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Chandigarh News: प्राचीन कला केंद्र में संगीत की विशेष संध्या, 40 कलाकारों ने दी प्रस्तुति
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प्राचीन कला केंद्र सेक्टर 35 में प्रस्तुति देते कलाकार।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। सेक्टर-35 स्थित प्राचीन कला केंद्र के एमएल कौसर सभागार में सोमवार को संगीत की विशेष संध्या का आयोजन हुआ। इसमें केंद्र के विद्यार्थियों ने संगीत शिक्षिका शिवानी अंगरीश के निर्देशन में अपनी कला का प्रदर्शन कर खूब वाहवाही के साथ तालियां बटोरीं। इसमें 10 से 45 वर्ष तक के लगभग 40 कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
कुल नौ प्रस्तुतियों से सजी परंपरा में सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद राग मालकौंस में निबद्ध एक रचना पेश की गई। इसके बाद कलाकारों के समूह द्वारा एक मधुर भजन गोविंद के गुण गाना पेश किया गया। इसके बाद कलाकारों ने शुद्ध शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने हिमाचली गाना पेश किया। इसके बाद राग जोग पर आधारित बंदिश पेश की गई। खूबसूरत भजन नाच्यो बहुत गोपाल प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का अंतिम भाग में राग बिहाग से सजी बंदिश पेश की गई। कार्यक्रम का समापन एक सुंदर भजन भजो रे भैया राम गोविंद हरी... द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अंत में केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर ने कलाकारों एवं गुरु शिवानी अंगरीश की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत सीख रहे ये विद्यार्थी देश की खूबसूरत एवं विराट संस्कृति को प्रफुल्लित एवं प्रसारित करने में अपना योगदान दे रहे हैं। केंद्र द्वारा एक सराहनीय कदम है।
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कुल नौ प्रस्तुतियों से सजी परंपरा में सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद राग मालकौंस में निबद्ध एक रचना पेश की गई। इसके बाद कलाकारों के समूह द्वारा एक मधुर भजन गोविंद के गुण गाना पेश किया गया। इसके बाद कलाकारों ने शुद्ध शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने हिमाचली गाना पेश किया। इसके बाद राग जोग पर आधारित बंदिश पेश की गई। खूबसूरत भजन नाच्यो बहुत गोपाल प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का अंतिम भाग में राग बिहाग से सजी बंदिश पेश की गई। कार्यक्रम का समापन एक सुंदर भजन भजो रे भैया राम गोविंद हरी... द्वारा किया गया।
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कार्यक्रम के अंत में केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर ने कलाकारों एवं गुरु शिवानी अंगरीश की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत सीख रहे ये विद्यार्थी देश की खूबसूरत एवं विराट संस्कृति को प्रफुल्लित एवं प्रसारित करने में अपना योगदान दे रहे हैं। केंद्र द्वारा एक सराहनीय कदम है।
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