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Report: टीकाकरण में सुधार, मगर अब भी 10 लाख बच्चे टीके से महरूम
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 03 May 2017 09:40 AM IST
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टीके को लेकर भ्रांतियां न फैलाए
- फोटो : Demo Pic
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बेशक भारत में लगातार चलाए जा रहे टीकाकरण प्रोग्राम से सफलता तो मिली है, लेकिन अब भी एक बड़े अभियान की जरूरत है। दस सालों में यूपी, पंजाब, बिहार और छत्तीसगढ़ में टीकाकरण प्रोग्राम में जबरदस्त सफलता मिलती है। हाल ही में आए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक इन राज्यों में दोगुना बच्चों को टीकाकरण हुआ है।
साल 2005-06 में बिहार में सिर्फ 32.8 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण हुआ था, जबकि साल 2015-16 में ये आंकड़ा 61.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसी तरह से यूपी में 23 प्रतिशत से बढ़कर टीकाकरण 51 प्रतिशत तक पहुंचा गया है। टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़े पीजीआई के विशेषज्ञ कहते हैं कि हर बच्चे का टीकाकरण बहुत जरूरी है।
एक भी बच्चा नहीं छूटना चाहिए, लेकिन यदि 90 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों को कवर कर लिया जाए तो ये भी एक सफलता होगी। मेट्रो सिटी में टीकाकरण का आंकड़ा थम सा गया है। दिल्ली में अब भी 35-40 प्रतिशत बच्चों को टीका नहीं लग पाता है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में भी बताया गया है कि दिल्ली में 66.4 प्रतिशत बच्चे टीकाकरण के दायरे में हैं।
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साल 2005-06 में बिहार में सिर्फ 32.8 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण हुआ था, जबकि साल 2015-16 में ये आंकड़ा 61.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसी तरह से यूपी में 23 प्रतिशत से बढ़कर टीकाकरण 51 प्रतिशत तक पहुंचा गया है। टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़े पीजीआई के विशेषज्ञ कहते हैं कि हर बच्चे का टीकाकरण बहुत जरूरी है।
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एक भी बच्चा नहीं छूटना चाहिए, लेकिन यदि 90 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों को कवर कर लिया जाए तो ये भी एक सफलता होगी। मेट्रो सिटी में टीकाकरण का आंकड़ा थम सा गया है। दिल्ली में अब भी 35-40 प्रतिशत बच्चों को टीका नहीं लग पाता है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में भी बताया गया है कि दिल्ली में 66.4 प्रतिशत बच्चे टीकाकरण के दायरे में हैं।
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वेस्ट यूपी की हालत खराब, पीजीआई की टीम ने लगाए टीके
टीके को लेकर भ्रांतियां न फैलाए
पीजीआई के डाक्टरों ने बताया कि पश्चिमी यूपी की हालत बहुत ज्यादा खराब है। वहां से बीमार होकर बच्चे पीजीआई पहुंचते हैं। बात करने पर पता चला कि वहां पर बच्चों को टीके ही नहीं लगे। बाद में पीजीआई की टीम पहुंची। मौलवी से बात कर खुद बच्चों को टीके लगाए। ऐसे करीब 8-10 गांवों में पीजीआई ने अपनी तरफ से कदम उठाए थे।
भारत में हर साल 11 लाख बच्चों की मौत
भारत में हर साल 0-5 उम्र के करीब 11 लाख बच्चों की मौत होती है। इसमें 13 प्रतिशत मौतें निमोनिया से और 10 प्रतिशत मौतें डायरिया से होती हैं। भारत में टीकाकरण के अभियानों में अहम रोल निभा रहे यूनिसेफ ने बताया है कि भारत में हर साल करीब दस लाख बच्चों को पूरे टीके नहीं लगते। इसके पीछे कमजोर हेल्थ सिस्टम, गरीबी और अशिक्षा है।
भारत में हर साल 11 लाख बच्चों की मौत
भारत में हर साल 0-5 उम्र के करीब 11 लाख बच्चों की मौत होती है। इसमें 13 प्रतिशत मौतें निमोनिया से और 10 प्रतिशत मौतें डायरिया से होती हैं। भारत में टीकाकरण के अभियानों में अहम रोल निभा रहे यूनिसेफ ने बताया है कि भारत में हर साल करीब दस लाख बच्चों को पूरे टीके नहीं लगते। इसके पीछे कमजोर हेल्थ सिस्टम, गरीबी और अशिक्षा है।
भारत को पोलियो मुक्त करने में यूनिसेफ का बड़ा योगदान
टीकाकरण
टीकाकरण के कार्यक्रमों में यूनिसेफ की महत्वपूर्ण भूमिका है। खासकर पोलियो मुक्त भारत बनाने में। विश्व टीकाकरण दिवस पर यूनिसेफ ने दावा किया कि दुनिया में करीब आधे बच्चों तक उसने जीवन रक्षक टीका पहुंचाया है।
वर्ष 2016 में दुनिया के करीब 100 देशों के बच्चों के लिए टीके की 2.5 अरब खुराक खरीद कर 0-5 साल के बच्चों तक टीके पहुंचाए हैं। इन आंकड़ों से यूनीसेफ दुनिया में बच्चों के लिए टीकों का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।
यूनिसेफ के मुताबिक नाइजीरिया, पाकिस्तान और अफगानिस्तान अब भी पोलियो से प्रभावित देशों में हैं। यूनिसेफ ने टीकों की 450 मिलियन खुराक नाइजीरिया, 150 मिलियन खुराक अफगानिस्तान और 395 मिलियन खुराक पाकिस्तान के लिए आपूर्ति की है।
न्यूयार्क में यूनिसेफ के टीकाकरण अभियान के प्रमुख डॉ. रॉबिन नंदी ने कहा कि दुनिया में किसी भी हालत में और कहीं भी रह रहे बच्चों का टीकाकरण उनका अधिकार है। 1990 से टीकाकरण की वजह से शिशु मृत्यु दर में काफी कमी दर्ज की गई है, लेकिन बावजूद इसके आज भी हर साल 1.5 मिलियन बच्चों की मौत उन बीमारियों से होती है जिनकी रोकथाम के टीका बाजार में मुहैया हैं।
वर्ष 2016 में दुनिया के करीब 100 देशों के बच्चों के लिए टीके की 2.5 अरब खुराक खरीद कर 0-5 साल के बच्चों तक टीके पहुंचाए हैं। इन आंकड़ों से यूनीसेफ दुनिया में बच्चों के लिए टीकों का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।
यूनिसेफ के मुताबिक नाइजीरिया, पाकिस्तान और अफगानिस्तान अब भी पोलियो से प्रभावित देशों में हैं। यूनिसेफ ने टीकों की 450 मिलियन खुराक नाइजीरिया, 150 मिलियन खुराक अफगानिस्तान और 395 मिलियन खुराक पाकिस्तान के लिए आपूर्ति की है।
न्यूयार्क में यूनिसेफ के टीकाकरण अभियान के प्रमुख डॉ. रॉबिन नंदी ने कहा कि दुनिया में किसी भी हालत में और कहीं भी रह रहे बच्चों का टीकाकरण उनका अधिकार है। 1990 से टीकाकरण की वजह से शिशु मृत्यु दर में काफी कमी दर्ज की गई है, लेकिन बावजूद इसके आज भी हर साल 1.5 मिलियन बच्चों की मौत उन बीमारियों से होती है जिनकी रोकथाम के टीका बाजार में मुहैया हैं।