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शास्त्रीय संगीत से हर बार कुछ नया सीखने को मिलता है: राजविंदर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 14 May 2016 12:47 PM IST
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सिंगर राजविंदर कौर
- फोटो : अमर उजाला
संगीत को जितनी गहराई में नापना चाहोगे तो हर बार कुछ नया सीखने को मिलेगा। यह कहना है युवा गायिका राजविंदर कौर का, जो शुक्रवार को शहर में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने संगीत के बारे में चर्चा की।
अमृतसर की रहने वाली राजविंदर ने बताया की शास्त्रीय संगीत एक ऐसी विधा है जिससे हर बार कुछ नया सीखने को मिलता है। अपने बारे में उन्होंने बताया कि वह शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ सूफी, शबद और गजल भी गाती हैं। लता मंगेशकर व श्रेया घोषाल उनकी पंसदीदा गायकों में हैं।
उनका मानना है कि जिस प्रकार सांस लेना जरूरी है उसी प्रकार एक गायक के लिए रियाज करना भी जरूरी है, इसलिए वह रोजाना सुबह-शाम रियाज करती हैं। राजविंदर देश के साथ ही विदेशों में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनका मकसद शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देना है क्योंकि आज की पीढ़ी का शास्त्रीय संगीत की तरफ बिल्कुल रुझान नहीं है। बहुत कम युवा है जिनकी रुचि इस तरफ है। जबकि संगीत का आधार ही शास्त्रीय गायन है। उनके अनुसार युवा पश्चिमी संगीत को अपना रहे हैं।
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अमृतसर की रहने वाली राजविंदर ने बताया की शास्त्रीय संगीत एक ऐसी विधा है जिससे हर बार कुछ नया सीखने को मिलता है। अपने बारे में उन्होंने बताया कि वह शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ सूफी, शबद और गजल भी गाती हैं। लता मंगेशकर व श्रेया घोषाल उनकी पंसदीदा गायकों में हैं।
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उनका मानना है कि जिस प्रकार सांस लेना जरूरी है उसी प्रकार एक गायक के लिए रियाज करना भी जरूरी है, इसलिए वह रोजाना सुबह-शाम रियाज करती हैं। राजविंदर देश के साथ ही विदेशों में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनका मकसद शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देना है क्योंकि आज की पीढ़ी का शास्त्रीय संगीत की तरफ बिल्कुल रुझान नहीं है। बहुत कम युवा है जिनकी रुचि इस तरफ है। जबकि संगीत का आधार ही शास्त्रीय गायन है। उनके अनुसार युवा पश्चिमी संगीत को अपना रहे हैं।
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