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Chandigarh News: पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग की खास उपलब्धि, पहली बार मरीज का सफलतापूर्वक किया गुर्दा प्रत्यारोपण

Sat, 04 Mar 2023 10:50 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 04 Mar 2023 10:50 AM IST
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Special achievement of PGI's urology department, for the first time the patient was successfully transplanted kidney
चंडीगढ़। पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ ने पहली बार एक मरीज का सफलतापूर्वक गुर्दा प्रत्यारोपण किया है। 20 फरवरी को मरीज में सफल गुर्दा प्रत्यारोपण के साथ ही संस्थान की उपलब्धियों में एक और कड़ी जुड़ गई है क्योंकि मौजूदा समय में रिनल ट्रांसप्लांट यूनिट में गुर्दे के मरीजों का प्रत्यारोपण किया जा रहा है। वहीं अब यूरोलॉजी विभाग के सर्जन को भी गुर्दा प्रत्यारोपण की अनुमति मिलने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी। साथ ही यूरोलॉजी विभाग के पाठ्यक्रम में भी अब गुर्दा प्रत्यारोपण को शामिल कर लिया गया है। ऐसे में इसके छात्रों को शैक्षणिक उपलब्धि के तौर पर पढ़ाई पूरी करने के बाद गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए प्रमाणित माना जाएगा। यह जानकारी यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. उत्तम के मेटे ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में दी। इस दौरान विभाग में पहली बार गुर्दा प्रत्यारोपित किए गए मरीज के साथ ही उसे अपना गुर्दा देने वाली मां भी मौजूद थी।
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उन्होंने बताया कि विभाग ने यह महसूस किया कि यूरोलॉजी के रेजिडेंट डॉक्टरों को गुर्दा प्रत्यारोपण में भी प्रशिक्षित किया जाना जरूरी है। इसलिए इसे पाठ्यक्रम में शामिल कर छात्रों के साथ ही मरीजों को बेहतर सुविधा प्रदान करने का प्रयास किया है। डॉ. उत्तम ने बताया कि देश में 640 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल हैं लेकिन मौजूदा समय में कुछ ही जगहों पर गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध है। ऐसा महसूस होता है कि प्रत्यारोपण सर्जन की कमी को दूर कर इसे और आसान बनाया जा सकता है क्योंकि गुर्दा प्रत्यारोपण के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
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डॉक्टरों का प्रशिक्षण होगा पूरा, कम होगा दबाव

डॉ. उत्तम ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग का अस्तित्व 50 से भी पहले का है, लेकिन अब तक रीनल ट्रांसप्लांट को इसका हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया समझ से परे हैं। यह बेहद जरूरी था क्योंकि हर साल विभाग से एमसीएच यूरोलॉजी में अध्ययनरत कम से कम छह छात्र पासआउट होते हैं। इन सभी को गुर्दा प्रत्यारोपण की अनुमति देकर विशेषज्ञों की कमी को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। इस पाठ्यक्रम के तहत विभाग ने डॉ. शैंकी सिंह को गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए पंजीकृत किया है। 20 फरवरी को पहले मरीज का प्रत्यारोपण किया गया। मरीज और डोनर दोनों ही ठीक हैं, उन्हें पीजीआई से छुट्टी दे दी गई है।
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इनसेट-
2500 से ज्यादा मरीज इंतजार में
पीजीआई में गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए पंजीकृत मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। मौजूदा समय में 2594 मरीज गुर्दा प्रत्यारोपण की प्रतिक्षा सूची में हैं। नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. एचएस कोहली ने बताया कि जिस रफ्तार से किडनी संबंधी बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसकी तुलना में किडनी दान करने वालों की संख्या बेहद कम है। पीजीआई में गुर्दा प्रत्यारोपण का आंकड़ा देखा जाए तो गुर्दा देने वालों में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में ज्यादा है।
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