचरों से पढ़ाई के दिनों में चुनाव ड्यूटी नहीं ली जानी चाहिए। हालांकि नान टीचिंग स्टाफ को ऐसी ड्यूटी पर किसी भी समय लगाया जा सकता है। पंजाब के मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने सभी डीसी को हिदायत जारी की है कि वोटर सूची में सुधार का काम 30 सिंतबर, 2019 तक हर हाल में पूरा किया जाना है। इसलिए नॉन टीचिंग स्टाफ को इस काम में लगाया जाए।
पंजाब सरकार ने स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की रिटायरमेंट आयु 60 से बढ़ा कर 65 साल कर दी है। रिटायरमेंट के बाद भी वे सेहत विभाग में सेवाएं दे सकेंगे। सेहत मंत्री बलबीर सिद्धू ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट की कमी को देखते हुए यह फैसला किया गया है।
384 खाली पदों पर रेगुलर भर्ती तक सर्जन, गायनेकोलॉजिस्ट, ऑर्थोपीडीशियन, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट को कंसल्टेंट के तौर पर रखा जाएगा। इनका कार्यकाल एक साल के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर होगा। उनका प्रदर्शन देख कर कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया जाएगा। उनका वेतन, आखिरी वेतन में से पेंशन की राशि घटा कर तय होगा। ये सिर्फ क्लीनिकल ड्यूटी निभाएंगे, प्रशासनिक नहीं। 65 साल पूरे होने के बाद किसी भी हालत में उनकी सेवा बरकरार नहीं रहेगी।
384 खाली पदों पर रेगुलर भर्ती तक सर्जन, गायनेकोलॉजिस्ट, ऑर्थोपीडीशियन, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट को कंसल्टेंट के तौर पर रखा जाएगा। इनका कार्यकाल एक साल के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर होगा। उनका प्रदर्शन देख कर कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया जाएगा। उनका वेतन, आखिरी वेतन में से पेंशन की राशि घटा कर तय होगा। ये सिर्फ क्लीनिकल ड्यूटी निभाएंगे, प्रशासनिक नहीं। 65 साल पूरे होने के बाद किसी भी हालत में उनकी सेवा बरकरार नहीं रहेगी।